CM उमर अब्दुल्ला सरकार पर बिजली दर बढ़ोतरी को लेकर घमासान, 6.83% टैरिफ हाइक पर विपक्ष ने घेरा
श्रीनगर, 29 अगस्त 2026। जम्मू-कश्मीर में बिजली की दरों में बढ़ोतरी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। ज्वाइंट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (JERC) की ओर से बिजली टैरिफ में औसतन 6.83 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दिए जाने के बाद विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार पर निशाना साधा है। संशोधित बिजली दरें 1 सितंबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक लागू रहेंगी, जब तक आयोग की ओर से इनमें कोई बदलाव या विस्तार नहीं किया जाता।
CM उमर अब्दुल्ला ने बढ़ोतरी को बताया मजबूरी
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बिजली दरों में बढ़ोतरी का बचाव करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने बिजली की कीमतें बढ़ाने का फैसला खुशी से नहीं लिया है। उन्होंने इसे बिजली क्षेत्र में बढ़ते नुकसान और आर्थिक दबाव के कारण उठाया गया जरूरी कदम बताया।
CM उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार ने कभी यह वादा नहीं किया था कि बिजली की दरें हमेशा स्थिर रहेंगी। उनके मुताबिक, मौजूदा बढ़ोतरी सीमित रखी गई है और सरकार ने जितना संभव था, उतना कम टैरिफ बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में बिजली दरों में इससे कहीं अधिक बढ़ोतरी हुई थी। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि पहले बिजली दरों में करीब 14-15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि उनकी सरकार ने चार साल बाद लगभग 6.83 प्रतिशत की वृद्धि की है।
200 यूनिट मुफ्त बिजली के वादे पर CM ने दिया जवाब
बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर सबसे बड़ा सवाल नेशनल कॉन्फ्रेंस के चुनावी वादे 200 यूनिट मुफ्त बिजली को लेकर उठ रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने चुनाव के दौरान लोगों को मुफ्त बिजली का भरोसा दिया था, लेकिन अब बिजली महंगी की जा रही है।
CM उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि बिजली टैरिफ में बढ़ोतरी और 200 यूनिट मुफ्त बिजली की योजना अलग-अलग मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि पात्र गरीब उपभोक्ताओं को 200 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की योजना को सोलर स्कीम के माध्यम से लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार मुफ्त बिजली देने के अपने वादे से पीछे नहीं हट रही है। उनका कहना है कि टैरिफ संशोधन का इस योजना से कोई सीधा संबंध नहीं है।
1 सितंबर से बढ़ जाएंगे बिजली के बिल
JERC द्वारा मंजूर संशोधित टैरिफ के बाद जम्मू-कश्मीर के बिजली उपभोक्ताओं को 1 सितंबर से अधिक भुगतान करना होगा। मीटर्ड घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 200 यूनिट तक की खपत पर दर ₹2.30 से बढ़कर ₹2.45 प्रति यूनिट हो जाएगी।
इसी तरह 201 से 400 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए दर ₹4 से बढ़कर ₹4.20 प्रति यूनिट और 400 यूनिट से अधिक खपत पर दर ₹4.35 से बढ़कर ₹4.60 प्रति यूनिट हो जाएगी।
इस बढ़ोतरी का असर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ बिजली का व्यावसायिक इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं पर भी पड़ने की संभावना है।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
बिजली टैरिफ बढ़ोतरी को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी ने उमर अब्दुल्ला सरकार पर आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया है।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले 200 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा किया था, लेकिन अब इसके उलट बिजली दरों में बढ़ोतरी की जा रही है। बीजेपी ने इसे आम उपभोक्ताओं के लिए नुकसानदेह फैसला बताया है।
पीडीपी और अपनी पार्टी की ओर से भी बिजली दर बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए गए। श्रीनगर में प्रदर्शनकारियों ने बिजली की बढ़ी हुई दरों को वापस लेने की मांग की।
बिजली संकट के बीच बढ़ोतरी पर सवाल
जम्मू-कश्मीर में बिजली की दरों में बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब प्रदेश के कुछ हिस्सों में बिजली आपूर्ति को लेकर भी चुनौतियां सामने आई हैं। हाल ही में कुछ जलविद्युत परियोजनाओं में सिल्ट फ्लशिंग और डीसिल्टिंग से जुड़े काम के कारण बिजली उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं।
ऐसे में बिजली की कीमत बढ़ने से आम उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ी है। खासकर आने वाली सर्दियों को देखते हुए बिजली की खपत बढ़ने की संभावना रहती है।
सरकार ने नुकसान कम करने का दिया भरोसा
CM उमर अब्दुल्ला ने कहा कि बिजली क्षेत्र में होने वाले नुकसान को कम करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने संकेत दिया कि जैसे-जैसे बिजली क्षेत्र में नुकसान कम होगा, भविष्य में इस तरह के कठोर फैसलों की जरूरत भी कम हो सकती है।
सरकार का तर्क है कि बिजली व्यवस्था को आर्थिक रूप से मजबूत करने और आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए टैरिफ में सीमित संशोधन जरूरी था।
सियासी मुद्दा बना बिजली टैरिफ
जम्मू-कश्मीर में बिजली दरों की बढ़ोतरी अब सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन चुकी है। विपक्षी दल इसे सरकार के चुनावी वादों से जोड़ रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इसे बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार के सामने अब चुनौती यह है कि वह एक तरफ बिजली क्षेत्र के आर्थिक नुकसान को कम करे और दूसरी तरफ आम उपभोक्ताओं पर बढ़ते आर्थिक बोझ को भी नियंत्रित रखे।
आगे क्या होगा?
नई बिजली दरें 1 सितंबर से लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को वास्तविक बिलों में इसका असर दिखाई देगा। इसके साथ ही 200 यूनिट मुफ्त बिजली के वादे को सोलर योजना के माध्यम से लागू करने को लेकर भी लोगों की नजर सरकार पर रहेगी।
आने वाले महीनों में बिजली की कीमत, मुफ्त बिजली योजना और बिजली क्षेत्र के घाटे को लेकर जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बहस और तेज होने की संभावना है।
निष्कर्ष
जम्मू-कश्मीर में 6.83 प्रतिशत बिजली टैरिफ बढ़ोतरी ने उमर अब्दुल्ला सरकार को विपक्ष के निशाने पर ला दिया है। सरकार इसे मजबूरी और सीमित बढ़ोतरी बता रही है, जबकि विपक्ष इसे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ और चुनावी वादों से पीछे हटना बता रहा है। अब 1 सितंबर से नई दरें लागू होने के बाद इसका वास्तविक आर्थिक असर सामने आएगा।
रिपोर्टर; जैस्मिन कौर, मुख्य संवाददता दिल्ली

