CM सुक्खू का बड़ा फैसला: अगले सत्र से स्कूल एडमिशन फॉर्म में नहीं होगा जाति का कॉलम
शिमला, 26 अगस्त 2026। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य के स्कूलों में अगले शैक्षणिक सत्र से एडमिशन फॉर्म में जाति का कॉलम हटा दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य बच्चों के बीच जाति आधारित भेदभाव को कम करना और उनमें समानता एवं भाईचारे की भावना को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद हिमाचल की शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक समानता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सरकार इसे बच्चों के बीच सामाजिक दूरी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देख रही है।
एडमिशन फॉर्म से हटेगा जाति का कॉलम
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के अनुसार, अगले शैक्षणिक सत्र से हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में दाखिले के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म में विद्यार्थियों की जाति से संबंधित कॉलम नहीं रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि स्कूल बच्चों के व्यक्तित्व और शिक्षा के विकास की जगह हैं, जहां उन्हें जाति के आधार पर अलग पहचान देने के बजाय समान अवसर मिलना चाहिए।
इस फैसले का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच किसी भी तरह की सामाजिक या जातिगत हीनभावना को कम करना बताया गया है। सरकार चाहती है कि स्कूलों में बच्चों को समानता, भाईचारे और सामाजिक समरसता का माहौल मिले।
बच्चों में समानता की भावना बढ़ाने पर जोर
CM सुक्खू ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बताया है। सरकार के अनुसार, बचपन से ही बच्चों को समानता का वातावरण मिलने से उनके भीतर भेदभाव की भावना को कम किया जा सकता है।
जाति का कॉलम हटाने के फैसले को इसी सोच से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, सरकारी योजनाओं और आरक्षण जैसी व्यवस्थाओं के लिए आवश्यक आधिकारिक रिकॉर्ड अलग प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत उपलब्ध रह सकते हैं। स्कूल के सामान्य एडमिशन फॉर्म में जाति संबंधी जानकारी नहीं मांगे जाने का प्रस्ताव विद्यार्थियों के दैनिक शैक्षणिक माहौल पर केंद्रित है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में 600 स्टाफ नर्सों की भर्ती
इसी बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर भी सरकार की तैयारियों की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में 600 स्टाफ नर्सों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है।
सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में कर्मचारियों की कमी को दूर करने और अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में आउटसोर्सिंग व्यवस्था को कम करने की दिशा में सरकार काम कर रही है।
स्टाफ नर्सों की भर्ती को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की मानव संसाधन क्षमता मजबूत करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। इससे अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री राहत कोष में मिला ₹1 करोड़
हिमाचल प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन की ओर से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को ₹1 करोड़ का चेक मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए सौंपा गया। मुख्यमंत्री ने इस योगदान के लिए संस्था का आभार जताया।
मुख्यमंत्री राहत कोष का इस्तेमाल आपदा, आर्थिक संकट और अन्य कठिन परिस्थितियों से प्रभावित जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए किया जाता है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और पुनर्वास के लिए ऐसे फंड की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
लॉटरी टेंडर को लेकर BJP का हमला
दूसरी ओर, हिमाचल प्रदेश में लॉटरी को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। BJP सांसद अनुराग ठाकुर ने राज्य सरकार द्वारा लॉटरी दोबारा शुरू करने से संबंधित टेंडर पर सवाल उठाए हैं।
अनुराग ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से इस टेंडर को वापस लेने की मांग की है। BJP की ओर से इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा जा रहा है।
वहीं, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अपनी नीति और प्रक्रिया के अनुसार जवाब दिया जा रहा है। लॉटरी टेंडर को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
राष्ट्रगान विवाद पर भी सियासत गर्म
हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रगान से जुड़े विवाद को लेकर भी BJP ने मुख्यमंत्री सुक्खू पर हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस मामले को गंभीर बताते हुए विधानसभा में विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की बात कही है।
BJP की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि जरूरत पड़ने पर इस मामले को हाईकोर्ट तक ले जाया जा सकता है। इससे विधानसभा के भीतर और बाहर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।
सरकार के सामने कई मोर्चे
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार इस समय शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन से जुड़े कई मुद्दों पर काम कर रही है। स्कूल एडमिशन फॉर्म से जाति का कॉलम हटाने का फैसला सामाजिक समानता से जुड़ा कदम बताया जा रहा है, जबकि 600 स्टाफ नर्सों की भर्ती स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश है।
दूसरी ओर लॉटरी टेंडर और राष्ट्रगान विवाद जैसे मुद्दों पर सरकार को विपक्ष के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री के लिए विकास योजनाओं के साथ-साथ राजनीतिक विवादों को संभालना भी महत्वपूर्ण चुनौती है।
शिक्षा नीति को लेकर सरकार का संदेश
जाति का कॉलम हटाने का फैसला हिमाचल सरकार के शिक्षा और सामाजिक समरसता से जुड़े दृष्टिकोण को सामने रखता है। सरकार का संदेश है कि स्कूलों में विद्यार्थियों को उनकी जातिगत पहचान के बजाय उनकी शिक्षा, प्रतिभा और क्षमताओं के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
हालांकि, इस फैसले को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग को एडमिशन प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों में आवश्यक बदलाव करने होंगे। अगले शैक्षणिक सत्र से नई व्यवस्था लागू होने की स्थिति में स्कूलों को भी उसी के अनुरूप निर्देश जारी किए जाएंगे।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश में CM सुखविंदर सिंह सुक्खू से जुड़ी खबरों में स्कूल एडमिशन फॉर्म से जाति का कॉलम हटाने का फैसला सबसे ज्यादा चर्चा में है। सरकार इसे बच्चों में समानता और भाईचारे की भावना बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है।
इसके अलावा 600 स्टाफ नर्सों की भर्ती, मुख्यमंत्री राहत कोष में ₹1 करोड़ का योगदान, लॉटरी टेंडर को लेकर BJP का विरोध और राष्ट्रगान विवाद ने भी राज्य की राजनीति को गर्म कर रखा है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और चर्चा बढ़ने की संभावना है।
रिपोर्टर; जैस्मिन कौर, मुख्य संवाददता दिल्ली

