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भारत के मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा जीवनी एवं उनसे जुड़े विवाद | CJI Dipak Misra Biography in Hindi

भारत के मुख्य न्यायधीश है दीपक मिश्रा जीवनी एवं उनसे जुड़े विवाद | भारत के मुख्य न्यायाधीश कौन है  | Who is Current Chief Justice of India in Hindi | Chief Justice of India (CJI) Dipak Misra and his controversies (Vivad)

भारत के अभी मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा है, जो कि जगदीश सिंह खेहर के 27 अगस्त 2017 को स्तीफा या रिटायर्ड होने बाद बने हैं. अभी-अभी इनको लेकर एक विवाद सामने आया है. शुक्रवार को यानि 12 जनवरी 2018 को चार सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने साथ मिलकर प्रेस के साथ मुलाकात की है. सूत्रों के मुताबिक इस दौरान उन्होंने देश की न्यायपालिका की आजादी को लेकर काफी सारे सवाल खड़े किये है.

भारत के नए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा का जीवन परिचय | Dipak Misra Biography in Hindi

कुछ महीने पहले ही भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद मिश्रा ने संभाला है. भारत के 45वें सीजेआई के रूप में इनको अगस्त के महीने में ही चुना गया था, जबकि ये इस साल अक्टूबर में अपने इस पद से रिटायर होने वाले हैं. भारत में उड़ीसा राज्य से भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने वाले ये तीसरे व्यक्ति है. इससे पहले इनके चाचा सन् 1990 से 1991 के बीच सीजेआई (चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया) रह चुके हैं. भारत के मुख्य न्यायाधीश होने से पहले ये पटना एवं दिल्ली उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) के पूर्व न्यायाधीश भी रह चुके हैं.

पूरा नामदीपक मिश्राजन्म स्थानउड़ीसा, भारतआयु64 सालपसंदकिताब पढ़नारिश्ते की स्थितिशादीशुदाशरीर का रंगगोराऊंचाई5 फुट 4 इंचवजन65 किलोग्रामधर्म  हिन्दू

दीपक मिश्रा की जन्म एवं शिक्षा (dipak misra birthplace and education)

इनका जन्म उड़ीसा राज्य में कटक नामक शहर में 3 अक्टूबर 1953 को हुआ था. इनकी प्रारंभिक शिक्षा कटक से ही हुई है, इन्होंने अपनी लॉ की डिग्री मधुसूदन लॉ ऑफ़ कॉलेज से ही की है.

दीपक मिश्रा का परिवार (Dipak Misra family)

इनके परिवार की बात करें तो इनके एक चाचा पहले ही भारत की सीजेआई रह चुके है जिनका नाम रंगनाथ मिश्रा है, इसके अलावा इनकी एक पत्नी है. फिलहाल इसके अलावा इनके परिवार के बारे में कोई जानकारी मौजूद नहीं है.

दीपक मिश्रा का उड़ीसा हाई कोर्ट के वकील से लेकर भारत का मुख्य न्यायाधीश बनने का सफर (chief justice dipak misra career)

दीपक मिश्रा ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उड़ीसा के उच्च न्यायालय में एक वकील की हैसियत से सन् 1977 में फरवरी से ही नौकरी करना शुरू कर दिया था. इनकी कड़ी मेहनत के दम पर सरकार ने इन्हें बतौर एक अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया, इनको ये पद काफी सालों बाद सन् 1996 में सौंपा गया था. जहां पर इनकी लगन को देखकर सरकार ने एक बार फिर इनका पद बढ़ाया और मध्यप्रदेश के हाई कोर्ट में 19 दिसम्बर 1997 को भेज दिया गया, वहां पर इनको स्थायी जज के पद पर बैठाया गया. इनकी प्रतिभा को देखते हुए इनकी पदोन्नति 23 दिसंबर 2009 को गई, जिसके लिए इनको पटना उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश का पद दिया गया. एक साल बाद इनको दिल्ली हाई कोर्ट के लिए भेजा गया, हालांकि इस बार इनका पद चीफ जस्टिस ही रखा गया था. 10 अक्टूबर 2011 को इनको सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त कर दिया गया और पिछले साल 2017 को इनको 13 महीने के लिए देश का सीजेआई  नियुक्त किया गया है.

दीपक मिश्रा के मुख्य केस (Cases)

30 जुलाई 2015 को इनको जान से मरने की धमकी मिली थी, जिसके पीछे का कारण था इनके द्वारा 1993 मुंबई बम धमाके में शामिल आतंकवादी याकूब मेनन की फांसी के दंड को कम करने की याचिका को ख़ारिज करना.इसके अलावा इन्होंने अपने साथी जज दलवीर भंडारी के साथ मिलकर एक और अच्छा फैसला सुनाया था, जिसमें इन दोनों ने इलाहाबाद कोर्ट के निर्णय को सही बताते कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का पदोन्नति पर आरक्षण दिया जाना गलत है. यदि आप ऐसा करना चाहते तो पहले आपको इसकी जरूरतों के साक्ष्य अदालत के सामने पेश करने पड़ेगे, अभी ऐसा कोई सबूत एवं तथ्य ना मिलने की वजह से इस पदोन्नति में आरक्षण देने की याचिका को ख़ारिज किया गया है.इसके साथ ही इन्होंने निर्भया रेप केस का फैसला सुनाते हुए इसके जिम्मेदार अपराधियों को सजा सुनायी थी. फांसी देने की इस सजा को 5 मई को घोषित किया गया, जिसमें इनके साथ दो जज और शामिल थे.

दीपक मिश्रा के विवाद

सन् 1985 में इनको मिलने वाला 2 एकड़ जमीन का पट्टा रद्द करवा दिया गया था, जिसको रद्द करवाने में उस जिले के एक मजिस्ट्रेट ने ही आर्डर दिया था.

भारत के सीजीआई पर उठे सवाल क्या है पूरा मामला (four SC court judge arise voice against CGI)

इस मामले में न्यायाधीश जे चेमामेश्वर ने मीडिया को बताया की हमे अपने न्याय करने की प्रणाली में बदलाव करना होगा, हमने इस मामले में सीजीआई को पहले भी कुछ महीने पहले पत्र लिखकर बताया था. लेकिन हमारी बात ही नहीं सुनी जा रही है. इसलिए हमने जनता के सामने आकर अपनी बात रखी है, अब फैसला इस देश की जनता को करना है. इतना ही नहीं चेलामेश्वर ने कहा की अगर अभी इन चीजों का पर ध्यान नहीं दिया गया तो राष्ट्र की प्रतिष्ठा खतरे में है. हमारी जिम्मेदारी है की हम इस देश की गरिमा बचाये रखे इसलिए हम चारों ने मिलकर चीफ जस्टिस के खिलाफ मोर्चा खोला है. चेलामेश्वर भारत के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज है. उन्होंने बताया की चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया न्याय के मामले में अपनी मर्जी की ही करते है, जिससे देश को हानि हो सकती है.

कौन कौन थे मौजूद (who are present in this Press conference)

न्यायमूर्ति चेलामेश्वर के साथ न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन लोकुर, एवं न्यायमूर्ति कुरियन जोशेफ भी इस मिडिया कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे. इन सभी का आरोप है की सीजीआई दीपक मिश्रा की वजह से न्यायालय की गरिमा खतरे में है. दीपक मिश्रा के पद संभालने से भारत की न्याय व्यवस्था में सुधार नहीं किये जा रहे है. जिससे भारत की न्याय व्यवस्था पर सवाल उठना शुरू हो गए है. लोगों का कहना है कि भारत में न्याय को लेकर भी पारदर्शिता होनी चाहिए. यह मिडिया कांफ्रेंस चेलामेश्वर के घर पर रखी गयी.

भारत के मुख्यन्यायाधीश का चुनाव कैसे किया जाता है (how chief justice of India is appointed)

तथ्यों की बात की जाए तो भारत के संविधान के 136 लेख में जज को चुने जाने की प्रक्रिया को बताया है, और इसमें सीजेआई के चयन की प्रक्रिया को अलग से नहीं बताया गया है. मतलब सभी जजों की तरह ही चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का चयन किया जाता है. इसमें उन लोगों को चयन के लिए चुना जाता है, जिनके पास सुप्रीम कोर्ट में सबसे लम्बे समय तक बतौर जज रहने का अनुभव होता है. इतना ही नहीं इसके लिए भारतीय संविधान के प्रति कार्यनिष्ठा को भी मद्देनजर रखा जाता है. भारत के राष्ट्रपति के द्वारा ही सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की जाती है. वरिष्ठता को देखकर सीजेआई बनाने वाले इस नियम का उलंघन सिर्फ दो बार किया गया है. एक बार भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के द्वारा एवं दूसरी बार श्री मति इंदिरा गाँधी के द्वारा, इंदिरा गाँधी ने ये कार्य भारत में लगाये गए आपातकाल के दौरान की थी. जिसके पीछे का कारण एच आर खन्ना के द्वारा सर्कार का विरोध करना था. उसके बाद इंदिरा गाँधी ने अपनी सरकार को बचने के लिए अपने पिठठू न्यायमूर्ति ए एन राय को सीजेआई नियुक्त कराया था.

सीजेआई को कैसे हटाया जा सकता है (How Chief Justice of India can be removed)

वैसे तो भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति को एक बार नियुक्त करने के बाद उनकी आयु 65 होने के बाद ही हटाया जाता है. लेकिन भारत के संविधान में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को हटाने के लिए एक और नियम का उल्लेख 124 आर्टिकल में किया गया है. इस नियम के अनुसार यदि सीजेआई को हटाना है तो उसके लिए सीजेआई के पद पर आसीन व्यक्ति के खिलाफ दुर्व्यवहार करने एवं असमर्थता का पुष्टिकरण देना होगा.

अगर किसी न्यायमूर्ति जज को हटाना है तो इसकी प्रक्रिया का उल्लेख हमारे संविधान में किया गया है.

जिसके अनुसार भारत के राष्ट्रपति की अनुमति के साथ-साथ देश के दोनों सदनों के दो तिहाई मत का भी सहमत प्राप्त होना आवश्यक है. मतलब जब राजयसभा के 2/3 सदस्य सीजेआई को हटाने के लिए राजी होंगे उसके बाद लोकसभा में भी यही होना चाहिए, जिसके बाद राष्ट्रपति के आदेश पर सीजेआई को हटाया जायेगा. हालांकि अभी तक के भारतीय इतिहास में ऐसा नहीं हुआ है.

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का वेतन (chief justice of india salary)

भारत के सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई को 2.80 लाख रुपय पर महीने के हिसाब से मिलता है. वहीं सुप्रीम कोर्ट के जज और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति (सीजे) का वेतन 2.50 लाख रुपय पर महीने होता है.

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की शक्तियां (Chief justice of India powers)

यदि हमारे देश के राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति किसी वजह से हटा दिए जाते है या फिर इनकी मौत हो जाती है तो सीजेआई एक राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति की जगह ले सकता है. जब तक की कोई नया व्यक्ति इस पद पर नियुक्त न हो जाए. जो कि भारत में सीजेआई के पास सबसे बड़ी शक्ति है.अनुच्छेद 127 में भारत के सीजेआई को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को नियुक्त करने की शक्ति का वर्णन किया गया है. और राष्ट्रपति भी उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश का चुनाव करने के समय भारत के सीजेआई से सलाह लेते है.इसके अलावा इनके पास सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज को फिर से जज बनाने का अधिकार है, इसके साथ ही किसी भी कोर्ट कर्मचारी को नियुक्त कर सकते है.किसी भी उच्च न्यायालय के जज का ट्रांसफर (तबादला) एक कोर्ट से दूसरे कोर्ट में कर सकता है. इतना ही नहीं अगर राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच कोई आर्थिक मतभेद है तो उसको सुलझा सकता है.

भारत का सर्वोच्च न्यायालय कहाँ स्थित है (where is Supreme court of India)

भारत का सर्वोच्च न्यायालय जहां के मुख्य जज के तौर पर भारत के सीजेआई बैठते हैं और भारत में जहां पर सभी कानूनी अंतिम निर्णय लिए जाते है एवं सबसे ज्यादा शक्तिशाली न्यायालय दिल्ली में स्थित है.

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