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पी॰ वी॰ नरसिम्हा राव जीवन परिचय | P V Narasimha Rao biography in hindi

P V Narasimha Rao biography in hindi राव जी भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री थे. यह दक्षिण से बनने वाले पहले प्रधानमंत्री थे . यह असंख्य प्रतिभा के घनी थे . इन्हें कई विधाओं का ज्ञान प्राप्त था . यह 1991-1996 के बीच भारत के प्रधानमंत्री थे .इन्हें संगीत, साहित्य एवम कला में विशेष रूचि अवन ज्ञान भी प्राप्त था . इन्हें विभिन्न भाषाओँ का ज्ञान प्राप्त था इन्हें भारतीय भाषाओँ के साथ स्पेनिश और फ़्रांसिसी भाषाओँ का भी ज्ञान था . यह बहुत शौक़ीन थे, इन्हें फ़िल्मी दुनिया से भी प्रेम था . राजनीति के साथ इन जगहों में भी रूचि होना इन्हें सबसे  अलग बनाता था . यह कर्मठ व्यक्ति थे जो डींगे हांकने के बजाय करने में विश्वास रखते थे .

पी॰ वी॰ नरसिम्हा राव जीवन परिचय  ( P V Narasimha Rao biography in hindi )

नरसिम्हा राव आरंभिक जीवन (P V Narasimha Rao early life) –

क्रमांकजीवन परिचय बिंदु राव जीवन परिचय1.       पूरा नामपामुलापार्ती वेंकट नरसिम्हा राव2.       जन्म28 जून 19213.       जन्म स्थानकरीम नगर गाँव, हैदराबाद4.       माता – पितारुकमनीअम्मा – पी रंगा राव5.       म्रत्यु23 दिसम्बर 2004 दिल्ली6.       पत्नीसत्याम्मा राव (मृत्यु 1970)7.       राजनैतिक पार्टीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

इनका जन्म 28 June 1921 को आंध्रप्रदेश  के छोटे से गाँव करीम नगर  में हुआ था. 3 साल की उम्र में इन्हें पी. रंगा व रुकमनीअम्मा द्वारा गॉड ले लिया गया था. इसके बाद यही इनके माता पिता कहलाये.  इनका पूरा नाम पामुलापति वेंकट राव था इनके बहुत करीबी इस नाम से परिचित रहे . इनका अध्ययन उस्मानिया विश्वविद्यालय से प्रारंभ हुआ . इनकी उच्चतम शिक्षा बॉम्बे  एवम नागपुर से हुई. इन्होने लॉ में मास्टर डिग्री प्राप्त की थी. नरसिम्हा जी की शादी सत्याम्मा से ही थी, जिनसे उन्हें 3 बेटे व् 5 बेटियां हुई. इनके बेटे भी इनकी तरह राजनीती में सक्रीय है.

पी वी नरसिम्हा राव का राजनैतिक सफ़र (P V Narasimha Rao political career) –

यह भारत में एक भारतीय वकील, स्वतंत्रता संग्रामी  एवम राजनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते है. इन्होने भारतीय राजनीति में बहुत अहम रोल अदा किया . इन्होने बहुत से आर्थिक परिवर्तन किये इसलिए इन्हें “भारतीय आर्थिक सुधारों के जनक” (Father of Indian Economic Reforms) भी कहा जाता है . इनके द्वारा लिए गए गंभीर फैसलों को आगामी प्रधानमंत्री ने भी जारी रखा. इन्होने डॉ मनमोहन सिंह  को वित्त मंत्री बनाया . राव के आदेष पर डॉ मनमोहन  ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष नीति प्रारंभ (International Monetary Fund policy) की. जिसके कारण बैंक में होने वाले भ्रष्टाचार में काफी कमी आई . राव को भारतीय संस्कृति से काफी लगाव था. भारत के राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम  ने  इनके लिए कहा था कि यह ऐसे देशभक्त है जो देश को राजनीति से सर्वोपरी मानते है .

राव का प्रधानमंत्री  के रूप में मिली प्रसिध्दी आज भी सजीव है . राव के कार्यकाल में ही अब्दुल कलाम जी ने परमाणु के परिक्षण की तरफ जोर दिया, पर 1996 के आम चुनाव  के कारण यह उस वक्त सम्भव नहीं हुआ, बाद में  परमाणु का सफल परिक्षण बीजेपी सरकार के प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी  ने करवाया . उस वक्त कांग्रेस के सामने बीजेपी ने देश में एक प्रबल दावेदारी साबित कर दी थी . राव के कार्यकाल में देश में हिन्दू मुस्लिम लड़ाई जोरो पर थी. बाबरी मस्जिद और राम मंदिर को लेकर देश में बहुत अशांति थी, जिसे भड़का कर देश के अन्य नेता अपनी राजनीति खेल रहे थे . सांप्रदायिक लड़ाई हमेशा ही देश की प्रगति में बाधक है जो कि आज तक देश में व्याप्त है . इन्ही सब घटनाओ जैसे इन्दिरा गाँधी की मौत के बाद देश में फैली अशांति, बाबरी मस्जिद के टूटने के कारण हुए दंगे इन्हें बहुत परेशनियों का सामना करना पड़ा.

नरसिम्हा राव जी को भ्रष्ट्राचारी होने का आरोप भी झेलना पड़ा, पर इन्होने किसी भी आरोप पर अपने मत नहीं रखे, इसलिए इन्हें गूंगा प्रधानमंत्री कहा गया. इन पर सांसदों को रिश्वत देकर अपनी तरफ कर लेने के भी आरोप लगे . हर्षद मेहता ने इन पर 1 करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप लगाया. सांप्रदायिक झगड़ो ने उस वक्त भारत में आतंक फैला रखा था, जिस पर काबू पाना बहुत मुश्किल था . आंतकी ताकतों और सत्ता लोभियों ने इन परिस्थितियों का भरपूर फायदा उठाया . परिस्थितियों के कारण  प्रधानमंत्री  बनना तो आसान था, पर उसका निर्वाह करना बहुत कठिन हो गया था . इन्दिरा के कार्यकाल के दौरान नरसिम्हा राव जी गृहमंत्री थे, उस वक्त भी इन पर कई सवाल उठाये गए . राजीव गाँधी की मृत्यु के बाद नरसिम्हा राव जी को एक प्रबल दावेदार के रूप में देखा गया, इसलिए  इनका नाम प्रधानमंत्री के पद के लिए सामने आया .

नरसिम्हा राव जी का स्वास्थ्य बहुत ख़राब रहता था, लेकिन वे अपने दायित्वों का निर्वाह पूरी लगन और निष्ठा से किया करते थे. इनके दिल में देश प्रेम अपार था . स्वतंत्रता सेनानी से प्रधानमंत्री के पद में पहुँचने तक, इनमे  देशहित बहुत प्रबल था. यह पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जो दक्षिण के थे, जिनको हिंदी नहीं आती थी. जवाहर नेहरु एवम गाँधी परिवार के अलावा यह पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने पुरे 5 सालों तक भारत के  शासन को सम्भाला. नरसिम्हा राव ने महाराष्ट्रा के नन्द्याल से चुनाव लड़ा और उसमें 5 लाख वोट से जीत हासिल की. जिसके लिए इनका नाम गिनीज़ बुक में शामिल किया गया . इन्होने काँग्रेस को एक सफल राजनीति दी. उस वक्त प्रधानमंत्री  अगर सफल थे, तो वो गाँधी या नेहरु परिवार से थे, परन्तु उन सभी की मृत्यु ने देश को बहुत आघात पहुंचाया. उनके अलावा जो भी इस पद पर आसीन हुए, वे पुरे 5 वर्षं तक रहे नहीं कार्य कर पाए, इसलिए राव का योगदान बहुत सराहनीय था.

पी॰ वी॰ नरसिम्हा राव का राजनीती से सन्यास (P V Narasimha Rao retirement) –

1996 के election में काँग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद राव ने राजनीति से सन्यास ले लिया . राजनीति से जाने के बाद राव ने साहित्य में अपना योगदान दिया. राव जी  राजनेता होने के साथ साथ एक साहित्यिक व्यक्ति भी थे, एक साथ 17 भाषा बोलने में इन्हें महारथ हासिल थी. इनकी मातृ भाषा तेलगु थी, लेकिन इनकी मराठी भाषा में भी अच्छी पकड़ थी.  इन्होने कवी की रचनाओं को तेलगु में रूपांतरित किया . पी वी राव कई उपन्यास को हिंदी में और हिंदी को अन्य भाषा में रूपांतरित किया. नरसिम्हा राव बाबरी मस्जिद एवम राम मंदिर पर भी लेख एवम किताबे लिखी, जिसमें इन्होने महत्वपूर्ण बिन्दुओं को रखा . कई बार व्यक्ति उच्च पद पर आसीन होने के कारण खुल कर अपनी बातों को कह नहीं पाते शायद इसी तरह की स्थिती इनकी भी थी. राजनीति से सन्यास के बाद  इन्होने अपनी कलम के ज़रिये कई बातो को उजागर किया . अपनी मनोदशा को शाब्दिक  रूप से व्यक्त किया . नरसिम्हा राव राजनीति को दी इनसाइडर नावेल (The Insider novel)  में कैद किया जो इनके अनुभवों और इनके विचारो को उजागर करता है .

पी॰ वी॰ नरसिम्हा राव की मृत्यु  (P V Narasimha Rao death) –

23 December 2004 को नरसिम्हा राव का निधन हो गया . राव जी का स्वास्थ्य ख़राब रहने लगा था,  इन्हें श्वास लेने में काफी तकलीफ थी, जिसके कारण कुछ दिन अस्पताल में रहने के बाद इन्होने संसार को अलविदा कह दिया . राव जी का राजनेतिक जीवन कठिन था, खासकर प्रधानमंत्री  बनने के बाद. पर इन्होने आर्थिक क्षेत्र में जो परिवर्तन किये थे, वे सराहनीय थे, जिन्हें बाद के सभी प्रधानमंत्री  ने स्वीकार किया. परमाणु परिक्षण की इच्छा इन्ही के काल से उत्पन्न हुई थी . इनके कार्यकाल के दौरान मनमोहन सिंह अर्थशास्त्री थे .

स्वतंत्र भारत के सभी प्रधान मंत्री की लिस्ट एवम उनका विवरण जानने के लिए पढ़े.

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