अमृतसर: पीड़ित परमजीत काैर और पारिवारिक सदस्य जानकारी देते हुए।सुरजीत को अगवा करने के दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए हाईकोर्ट जाएगा परिवार1992 में गांव से उठा ले गए, 1996 में दायर की थी याचिकासीबीआई अदालत की ओर से भोरसी राजपूतां के सुरजीत को अगवा करने के दोषी ठहराए गए सेवानिवृत्त आईपीएस बलकार सिंह, सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर ऊधम सिंह और साहिब सिंह ने सुरजीत के परिवार को चार साल तक चक्करों में डाले रखा था। दोषियों के कहने पर परिवार चार साल तक सुरजीत को लापता ही समझते रहा, लेकिन फिर एक दिन सुरजीत के साथ पकड़े गए शख्स ने उन्हें बताया कि सुरजीत की मौत हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने कोर्ट में याचिका लगाई थी। इसी कारण मामले में सीबीआई कोर्ट तक पहुंचा और अब आरोपियों की सजा हुई। मगर परिवार इससे संतुष्ट नहीं है।दूसरे दिन पति की हाे गई माैतपीड़ित परमजीत काैर ने बताया कि गांव से 7 मई 1992 को उसके पति सुरजीत सिंह, परमजीत और जतिंदर को तत्कालीन डीएसपी बलकार व एसएचओ उधम व पुलिस पार्टी पकड़ कर ले गई थी। पुलिस के मुताबिक सुरजीत से पिस्तौल और कारतूस बरामद किया था। 8 मई 1992 काे उसकी माैत हाे गई। परिवार ने 1996 में याचिका दायर की थी।सुरजीत काे पुलिस ने काफी इंटेराेगेट किया, जिस वजह से उसकी माैत हुईमाल मंडी अमृतसर पुलिस पूछताछ केंद्र में सुरजीत सिंह के साथ जतिंदर सिंह भी मौजूद था। उसने मृतक की पत्नी काे बताया था कि सुरजीत सिंह काे पुलिस वालाें ने काफी इंटेराेगेट किया था जिसकी वजह से उसकी माैत हाे गई।जतिंदर सिंह ने यह भी बताया था कि जब उन्हाेंने पुलिस वालाें से पूछा की सुरजीत काे कहा लेकर जा रहे है ताे पुलिस कर्मचारियाें ने सुरजीत के बीमार हाेने का हवाला दिया और उसके बाद सुरजीत दिखाई नहीं दिया। पुलिस के मुताबिक सुरजीत पुलिस हिरासत से भाग गया था और इसे भगौड़ा करार दे दिया। गवाह जतिंदर िसंह की अब माैत हाे चुकी है।


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