
Gold vs Bank FD: बीते कुछ सालों में देश की आम जनता ने निवेश के कई नए विकल्पों में हाथ आजमाया है। एक समय था, जब देश के आम निवेशक मुख्य रूप से बैंक एफडी और डाकघर की स्कीम में निवेश करते थे। लेकिन, समय के साथ-साथ अब निवेश का तरीका भी बदल गया है। देश के आम निवेशक अब सोना, चांदी, म्यूचुअल फंड्स, स्टॉक्स, बॉन्ड में भी पैसा लगा रहे हैं। यहां हम जानेंगे कि मौजूदा हालातों को देखते हुए सोना और बैंक एफडी में से निवेश का कौन-विकल्प ज्यादा सुरक्षित है और कहां आपका पैसा सबसे ज्यादा सेफ रहेगा?
सोना
सोना एक कीमती धातु है, जिसे विपरीत परिस्थितियों में सबसे सुरक्षित एसेट माना जाता है। यही वजह है कि जब दुनिया के किसी भी कोने में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो सोने की मांग में जबरदस्त उछाल आता है, जिससे इसकी कीमतें तेजी से बढ़ती हैं। सोना कभी भी फिक्स और गारंटीड रिटर्न नहीं देता है। हालांकि, लंबी अवधि में ये आपको मोटा मुनाफा दे सकता है। इसके अलावा, लंबी अवधि में सोने ने हमेशा डटकर महंगाई का सामना किया है। करेंसी की वैल्यू घटने पर सोने की वैल्यू हमेशा बढ़ती है। सोने की कीमतों में अलग-अलग मौकों पर जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, जैसा अभी चल रहा है।
बैंक एफडी
बैंक एफडी को आज भी एक बड़ा तबका सबसे सुरक्षित निवेश मानता है। बैंक एफडी में आप कम से कम 7 दिनों से लेकर अधिकतम 10 साल तक के लिए निवेश कर सकते हैं। एफडी में आपको एक तय अवधि के बाद मैच्यॉरिटी पर एक फिक्स रिटर्न मिलता है। भारत सरकार, बैंक में जमा की जाने वाली 5 लाख रुपये तक की रकम को फ्री इंश्योरेंस के तहत कवर करती है। अगर आपका बैंक खराब वित्तीय हालातों की वजह से दिवालिया हो जाता है तो आपको 5 लाख रुपये वापस मिल जाते हैं। ध्यान रखें कि आपने बैंक में बेशक 50 लाख रुपये ही क्यों न जमा किए हों, बैंक के दिवालिया होने की स्थिति में आपको अधिकतम 5 लाख रुपये ही दिए जाएंगे।


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