बिलासपुर: CIMS के डॉक्टरों ने कैंसर का किया सफल ऑपरेशन।छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान में पैंक्रियाज के मरीजों का सफल उपचार होने लगा है। चिकित्सकों की टीम ने एक मरीज के पैंक्रियाटिक कैंसर का सफल सजर्री कर उसे ठीक नई जिंदगी दी है। मरीज पिछले लंबे समय से पेट दर्द से परेशान रहता था। ऑपरेशन के बाद वह अब स्वस्थ्य है।बिलासपुर के रतनपुर निवासी 46 वर्षीय बहोरन पटेल पिछले कुछ समय से पेट में दर्द से परेशान रहता था। उसे पीलिया बीमारी की भी शिकायत थी। वह अपनी बीमारी के लिए CIMS में इलाज कराने पहुंचा, जहां सर्जन डॉ. मृणाल शर्मा ने उसे भर्ती कराने के बाद जांच की। इस दौरान उसकी जांच रिपोर्टस से पता चला कि उसके पैंक्रियाज के हेड में ट्यूमर है।इलाज के दौरान सर्जरी के लिए तैयार किया गया मरीजडॉ. मृणाल शर्मा ने बताया कि मरीज की जांच के बाद पता चला गया था कि उसके पैंक्रियाज का ऑपरेशन करना पड़ेगा। लिहाजा , इलाज के दौरान मरीज़ का पीलिया वैक्सिंग और वेनिंग के तहत टोटल बिलीरूबिन में सुधार हुआ। इसके बाद डॉ. मृणाल शर्मा ने बिना विलंब किए मरीज़ को मेजर इलेक्टिव सर्जरी व्हिपल्स ऑपरेशन के लिए तैयार किया।पेट के निचले हिस्से के साथ ही कैंसर ट्यूमर को निकालाउन्होंने बताया कि मरीज़ का व्हिपल्स ऑपरेशन (पैंक्रियाटिकोड्यूडेनेक्टमी) किया गया। ऑपरेशन में सी-लूप डुओडेनम के साथ पैंक्रियाज़ के हेड में कैंसर ट्यूमर, डिस्टल कॉमन बाइल डक्ट, गॉल ब्लैडर, लिम्फ़ नोड अथवा पेट के निचले हिस्से को निकाला गया। सर्जरी जटिल था, ट्यूमर नज़दीकी प्रमुख ब्लड वेसल्स से सटा हुआ था। फिर पुनर्निर्माण के लिए तीन जेजुनल-लूप एनास्टोमोसिस (पैंक्रियाटिकोजेजुनोस्टॉमी, कोलेडोकोजेजूनोस्टोमी और गैस्ट्रोजेजूनोस्टोमी) किया गया।आठ घंटे तक हुआ जटिस सर्जरीसर्जरी में लिगासुर वेसल सीलिंग अल्ट्रासोनिक स्केलपेल सिस्टम का मैनोयूव्रे एवं विभिन्न स्टेप्स में प्रयोग किया गया। सारे एनास्टोमोसिस हैंड-सोइंग किया गया। इस जटिल ऑपरेशन में आठ घंटे का समय लगा। सर्जरी डॉ. मृणाल शर्मा और डॉ. नीरज शेंडे ने किया। साथ ही उन्हें डॉ. कोमल देवांगन असिस्ट किया।अब मरीज को डिस्चार्ज करने की है तैयारीडॉ. शर्मा ने बताया कि ऑपरेशन में जनरल एनेस्थीसिया डॉ. मिल्टन देबबर्मा ने दिया। डॉ. वंदिता मिश्रा ने एनेस्थीसिया में असिस्ट किया। इसके साथ ही स्टाफ़ नर्स मीना निराला, OT स्टाफ़ संतोष पाण्डेय ने भी सर्जरी में असिस्ट किया। पोस्ट-ऑपरेटिव मरीज़ स्थिर है। ऑपरेशन के छठवें दिन से भोजन शुरू कर दिया है। मरीज़ ने अब चलना-फिरना भी शुरू कर दिया है। टब उसे कुछ दिनो में डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। फिलहाल, मरीज़ को नियमित फ़ॉलो-अप में रखा जाएगा।


Comments are closed.