नर घड़ियाल की संदिग्ध मृत्यु के बाद सुस्त पड़े विभाग ने आखिरकार शुक्रवार के दिन बड़ा कदम उठाया है। सोन घड़ियाल अभ्यारण को चंबल से 24 नर घड़ियाल, एक मादा और 25 कछुओं का बहुमूल्य संकलन प्राप्त हुआ है। इस नई खेप के पहुंचने से सोन नदी क्षेत्र में फिर से जीवन का संतुलन बहाल होने की उम्मीद बढ़ी है।
अभयारण्य विभाग द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक जोगदहा क्षेत्र में 13 नर घड़ियाल छोड़े गए, जबकि भवरसेन में 12 नर घड़ियालों के छोटे बच्चों को सुरक्षित रिलीज किया गया। इसके अलावा भिंड से लाई गई 25 अलग-अलग प्रजातियों की कछुआ प्रजाति को भी आज नदी में छोड़ा गया। यह पूरी जानकारी डीएफओ राजेश कन्ना टी ने शुक्रवार को साझा की।
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उन्होंने बताया कि सोन नदी क्षेत्र में मादा घड़ियाल पहले से मौजूद थीं, लेकिन नर घड़ियालों की संख्या पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। ऐसे में प्रजनन प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी और विभाग लगातार नर घड़ियालों की मांग कर रहा था। आज चंबल से आई खेप ने इस गंभीर समस्या का समाधान कर दिया है। हालांकि, विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं। जहां वरिष्ठ अधिकारी और बीट प्रभारी अपनी ड्यूटी निभाते नज़र आते हैं, वहीं चौकीदार स्तर पर लापरवाही की शिकायतें बनी रहती हैं। कई बार यह आरोप लगाए जाते हैं कि जिम्मेदारी निभाने के बजाय वे निजी लाभ में अधिक रुचि दिखाते हैं, जिसका खामियाजा अभयारण्य के जलचर जीवों को उठाना पड़ता है।


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