JPNIC विवाद पर CM योगी का अखिलेश यादव पर बड़ा हमला, 200 करोड़ से 864 करोड़ तक पहुंची लागत पर उठाए सवाल
लखनऊ, 29 अगस्त 2026। जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर घमासान तेज हो गया है। JPNIC विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी नेताओं ने परियोजना की बढ़ती लागत, अधूरे निर्माण और इसके संचालन के लिए बनाई गई व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी बीजेपी सरकार पर पलटवार करते हुए भ्रष्टाचार को लेकर निशाना साधा है।
200 करोड़ से बढ़कर 864 करोड़ रुपये तक पहुंची परियोजना की लागत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने JPNIC परियोजना की लागत को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी शुरुआती लागत करीब 200 करोड़ रुपये थी, लेकिन बाद में यह बढ़कर करीब 864 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके बावजूद परियोजना का काम पूरा नहीं हो सका। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इसे पूरी तरह कार्यात्मक बनाने के लिए अभी भी बड़ी राशि खर्च करनी पड़ सकती है।
सीएम योगी ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान सरकारी संपत्ति के संचालन को लेकर ऐसी व्यवस्था तैयार की गई थी, जिससे इसका फायदा परिवार और करीबी लोगों को मिल सके। उन्होंने दावा किया कि होटल, जिम और क्लब जैसी सुविधाओं के संचालन को एक निजी व्यवस्था के माध्यम से चलाने की योजना बनाई गई थी।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि राज्य में बीजेपी की सरकार बनने के बाद JPNIC को लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को वापस सौंपा गया।
‘आजतक’ के खुलासे में सोसायटी का जिक्र
JPNIC को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के शासनकाल में एक विशेष सोसायटी बनाई गई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि सोसायटी के नियम इस तरह तैयार किए गए थे कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद इसका नियंत्रण यादव परिवार और उनके करीबी लोगों के पास बना रह सके।
रिपोर्ट में सोसायटी से जुड़े प्रमुख नामों में अखिलेश यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव, राजेंद्र चौधरी, गजेंद्र सिंह, अंजू नारायण, वसीम/वासिफ हसन और अनुपमा प्रकाश का उल्लेख किया गया है।
ब्रजेश पाठक ने लगाए गंभीर आरोप
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने JPNIC मामले को लेकर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि परियोजना की शुरुआत समाजवादी पार्टी की 2003 से 2007 वाली सरकार के दौरान हुई थी और 2013 में इसके लिए करीब 200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।
ब्रजेश पाठक के मुताबिक, परियोजना की लागत बढ़कर करीब 850 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि उस समय तक केवल लगभग 60 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका था। उन्होंने सवाल उठाया कि लगातार बढ़ती लागत के बावजूद परियोजना पूरी क्यों नहीं हो सकी और इसके लिए जिम्मेदार ठेकेदारों तथा व्यवस्था की जांच क्यों नहीं हुई।
डिप्टी सीएम ने आरोप लगाया कि परियोजना का स्वामित्व सरकार के पास होने के बावजूद इसके संचालन के लिए एक निजी संचालन समिति बनाई गई थी। उन्होंने इस व्यवस्था में अखिलेश यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और वासिफ हसन के नाम होने का दावा किया।
पाठक ने कहा कि सरकारी संपत्ति के संचालन को लेकर बनाई गई ऐसी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने बीजेपी सरकार की नीति का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।
JPNIC को चालू करने में फिर खर्च होंगे करोड़ों रुपये
ब्रजेश पाठक ने कहा कि JPNIC को पूरी तरह कार्यात्मक बनाने के लिए अभी भी करीब 200 से 250 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने JPNIC को बेचा नहीं है, बल्कि इसके संचालन के लिए लीज पर दिया है और इसका मालिकाना हक राज्य सरकार के पास ही रहेगा।
उन्होंने कहा कि JPNIC में मौजूद कन्वेंशन सेंटर, ऑडिटोरियम और स्पोर्ट्स सुविधाओं को संचालित किया जाएगा। इसके अलावा यहां म्यूजियम भी विकसित किया जाएगा और इस पूरी संपत्ति पर लखनऊ विकास प्राधिकरण का अधिकार रहेगा।
ब्रजेश पाठक ने दावा किया कि संचालन के लिए लीज की प्रक्रिया खुली प्रतियोगिता और टेंडर के जरिए पूरी की गई है। उन्होंने विपक्ष की ओर से JPNIC को बेचने के आरोपों को भ्रम फैलाने वाला बताया।
अखिलेश यादव ने भी किया पलटवार
बीजेपी के आरोपों पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए जवाब दिया। उन्होंने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार में भ्रष्टाचार का ‘स्वर्ण ठोसीकरण’ हो रहा है। उन्होंने JPNIC को लेकर सरकार के मॉडल पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका सच भी एक दिन जनता के सामने आएगा। उन्होंने राम मंदिर में चोरी के मामले का उदाहरण देते हुए सरकार पर हमला बोला।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि धर्म के नाम पर किया जा रहा ढोंग एक दिन जनता के सामने बेनकाब होगा और कथित ‘स्वर्ण सिल्लियां’ सामने आएंगी।
JPNIC पर आमने-सामने BJP और सपा
JPNIC विवाद अब केवल एक निर्माण परियोजना का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की सियासत में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच एक नया राजनीतिक टकराव बनता दिख रहा है।
एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक परियोजना की बढ़ी हुई लागत, अधूरे निर्माण और संचालन व्यवस्था को लेकर तत्कालीन सपा सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी तरफ अखिलेश यादव बीजेपी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर पलटवार कर रहे हैं।
फिलहाल सरकार की ओर से JPNIC को जनता के उपयोग के लिए पूरी तरह कार्यात्मक बनाने की बात कही गई है। वहीं, विपक्ष इस पूरी प्रक्रिया और लीज व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में JPNIC को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
रिपोर्टर; दीप सिंह मुख्य, संवाददता लखनऊ

