अमृतसर: पिता ने दी बेटे को मुखाग्नि।सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के आरोपी अमृतसर के गांव भकना में हुए एनकाउंटर में मारे गए जगरूप सिंह रूपा का दाह संस्कार वीरवार-शुक्रवार की रात 2 बजे ही कर दिया गया। संस्कार तरनतारन में पट्टी स्थित उसके पैतृक गांव जोड़ा में किया गया। बीते 5 सालों से घर से बाहर रह रहे गैंगस्टर रूपा को अंतिम समय में भी घर नसीब नहीं हुआ।गौरतलब है कि जगरूप सिंह रूपा का पोस्टमार्टम खत्म होने व अमृतसर से निकलने में तकरीबन 12 बजे का समय हो गया था। देर रात पुलिस सुरक्षा के बीच रूपा के शव को उसके गांव जोड़ा में लाया गया। गांव के कुछ लोग एकत्रित हुए और अंधेरे में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। शव घर न ले जानकर सीधे श्मशान घाट ले जाया गया।रात 2 बजे के करीब अमृतसर से चली गाड़ियां गांव जोड़ा पहुंची।पिता ने पहले शव लेने से किया था मनाजगरूप सिंह रूपा के पिता बलजिंदर सिंह ने पहले शव लेने से इंकार कर दिया था। रूपा की मां ने भी कहा था कि उसे अपने किए की सजा मिल गई। पुलिस के कहने पर बलजिंदर सिंह गांव के सरपंच और अपने चचेरे भाई के साथ बेटे का शव लेने पहुंचे थे।रूपा पर कुल 9 मुकदमे दर्ज थेजगरूप सिंह रूपा 12वीं पास था। भाई तो आर्मी जॉइन करके देशसेवा में लग गया, लेकिन रूपा गलत संगत में पड़ गया। रूपा पर कुल 9 एफआईआर दर्ज हैं। तरनतारन में 5 मामले, एक तरसिक्का में दो फिरोजपुर के जीरा और एक जंडियाला गुरू में दर्ज है। 7 मामले चोरी के साथ- साथ आर्म्स एक्ट के और एक मामला एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज है।परिवार से भी करता था मारपीटजगरूप सिंह रूपा नशे का आदी था। वह नशे की पूर्ति के लिए घरवालों से पैसे मांगता था। पैसे न मिलने पर वह घर का सामान बेच देता था। अगर फिर भी कुछ न बने तो माता-पिता के साथ मारपीट करने में भी संकोच नहीं करता था। इसके चलते कई साल पहले ही उसे परिवार ने बेदखल कर दिया था। इसके बाद से वह कई-कई महीनों घर से दूर रहने लगा था। 5 साल से घर नहीं आया था।


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