कुरुक्षेत्र के बुढेड़ा हेड पहुंचा रावी-ब्यास जल ट्रिब्यूनल:पंजाब से पानी विवाद. हरियाणा के दावों को परखा – Ravi-beas Water Tribunal Reaches Budhera Head In Kurukshetra Water Dispute With Punjab Haryana Claims Examined
हरियाणा-पंजाब के बीच पानी के बंटवारे की असल स्थित का आकलन करने के लिए रावी-ब्यास टि्रब्यूनल की टीम शनिवार को कुरुक्षेत्र के बुढेड़ा हेड पर पहुंची। रावी और ब्यास नदियों के पानी बंटवारे पर पंजाब-हरियाणा और राजस्थान के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद में अब निर्णायक मोड़ आने की उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार की ओर से गठित रावी-ब्यास जल ट्रिब्यूनल ने इस दिशा में गहन पड़ताल शुरू कर दी है। बुढेड़ा हेड पर करीब दो घंटे तक गहन निरीक्षण करते हुए राज्य के पानी उपयोग संबंधी दावों की गहन जांच की।
चेयरमैन जस्टिस विनीत सरन के नेतृत्व में ट्रिब्यूनल के सात सदस्य, पंजाब के 13, राजस्थान के 10, दिल्ली जल बोर्ड के दो, केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के चार व हरियाणा के 15 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहा। टीम सबसे पहले बुढेड़ा हेड पर सिंचाई विभाग के तकनीकी विशेषज्ञों व उच्च अधिकारियों ने प्रोजेक्टर और मान चित्रों के माध्यम से हरियाणा की नहर प्रणाली की भौगोलिक स्थिति, क्षमता और वर्तमान पानी उपयोग की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। इस बीच ट्रिब्यूनल ने करीब दो घंटे तक अधिकारियों से चर्चा की और पूरे हेड का गहन निरीक्षण किया। नहरों की पूरी वीडियोग्राफी भी कराई गई।
हरियाणा के अधिकारियों ने दावा किया कि राजीव लोंगेवाल समझौते के तहत उन्हें पंजाब से 3.5 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी प्राप्त होना चाहिए लेकिन वर्तमान में मात्र 1.88 एमएएफ पानी ही मिल रहा है। इससे दक्षिण हरियाणा की नहरें 30 दिन से ज्यादा सूखी रहती है। हरियाणा सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों व कानूनी विशेषज्ञों ने टि्रब्यूनल के समक्ष पक्ष रखते हुए बताया कि अगर उन्हें अब भी पानी नहीं मिलता है, उनके लिए दिल्ली को पानी देना मुश्किल हो जाएगा। ट्रिब्यूनल ने परखा कि हरियाणा जिस मात्रा में पानी का दावा कर रहा है, क्या उसकी नहरों की क्षमता और उपयोग क्षमता उसके अनुरूप है।


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