CM Himachal: विधानसभा में राष्ट्रगान विवाद पर सियासी घमासान, CM सुक्खू के खिलाफ BJP का विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने का ऐलान
हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और विपक्षी बीजेपी के बीच विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रगान और वंदे मातरम् को लेकर विवाद गहरा गया है। 26 अगस्त को विधानसभा सत्र के पांचवें दिन भी इस मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच तीखी बयानबाजी हुई। विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुक्खू के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की बात कही है।
CM सुक्खू के बयान पर भड़की BJP
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुक्खू ने बीजेपी विधायकों पर राष्ट्रगान का अपमान करने का आरोप लगाया है। इसी बयान को लेकर बीजेपी ने आपत्ति जताई है।
जयराम ठाकुर के मुताबिक, बीजेपी विधायक मुख्यमंत्री के बयान के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही पार्टी यह कानूनी तौर पर भी जांचेगी कि क्या मुख्यमंत्री की टिप्पणी आपराधिक मानहानि के दायरे में आती है। जरूरत पड़ने पर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का रुख करने की बात भी कही गई है।
वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ था विवाद
विवाद की शुरुआत विधानसभा सत्र से पहले हुई, जब वंदे मातरम् के गायन को लेकर सवाल उठा। इसके बाद विधानसभा परिसर में कांग्रेस और बीजेपी नेताओं के बीच इस मुद्दे पर विरोध और बयानबाजी देखने को मिली।
बीजेपी का आरोप है कि राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार का रवैया उचित नहीं है। वहीं मुख्यमंत्री सुक्खू ने बीजेपी पर विधानसभा की कार्यवाही को बाधित करने और मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है।
विधानसभा में BJP के वॉकआउट पर भी CM का हमला
इससे पहले मानसून सत्र के चौथे दिन बीजेपी विधायकों के वॉकआउट को लेकर भी मुख्यमंत्री सुक्खू ने विपक्ष पर निशाना साधा था। CM ने आरोप लगाया कि प्रश्नकाल के दौरान रोजगार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर करीब आधे घंटे तक चर्चा हुई, लेकिन इसके बाद बीजेपी विधायक सदन से बाहर चले गए।
सुक्खू ने दावा किया कि सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार थी। उन्होंने बीजेपी पर गंभीर मुद्दों के बजाय राजनीतिक विरोध करने का आरोप लगाया।
7,500 पद भरने का भी बड़ा फैसला
राजनीतिक विवाद के बीच सुक्खू सरकार ने रोजगार के मोर्चे पर भी बड़ा फैसला लिया है। हालिया कैबिनेट बैठक में राज्य के अलग-अलग विभागों में करीब 7,500 पद भरने को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी और पुलिस भर्ती से जुड़े फैसले भी लिए गए हैं।
सरकार का कहना है कि खाली पदों को भरने से सरकारी विभागों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
कैबिनेट विस्तार की भी चर्चा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस महीने की शुरुआत में संकेत दिया था कि हिमाचल प्रदेश में कैबिनेट विस्तार जल्द हो सकता है। उन्होंने कहा था कि इस संबंध में कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी का इंतजार है।
ऐसे में विधानसभा का मौजूदा मानसून सत्र सरकार और कांग्रेस संगठन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बारिश और सड़कें भी बड़ी चुनौती
हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण सड़क और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक बारिश के कारण राज्य में 166 सड़कें बंद हुई थीं और कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई।
पहाड़ी राज्य होने के कारण बारिश के दौरान भूस्खलन, सड़क बंद होने और बिजली बाधित होने की समस्या सरकार के लिए लगातार चुनौती बनी रहती है।
पर्यटन और होटल सेक्टर में निवेश पर जोर
मुख्यमंत्री सुक्खू ने राज्य में पर्यटन और होटल उद्योग में निवेश बढ़ाने की अपील भी की है। वाराणसी में आयोजित FHRAI के कार्यक्रम में उन्होंने निवेशकों को हिमाचल के होटल सेक्टर में निवेश के लिए आमंत्रित किया।
CM ने कहा कि राज्य में पर्यटन कनेक्टिविटी सुधारने के लिए एयरपोर्ट और हेलीपोर्ट सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।
अभी सबसे बड़ा मुद्दा क्या?
फिलहाल हिमाचल की राजनीति में राष्ट्रगान और वंदे मातरम् विवाद सबसे ज्यादा चर्चा में है। BJP ने मुख्यमंत्री सुक्खू के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने और जरूरत पड़ने पर हाई कोर्ट जाने का संकेत दिया है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री विपक्ष के विरोध को विधानसभा की कार्यवाही बाधित करने की कोशिश बता रहे हैं।
वहीं रोजगार के लिए 7,500 पद भरने का फैसला, संभावित कैबिनेट विस्तार और बारिश से प्रभावित बुनियादी ढांचा भी सरकार के एजेंडे में अहम बना हुआ है।
रिपोर्टर; तेजिंदर सिंह, मुख्य संवाददता उत्तराखण्ड

