CM Devendra Fadnavis का बड़ा फैसला, खुले खाद्य तेल पर कार्रवाई 1 साल के लिए टली
मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री CM Devendra Fadnavis ने खुले और बिना पैकिंग वाले खाद्य तेल की बिक्री को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने खुले खाद्य तेल की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई को फिलहाल एक साल के लिए रोक दिया है। इस फैसले से उन छोटे कारोबारियों और पारंपरिक तेल विक्रेताओं को राहत मिली है, जो लंबे समय से खुले तेल की बिक्री करते आ रहे हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि एक साल की अवधि खत्म होने के बाद नियमों का पालन अनिवार्य होगा और इसके बाद कोई अतिरिक्त मोहलत नहीं दी जाएगी।
व्यापारियों को मिला एक साल का ट्रांजिशन पीरियड
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह फैसला खुले खाद्य तेल के कारोबार से जुड़े व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद लिया। बैठक में कारोबारियों ने सरकार के सामने अपनी परेशानियां रखीं और तत्काल कार्रवाई से छोटे दुकानदारों तथा पारंपरिक कारोबार पर पड़ने वाले असर की जानकारी दी।
सरकार ने इसके बाद कारोबारियों को एक साल का ट्रांजिशन पीरियड देने का निर्णय लिया है। इस दौरान कारोबारी अपने कारोबार को खाद्य सुरक्षा से जुड़े मौजूदा नियमों के अनुरूप ढाल सकेंगे। सरकार का कहना है कि कानून और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है, लेकिन कारोबारियों को अचानक पुरानी व्यवस्था बदलने के बजाय तैयारी के लिए उचित समय भी मिलना चाहिए।
एक साल बाद नियमों का पालन जरूरी
CM Devendra Fadnavis ने स्पष्ट किया है कि यह राहत स्थायी नहीं है। एक साल की अवधि पूरी होने के बाद खुले खाद्य तेल की बिक्री को लेकर मौजूदा कानूनी और खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि एक साल के बाद इस अवधि को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। यानी कारोबारियों को मिली यह मोहलत अपने कारोबार में जरूरी बदलाव करने और पैकेजिंग तथा सुरक्षा मानकों को अपनाने के लिए है।
FDA ने क्यों की थी कार्रवाई?
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी FDA ने खुले और बिना सील वाले खाद्य तेल की बिक्री को लेकर सख्ती शुरू की थी। विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य खाद्य तेल में मिलावट और गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं को रोकना था।
FDA की ओर से खुले तेल की बिक्री को लेकर यह चिंता जताई गई थी कि बिना उचित पैकेजिंग के तेल में मिलावट की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा ऐसे तेल पर स्रोत, बैच नंबर, पैकेजिंग और एक्सपायरी जैसी जरूरी जानकारियां उपलब्ध नहीं होतीं, जिससे उत्पाद की ट्रेसबिलिटी मुश्किल हो जाती है।
FDA की कार्रवाई के दौरान कुछ मामलों में मिलावट, गैर-खाद्य ग्रेड कंटेनर के इस्तेमाल और लेबलिंग से जुड़े उल्लंघनों की बात भी सामने आई थी। इसी वजह से विभाग ने खाद्य तेल की बिक्री को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया।
छोटे कारोबारियों को क्यों मिली राहत?
महाराष्ट्र में खुले खाद्य तेल की बिक्री लंबे समय से पारंपरिक खुदरा कारोबार का हिस्सा रही है। खासकर ग्रामीण और कम आय वाले परिवारों में जरूरत के मुताबिक कम मात्रा में तेल खरीदने की व्यवस्था आम है।
सरकार के मुताबिक, अचानक खुले तेल की बिक्री बंद होने से छोटे कारोबारियों की आजीविका और उन ग्राहकों पर असर पड़ सकता था, जो अपनी जरूरत के हिसाब से कम मात्रा में तेल खरीदते हैं। इसलिए सरकार ने खाद्य सुरक्षा और कारोबारियों की व्यावहारिक परेशानियों के बीच संतुलन बनाने के लिए एक साल का समय देने का फैसला किया है।
दो समितियां करेंगी समस्याओं का अध्ययन
सरकार ने इस बदलाव को लागू करने के लिए समितियां बनाने का भी फैसला किया है। एक समिति पारंपरिक तेल कारोबारियों की समस्याओं और उन्हें नियमों के अनुरूप कारोबार करने में आने वाली दिक्कतों का अध्ययन करेगी।
दूसरी समिति तेल विक्रेताओं, निर्माताओं और री-पैकेजिंग से जुड़े कारोबारियों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को लेकर सुझाव देगी। इन समितियों का उद्देश्य कारोबारियों के लिए एक ऐसा रोडमैप तैयार करना है, जिससे वे धीरे-धीरे मौजूदा खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुरूप अपने कारोबार को बदल सकें।
सरकार दे सकती है सहायता
सरकार कारोबारियों को नियमों के अनुरूप ढालने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे, गुणवत्ता जांच और पैकेजिंग सुविधाओं को लेकर सहायता देने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। जरूरत पड़ने पर वित्तीय सहायता, अनुदान या सब्सिडी जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।
इसका उद्देश्य यह है कि छोटे और पारंपरिक कारोबारी नए नियमों को अपनाने में सक्षम हों और खाद्य सुरक्षा मानकों को लागू करने के साथ उनकी आजीविका पर अचानक असर न पड़े।
खाद्य सुरक्षा पर सरकार का जोर
CM Devendra Fadnavis ने साफ किया है कि सरकार खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों से पीछे नहीं हट रही है। एक साल की राहत का उद्देश्य केवल कारोबारियों को बदलाव के लिए समय देना है।
सरकार का लक्ष्य है कि तय समय सीमा के भीतर खुले खाद्य तेल के कारोबार से जुड़े लोग आवश्यक पैकेजिंग, लेबलिंग और गुणवत्ता मानकों को अपना लें। इसके बाद कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला एक तरफ छोटे व्यापारियों को तत्काल राहत देता है, वहीं दूसरी तरफ खाद्य सुरक्षा नियमों को लागू करने के लिए एक समयबद्ध बदलाव की प्रक्रिया भी शुरू करता है। अब आने वाले एक साल में समितियों की सिफारिशों और सरकार की ओर से दी जाने वाली संभावित सहायता के आधार पर कारोबारियों को अपनी व्यवस्था बदलनी होगी।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा

