चित्तौड़गढ़: अमरनाथ यात्रा पर गए यात्रियों का दल।पवित्र गुफा अमरनाथ के 2 किलोमीटर के दायरे में बादल फटने से कई लोगों की जान चली गई। वहीं, कई लोग लापता भी हो गए। इस खबर को सुनते ही सब अपने परिजन, जो वहां फंसे हुए हैं, उनके बारे में जानकारी ले रहे हैं। ऐसे में सूचना मिली कि चित्तौड़गढ़ से गए हुए 60 यात्रियों का जत्था पूरी तरह सुरक्षित है।चित्तौड़गढ़ गए हुए युवाओं में से अधिकांश युवा सैलाब आने से पहले ही नीचे आ चुके थे, लेकिन 6 युवा वहीं पर लंगर में अपनी सेवाएं दे रहे थे। सैलाब के आते ही उन्होंने अन्य फंसे लोगों की मदद में जुट गए। बड़ी बात यह थी कि उन्हें गुफा से नीचे आने का कई बार मौका मिला, लेकिन उन्होंने वहां वह कर लोगों को बाहर निकालने को प्राथमिकता दी।हेलीकॉप्टर से फंसे हुए यात्रियों को बाहर निकालते हुए।सैलाब में खो दिया सभी सामानचित्तौड़गढ़ पंचायत समिति के पूर्व प्रधान सीपी नामधारानी के छोटे भाई ओमप्रकाश नामधारानी से जब बात की तो उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम को बादल फटने से जब सैलाब आया तो वह और उनके अन्य 5 साथी लंगर में सेवाएं दे रहे थे। इसी दौरान अचानक हो हल्ला शुरू हो गया और देखते ही देखते सैलाब में सब कुछ बहने लगा। लंगर में बचे हुए खाने को लेकर ओमप्रकाश और उनके साथी सुरक्षित जगह पर जा पहुंचे। वहां से जब उन्होंने देखा तो कई लोग इस त्रासदी का शिकार हो चुके थे। ऐसे में उन लोगों ने फैसला किया कि पहले लोगों की मदद करेंगे। सभी जने वहीं रुक कर सेना के ऑपरेशन में मदद करने लगे। शनिवार सुबह सभी जने गुफा से निकले और नीचे पहुंचे। इस त्रासदी में सभी ने बैग और सामान खो दिया। ओमप्रकाश ने बताया कि अच्छा हुआ कि हमारे पास बचा हुआ खाना था, जिससे हम रात को लोगों को खाना बांट पाए। इनके साथ लगभग अन्य 50-55 जनों का एक ग्रुप भी था जो चित्तौड़ से गया हुआ था लेकिन वह शुक्रवार सुबह ही नीचे उतर गए थे।
