उमर अब्दुल्ला BJP आरोप: विरोध प्रदर्शन पर पुलिस के दोहरे मापदंड का दावा
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विरोध प्रदर्शन की अनुमति को लेकर पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उमर अब्दुल्ला ने दावा किया कि श्रीनगर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और नेशनल कॉन्फ्रेंस के विरोध प्रदर्शनों के साथ प्रशासन ने अलग-अलग तरीके से व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि एक पार्टी को प्रदर्शन की अनुमति और सुरक्षा दी गई, जबकि दूसरी पार्टी के प्रदर्शन को दबाने के लिए पुलिस ने सख्ती की।
मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी को लेकर केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार राज्य का दर्जा बहाल नहीं करना चाहती है तो उसे यह बात स्पष्ट रूप से सामने रखनी चाहिए।
विरोध प्रदर्शन को लेकर पुलिस पर लगाए दोहरे मापदंड के आरोप
उमर अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि श्रीनगर में BJP को विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति दी गई, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस को प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि दोनों प्रदर्शनों को एक जैसा बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन और पुलिस ने दोनों दलों के साथ समान व्यवहार नहीं किया। उनके मुताबिक, BJP के प्रदर्शन को सुविधा और सुरक्षा दी गई, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन को बलपूर्वक रोका गया।
उमर ने आरोप लगाया कि उनके साथियों को प्रदर्शन के दौरान घसीटा गया और कुछ लोग घायल भी हुए। उन्होंने कहा कि घायलों में से कुछ को अस्पताल में इलाज कराना पड़ा।
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वे खुद मौके पर मौजूद थे और उन्होंने देखा कि BJP के प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों को किस तरह वहां जाने और विपक्ष के नेताओं से बातचीत करने की सुविधा मिली।
‘मुख्यमंत्री आवास तक मार्च की अनुमति, BJP कार्यालय के बाहर नहीं’
उमर अब्दुल्ला ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करना चाहता है तो उसे अनुमति मिल जाती है। सचिवालय का घेराव करने की भी अनुमति दी जाती है, लेकिन BJP कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जाती।
उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर की पुलिस BJP की सुरक्षा और प्रतिष्ठा की रक्षा करने तक सीमित हो गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और प्रशासन को सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।
राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी पर केंद्र को घेरा
जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे को लेकर भी उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। विपक्ष के नेता की ओर से उनके इस्तीफे और राज्य के दर्जे के मुद्दे पर विधानसभा में वोट कराने की मांग पर उन्होंने कहा कि विधानसभा इस विषय पर पहले ही प्रस्ताव पारित कर चुकी है।
उमर ने कहा कि यदि केंद्र सरकार राज्य का दर्जा बहाल नहीं करने वाली है तो उसे यह बात साफ तौर पर जनता के सामने कहनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को लगातार यह आश्वासन दिया गया है कि राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। ऐसे में केंद्र सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
‘विपक्ष की खुशी के लिए इस्तीफा नहीं दूंगा’
अपने इस्तीफे की मांग पर उमर अब्दुल्ला ने साफ कहा कि वह विपक्ष के नेता की खुशी के लिए इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की जनता ने उनकी सरकार को पांच साल का जनादेश दिया है और सरकार पांच साल बाद जनता के सामने अपना रिपोर्ट कार्ड रखेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार अपने कार्यकाल के दौरान जनता से किए गए वादों पर काम करेगी और लोकतांत्रिक तरीके से अपना कार्यकाल पूरा करेगी।
नियुक्तियों और जांच के आरोपों पर भी जवाब
उमर अब्दुल्ला ने अपनी सरकार पर लगाए जा रहे भ्रष्टाचार और कथित पिछली दरवाजे से नियुक्तियों के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास कई जांच एजेंसियों पर सीधे नियंत्रण नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी नियुक्ति में गड़बड़ी हुई है या धोखाधड़ी हुई है तो संबंधित एजेंसियों ने इसकी जांच क्यों नहीं की।
उमर ने एंटी-करप्शन ब्यूरो, क्राइम ब्रांच और CID का जिक्र करते हुए कहा कि ये एजेंसियां सीधे उनके नियंत्रण में नहीं हैं। उन्होंने विपक्ष से पूछा कि यदि किसी मामले में अन्याय या भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी जांच किस एजेंसी ने की है।
मुख्यमंत्री ने आरोपों को BJP की ओर से लगाए गए बेबुनियाद आरोप बताया। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए ठोस मुद्दे नहीं होते तो इस तरह के आरोप लगाए जाते हैं।
मोहन भागवत के बयान पर उमर अब्दुल्ला का पलटवार
RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में दिए गए बयान पर भी उमर अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बयान देना अलग बात है और जमीन पर उसे लागू करना अलग बात।
उमर ने कहा कि यदि RSS प्रमुख ने अमेरिका में सामाजिक सौहार्द और समानता की बात कही है तो यह अच्छी बात है, लेकिन इसका असर जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश के दूसरे हिस्सों में पढ़ाई और नौकरी के लिए जाने वाले कई मुस्लिम युवाओं को कथित तौर पर किराए पर घर लेने में परेशानी होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि वास्तव में समाज में सभी धर्मों के लोगों के साथ समान व्यवहार की बात की जाती है तो इसे व्यवहार में भी लागू किया जाना चाहिए।
‘जम्मू-कश्मीर से बाहर जाकर घर किराए पर लेने की कोशिश करें’
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि केवल बयान देने से स्थिति नहीं बदलेगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी मुस्लिम व्यक्ति को जम्मू-कश्मीर से बाहर जाकर घर किराए पर लेने में परेशानी होती है तो इस वास्तविकता को भी स्वीकार करना होगा।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में शिक्षा और रोजगार के लिए जाने वाले जम्मू-कश्मीर के युवाओं को रहने के लिए जगह तलाशने में कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उमर ने कहा कि यदि RSS प्रमुख की बातों को जमीन पर लागू किया जाता है तो वह इसे सकारात्मक बदलाव मानेंगे।
FIR रद्द करने के मुद्दे पर BJP पर निशाना
कॉकरोच पार्टी के सदस्यों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने के मुद्दे पर भी उमर अब्दुल्ला ने BJP पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि BJP काफी समय से बैकफुट पर है। उनके मुताबिक, पहले कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाया और बाद में Gen Z ने इसे आगे बढ़ाया।
उमर ने कहा कि आने वाले समय में देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या होता है।
GLOF के खतरे पर सरकार की तैयारी
जम्मू-कश्मीर में ग्लेशियर झील के फटने से आने वाली बाढ़ यानी GLOF के खतरे को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सरकार की तैयारियों की जानकारी दी।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार ने इस संबंध में पहले ही कुछ फंड जारी कर दिया था। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने नेपाल में हुई घटनाओं का इंतजार नहीं किया, बल्कि संभावित खतरे को पहले से ध्यान में रखते हुए तैयारी शुरू कर दी थी।
उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों की ओर से दिए गए सुझावों पर काम किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जम्मू-कश्मीर में ग्लेशियर झील फटने जैसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में नुकसान को कम किया जा सके।
BJP और उमर सरकार के बीच बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
उमर अब्दुल्ला के ताजा बयानों से जम्मू-कश्मीर की राजनीति में BJP और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच टकराव एक बार फिर सामने आया है। विरोध प्रदर्शन की अनुमति, राज्य का दर्जा, सरकार की कार्यप्रणाली और विभिन्न मामलों में जांच जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने इस्तीफे की मांग को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार को जनता ने पांच साल का जनादेश दिया है। वहीं, उन्होंने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
ऐसे में आने वाले दिनों में राज्य का दर्जा, राजनीतिक प्रदर्शनों की अनुमति और केंद्र-जम्मू-कश्मीर संबंधों से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रह सकते हैं।
रिपोर्टर ; तेजिंदर सिंह, मुख्य संवाददता उत्तराखण्ड
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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