अनाक क्राकाटाउ ज्वालामुखी में कई विस्फोट, 50 हजार फीट तक पहुंची राख, 8 एयरपोर्ट बंद; हजारों उड़ानें प्रभावित
इंडोनेशिया: अनाक क्राकाटाउ ज्वालामुखी में रविवार को कई बार विस्फोट हुए, जिसके बाद आसमान में राख के बड़े-बड़े गुबार फैल गए। ज्वालामुखी से निकली राख करीब 50 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंची और इसका असर इंडोनेशिया के हवाई यातायात पर पड़ा। सुरक्षा कारणों से राजधानी जकार्ता समेत कई इलाकों के 8 एयरपोर्ट पर उड़ान संचालन रोक दिया गया। शुरुआती सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1,558 उड़ानें प्रभावित हुईं और करीब 1.70 लाख यात्रियों पर असर पड़ा। बाद के अपडेट में प्रभावित उड़ानों की संख्या 2,300 से अधिक बताई गई है।
अनाक क्राकाटाउ ज्वालामुखी जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच सुंडा स्ट्रेट में स्थित है। इसमें शुक्रवार से गतिविधियां बढ़ी हुई थीं। रविवार को ज्वालामुखी ने कई बार विस्फोट किया, जिसके बाद अधिकारियों ने हवाई सुरक्षा को देखते हुए कई एयरपोर्ट बंद करने का फैसला लिया।

50 हजार फीट तक पहुंचा राख का गुबार
इंडोनेशिया की जियोलॉजिकल एजेंसी के मुताबिक रविवार को ज्वालामुखी से दो बड़े राख के गुबार निकले। एक राख का गुबार करीब 20 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंचा और जकार्ता, बैंटन तथा पश्चिमी जावा की दिशा में बढ़ा।
दूसरा राख का गुबार करीब 50 हजार फीट यानी लगभग 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया। यह राख बैंटन, लैंपुंग और बेंगकुलु समेत आसपास के इलाकों और समुद्री क्षेत्र की ओर फैली।
अधिकारियों ने बताया कि राख के फैलाव और हवा की दिशा पर लगातार नजर रखी जा रही है। ज्वालामुखी की गतिविधि को देखते हुए आगे भी विस्फोट की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
8 एयरपोर्ट पर उड़ान संचालन प्रभावित
ज्वालामुखीय राख को विमानों के लिए गंभीर खतरा माना जाता है। इसी वजह से इंडोनेशिया के विमानन अधिकारियों ने कई एयरपोर्ट पर संचालन रोक दिया।

प्रभावित प्रमुख एयरपोर्ट में सोएकार्नो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और हलीम परदानाकुसुमा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शामिल रहे। इनके अलावा बांडुंग का हुसैन सास्त्रानेगारा एयरपोर्ट और सुमात्रा में राडिन इंतान II एयरपोर्ट समेत अन्य हवाई अड्डे भी प्रभावित हुए।
शुरुआती चरण में आठ एयरपोर्ट पर उड़ान संचालन रोकने से 1,558 उड़ानें प्रभावित हुई थीं और करीब 1.70 लाख यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सोमवार तक स्थिति और बिगड़ने के बाद 2,300 से ज्यादा उड़ानों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई।
विमान के लिए क्यों खतरनाक है ज्वालामुखी की राख?
ज्वालामुखी से निकलने वाली राख सामान्य धूल की तरह नहीं होती। इसमें बेहद महीन चट्टानी और खनिज कण होते हैं, जो विमान के इंजन में प्रवेश करने पर गंभीर तकनीकी समस्या पैदा कर सकते हैं।

राख के कारण इंजन के अंदर मौजूद हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है और दृश्यता भी प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि जब किसी सक्रिय ज्वालामुखी की राख का गुबार हवाई मार्ग में फैलता है तो विमानन अधिकारी एहतियात के तौर पर उड़ानें रोकने या उनके मार्ग बदलने का फैसला लेते हैं।
इंडोनेशिया में भी इसी सुरक्षा कारण से प्रभावित इलाकों के हवाई यातायात को नियंत्रित किया गया।
एयरपोर्ट पर फंसे यात्री
उड़ानें रद्द और स्थगित होने के बाद बड़ी संख्या में यात्री एयरपोर्ट पर फंस गए। कई यात्रियों को अपनी यात्रा दोबारा निर्धारित करनी पड़ी, जबकि एयरलाइंस की ओर से यात्रियों को रीबुकिंग और रिफंड के विकल्प दिए गए।
जकार्ता के सोएकार्नो-हट्टा एयरपोर्ट पर अकेले ही 900 से ज्यादा उड़ानें प्रभावित हुईं। यात्रियों की भीड़ और उड़ानों के लगातार रद्द होने से एयरपोर्ट पर अव्यवस्था की स्थिति बन गई।
स्कूलों को भी किया गया ऑनलाइन
ज्वालामुखीय राख का असर सिर्फ हवाई यातायात तक सीमित नहीं रहा। राख के फैलाव और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए जकार्ता तथा कुछ अन्य प्रभावित इलाकों में स्कूलों को अस्थायी तौर पर ऑनलाइन कक्षाएं चलाने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों ने लोगों को राख के संपर्क से बचने और जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
लोगों को क्रेटर से दूर रहने की सलाह
इंडोनेशियाई अधिकारियों ने लोगों और पर्यटकों को सक्रिय क्रेटर के आसपास जाने से बचने की सलाह दी है। रिपोर्टों के मुताबिक लोगों को ज्वालामुखी के क्रेटर से कम से कम 3 किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी गई है।
फिलहाल किसी बड़े पैमाने पर निकासी का आदेश जारी नहीं किया गया था और तत्काल सुनामी का खतरा भी नहीं बताया गया। हालांकि, अधिकारियों ने ज्वालामुखी की गतिविधियों पर लगातार निगरानी बनाए रखी है।
जुलाई से बढ़ रही थी ज्वालामुखी की गतिविधि
इंडोनेशिया की जियोलॉजिकल एजेंसी के मुताबिक अनाक क्राकाटाउ में जुलाई से गतिविधि बढ़ी हुई थी। रविवार के विस्फोट इस अवधि के दौरान सबसे शक्तिशाली गतिविधियों में शामिल रहे।
अधिकारियों का कहना है कि लगातार हो रहे विस्फोट यह संकेत दे सकते हैं कि ज्वालामुखी के नीचे मैग्मा और गैस की आपूर्ति जारी है। हालांकि, सिर्फ विस्फोटों की संख्या या राख के गुबार की ऊंचाई के आधार पर यह निश्चित तौर पर नहीं बताया जा सकता कि अगला विस्फोट कितना बड़ा होगा।
2018 की घटना की याद हुई ताजा
अनाक क्राकाटाउ का नाम इंडोनेशिया की बड़ी ज्वालामुखीय घटनाओं से जुड़ा रहा है। दिसंबर 2018 में इसी ज्वालामुखी की गतिविधि के बाद समुद्र के भीतर भूस्खलन हुआ था, जिससे विनाशकारी सुनामी आई थी और 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
वर्तमान गतिविधि ने एक बार फिर इस ज्वालामुखी को लेकर चिंता बढ़ा दी है, हालांकि मौजूदा स्थिति में अधिकारियों ने तत्काल सुनामी के खतरे की पुष्टि नहीं की है।
1883 के क्राकाटोआ से क्या है संबंध?
अनाक क्राकाटाउ का अर्थ ही ‘क्राकाटोआ का बच्चा’ है। यह उसी क्षेत्र में बने ज्वालामुखीय द्वीप से विकसित हुआ, जहां 1883 में क्राकाटोआ का बेहद विनाशकारी विस्फोट हुआ था।
1883 के विस्फोट को इतिहास के सबसे शक्तिशाली ज्वालामुखीय विस्फोटों में गिना जाता है। इसके बाद आई सुनामी में हजारों लोगों की जान गई थी और इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर भी दर्ज किया गया था।
आगे भी विस्फोट की आशंका
इंडोनेशिया की ज्वालामुखी निगरानी एजेंसी ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में अनाक क्राकाटाउ में फिर से विस्फोट होने की संभावना बनी हुई है। वैज्ञानिक ज्वालामुखी की भूकंपीय गतिविधि, गैस उत्सर्जन और राख के गुबार समेत कई संकेतकों की निगरानी कर रहे हैं।
सोमवार को भी कुछ एयरपोर्ट पर ज्वालामुखीय राख के कारण संचालन प्रभावित रहा। रॉयटर्स के अनुसार, सात एयरपोर्ट बंद थे और प्रभावित यात्रियों की संख्या 2.70 लाख से ज्यादा हो चुकी थी।
रिपोर्टर; अमनदीप सिंह, मुख्य संवाददता लुधियाना
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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