Prayagraj Flood: बाढ़ के बीच भी जलती रही अखंड ज्योति, नाव से पहुंचकर सेवा कर रहे मचान वाले बाबा
उत्तर प्रदेश का प्रयागराज इस समय बाढ़ की चुनौती से जूझ रहा है। गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर ने संगम क्षेत्र के बड़े हिस्से को प्रभावित किया है। घाटों, रास्तों और मेला क्षेत्र में पानी पहुंचने से सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। प्रशासन भी दोनों नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है। हालात के बीच झूंसी के पास एक ऊंचे मचान पर जल रही अखंड ज्योति श्रद्धालुओं के बीच आस्था और विश्वास का केंद्र बनी हुई है।
तेज बारिश, पानी और मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद इस अखंड ज्योति के जलते रहने की तस्वीर लोगों का ध्यान खींच रही है। श्रद्धालु इसे आस्था और निरंतर साधना का प्रतीक मान रहे हैं। खास बात यह है कि जिस जगह यह ज्योति स्थापित है, वहां तक सामान्य रास्ते से पहुंचना मुश्किल हो गया है। ऐसे में नाव के जरिए वहां पहुंचकर इसकी सेवा जारी रखी जा रही है।
करीब 20 साल से जल रही है अखंड ज्योति
झूंसी पुल के नीचे स्थित इस स्थान का संबंध संत देवरहा बाबा की परंपरा से बताया जाता है। यहां देवरहा बाबा के शिष्य महंत रामदास महाराज की देखरेख में अखंड ज्योति लंबे समय से प्रज्ज्वलित है।
जनवरी 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी इस स्थान की अखंड ज्योति के करीब दो दशकों से लगातार जलने का उल्लेख किया गया था। माघ मेले के दौरान यह स्थान श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहता है।
संगम क्षेत्र में हर साल माघ मेला और दूसरे बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं। मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। जहां अधिकांश पंडाल अस्थायी होते हैं और मेला समाप्त होने के बाद हटा दिए जाते हैं, वहीं देवरहा बाबा की परंपरा से जुड़ा यह पंडाल स्थायी रूप से मौजूद रहता है।
ऊंचे मचान पर स्थापित है ज्योति
इस अखंड ज्योति की सबसे खास बात इसकी ऊंचाई और संरचना है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 10 फीट ऊंचे चबूतरे पर बनी झोपड़ीनुमा संरचना के ऊपर एक ऊंचा लोहे का खंभा लगाया गया है। इसके ऊपरी हिस्से में शीशे से सुरक्षित मंच बनाया गया है, जहां अखंड ज्योति रखी गई है।
यही ऊंचाई बाढ़ के दौरान ज्योति को पानी से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आसपास की जमीन और मचान के निचले हिस्से में पानी पहुंचने के बावजूद ज्योति ऊंचाई पर सुरक्षित बनी हुई है।
इससे पहले भी बाढ़ के दौरान नाव के जरिए इस स्थान तक पहुंचकर ज्योति की सेवा किए जाने का उल्लेख मिलता रहा है। 2026 की बाढ़ में भी यही परंपरा जारी है।
नाव से पहुंचते हैं ‘मचान वाले बाबा’
अखंड ज्योति की सेवा पिछले करीब दो दशकों से महंत रामदास महाराज द्वारा किए जाने की बात सामने आई है। उन्हें श्रद्धालु ‘मचान वाले बाबा’ के नाम से भी जानते हैं। वे संत देवरहा बाबा के शिष्य बताए जाते हैं।
बाढ़ की वजह से जब आसपास का इलाका पानी में घिर जाता है, तब इस स्थान तक पहुंचने का प्रमुख साधन नाव बन जाती है। रामदास महाराज और उनसे जुड़े लोग नाव के जरिए मचान तक पहुंचते हैं और अखंड ज्योति की सेवा करते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक स्थान नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही परंपरा और साधना से जुड़ा केंद्र है।
बाढ़ के बीच आस्था का केंद्र
प्रयागराज में बाढ़ की स्थिति के बीच यह अखंड ज्योति श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बन गई है। पानी से घिरे इलाके में ऊंचाई पर लगातार जलती लौ लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।
अखंड ज्योति को हिंदू धार्मिक परंपरा में निरंतर भक्ति, संकल्प और शुभकामना का प्रतीक माना जाता है। इस स्थान से जुड़े लोगों के अनुसार ज्योति को सुख-समृद्धि, कल्याण और मानवता के लिए जलाया जाता है।
हालांकि, ज्योति के लगातार जलने को लेकर अलग-अलग लोगों की अपनी धार्मिक मान्यताएं हैं। इसे वैज्ञानिक रूप से किसी चमत्कार के रूप में प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। श्रद्धालु इसे अपनी आस्था और विश्वास से जोड़कर देखते हैं।
देवरहा बाबा की परंपरा से जुड़ा है पंडाल
देवरहा बाबा भारतीय संत परंपरा के चर्चित संतों में रहे हैं। उनका जीवन और साधना लंबे समय तक लोगों के बीच चर्चा का विषय रहे। वे ऊंचे मचान पर बैठने और वहीं से श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देने के लिए प्रसिद्ध थे।
प्रयागराज के संगम क्षेत्र में उनके नाम से जुड़ा यह पंडाल आज भी उनकी परंपरा की याद दिलाता है। यहां देवरहा बाबा की स्मृति से जुड़ी कुटिया और धार्मिक स्थल मौजूद हैं। माघ मेले के दौरान यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है।
इस स्थान की खासियत केवल अखंड ज्योति ही नहीं है। यहां आने वाले श्रद्धालु पूजा-पाठ करते हैं, भजन-कीर्तन में शामिल होते हैं और कुछ समय आध्यात्मिक वातावरण में बिताते हैं।
हर साल बाढ़ के बीच जारी रहती है सेवा
संगम क्षेत्र में गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने पर कई इलाकों में पानी पहुंच जाता है। इस साल भी दोनों नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण प्रशासन अलर्ट पर है। अधिकारियों ने बाढ़ राहत चौकियों को सक्रिय किया है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
इसी बीच ऊंचे मचान पर जलती अखंड ज्योति की तस्वीरें और इसकी कहानी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। बाढ़ का पानी नीचे तक पहुंचने के बावजूद ऊंचाई पर सुरक्षित ज्योति श्रद्धालुओं के लिए उम्मीद और विश्वास की तस्वीर पेश कर रही है।
माघ मेले में बनता है आकर्षण का केंद्र
माघ मेला और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान इस पंडाल में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। अखंड ज्योति को देखने के साथ लोग यहां पूजा और दर्शन करते हैं।
जनवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार यह पंडाल सालभर मौजूद रहता है और मेला समाप्त होने के बाद भी इसकी धार्मिक गतिविधियां जारी रहती हैं। अखंड ज्योति को करीब 20 वर्षों से लगातार जलाए जाने की परंपरा इस स्थान को अलग पहचान देती है।
बाढ़ के दौरान जब संगम क्षेत्र का बड़ा हिस्सा पानी से घिर जाता है, तब भी ज्योति की सेवा बंद नहीं होती। नाव के जरिए मचान तक पहुंचना इसी निरंतर परंपरा का हिस्सा है।
बाढ़ के बीच संदेश दे रही आस्था की लौ
प्रयागराज की मौजूदा बाढ़ ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है। गंगा और यमुना के जलस्तर में बदलाव के कारण प्रशासन लगातार हालात पर नजर रख रहा है। ऐसे समय में झूंसी के पास ऊंचाई पर जलती अखंड ज्योति धार्मिक आस्था की एक अलग तस्वीर सामने ला रही है।
श्रद्धालुओं के लिए यह ज्योति केवल एक लौ नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही परंपरा और विश्वास का प्रतीक है। पानी, बारिश और कठिन परिस्थितियों के बीच भी इसकी सेवा जारी रहना इस स्थान से जुड़े लोगों के संकल्प को दिखाता है।
फिलहाल प्रयागराज में बाढ़ की स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है और नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव के आधार पर आगे की व्यवस्थाएं की जा रही हैं। वहीं, संगम क्षेत्र में ऊंचे मचान पर जलती यह अखंड ज्योति श्रद्धालुओं के बीच आस्था, परंपरा और उम्मीद की कहानी कह रही है।
रिपोर्टर ; चरणप्रीत सिंह, मुख्य संवाददता देहरादून

