नेपाल बाढ़: राहत-बचाव अभियान जारी, भारत की मदद पर पूर्व विदेश मंत्री ने PM मोदी को कहा धन्यवाद
काठमांडू, 29 अगस्त 2026। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। पहाड़ों से आई तबाही ने रसुवा समेत कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। बाढ़ और अचानक आए तेज पानी के कारण कई क्षेत्र प्रभावित हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम किया जा रहा है।
नेपाल की सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवान प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं। मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हेलीकॉप्टरों की मदद से प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास जारी है।
हेलीकॉप्टर से विदेशी नागरिकों का रेस्क्यू
नेपाली सेना के मुताबिक, टिमुरे, स्याफ्रुवेशी, धुन्चे और मैलुंग जैसे प्रभावित इलाकों से हेलीकॉप्टरों के जरिए विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है। रेस्क्यू किए गए लोगों में 113 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए गए हैं।
बाढ़ के कारण कई इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। ऐसे में हेलीकॉप्टर राहत और बचाव अभियान का महत्वपूर्ण माध्यम बने हुए हैं। सेना की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटी हैं।
भारत की मदद के लिए धन्यवाद
नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री नारायण प्रकाश साउद ने राहत और बचाव अभियान में भारत की भूमिका की सराहना की है। आजतक को दिए इंटरव्यू में उन्होंने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सहायता और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
साउद ने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत की ओर से दिखाई गई संवेदनशीलता महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत की ओर से नेपाल के हालात पर दिखाई गई चिंता और मदद की सराहना की।
उन्होंने विशेष रूप से भारतीय मीडिया के कवरेज का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, भारतीय मीडिया ने इस बार संकट की गंभीरता को समझते हुए नेपाल में बने हालात को संवेदनशील तरीके से सामने रखा।
भारतीय मीडिया की भी तारीफ
नारायण प्रकाश साउद ने कहा कि नेपाल में आई आपदा के दौरान भारतीय मीडिया ने स्थिति की गंभीरता को समझने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि संकट के समय पड़ोसी देश की ओर से दिखाई गई संवेदनशीलता और सहयोग काफी मायने रखता है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया के रवैये पर भी चर्चा की और कहा कि आपदा के दौरान प्रभावित लोगों की स्थिति को सामने लाना बेहद जरूरी है।
नेपाल सेना, पुलिस और सशस्त्र बल जुटे
नेपाल में राहत और बचाव अभियान में नेपाली सेना के हजारों जवानों के साथ नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवान भी जुटे हुए हैं।
प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने, जरूरी सामान पहुंचाने और स्थिति का आकलन करने के लिए अलग-अलग टीमें काम कर रही हैं। पहाड़ी इलाकों में भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण होने के कारण बचाव अभियान में काफी मुश्किलें सामने आ रही हैं।
कई जगहों पर बाढ़ और भूस्खलन के कारण सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ है। ऐसे में प्रशासन और सुरक्षा बल वैकल्पिक रास्तों और हवाई सेवाओं की मदद से राहत पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
बाढ़ के बाद नई चुनौती का खतरा
बाढ़ के बाद नेपाल के कुछ इलाकों में दूसरी प्राकृतिक आपदा का खतरा भी बना हुआ है। प्रभावित क्षेत्रों में झील और जलस्रोतों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन की ओर से जलस्तर और संभावित पानी के बहाव को लेकर निगरानी की जा रही है।
अगर किसी जलस्रोत या झील का बांध या प्राकृतिक अवरोध टूटता है, तो नीचे के इलाकों में पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है। इसी वजह से संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है।
भारत-नेपाल सहयोग की चर्चा
नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा के बीच भारत और नेपाल के बीच सहयोग भी चर्चा में है। दोनों देशों के बीच भौगोलिक और सामाजिक संबंध बेहद मजबूत हैं और सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों का लगातार आवागमन होता है।
ऐसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान एक-दूसरे की मदद दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है। नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री की ओर से भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया जाना भी इसी सहयोग को रेखांकित करता है।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। सुरक्षा बल प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में मौसम और जलस्तर की स्थिति पर अभियान की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।
नोट: आपदा से जुड़े आंकड़े और रेस्क्यू की संख्या समय के साथ बदल सकती है। स्थानीय प्रशासन और नेपाली सुरक्षा एजेंसियों की ताजा जानकारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
रिपोर्टर; जसलीन कौर, मुख्य प्रबंधक

