मसूद पेजेशकियान का बड़ा बयान, बोले- ईरान युद्ध नहीं चाहता, बातचीत से ही निकलेगा समाधान
नई दिल्ली/तेहरान, 12 सितंबर। ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव और सीजफायर को लेकर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने संकट को बातचीत के जरिए हल करने के लिए कई दौर की वार्ता की है। पेजेशकियान के मुताबिक, उनका देश युद्ध नहीं चाहता और संघर्ष किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
इंडिया टुडे ग्रुप की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन को दिए इंटरव्यू में पेजेशकियान ने ईरान के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि जब पहली बार युद्ध शुरू हुआ, उस समय भी ईरान बातचीत की मेज पर था। उन्होंने कहा कि हमलों के बाद भी ईरान बातचीत की प्रक्रिया में लौटने के लिए तैयार रहा।
बातचीत के जरिए समाधान पर जोर
मसूद पेजेशकियान ने कहा कि ईरान की प्राथमिकता बातचीत और कूटनीति के जरिए विवाद का समाधान निकालना है। उन्होंने युद्ध को किसी भी समस्या का समाधान मानने से इनकार किया।
ईरानी राष्ट्रपति के मुताबिक, संघर्ष के बावजूद बातचीत के रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सबसे बड़ी चुनौती दोनों पक्षों के बीच भरोसा कायम करना है।
पेजेशकियान ने कहा कि बातचीत तभी आगे बढ़ सकती है जब पक्षों के बीच विश्वास का माहौल बनाया जाए। उनके अनुसार, युद्ध के बाद पैदा हुए अविश्वास को दूर करना किसी भी नए समझौते के लिए बेहद जरूरी होगा।
‘ईरान ने पिछले 100 वर्षों में किसी पर आक्रामकता नहीं की’
इंटरव्यू के दौरान पेजेशकियान ने ईरान की विदेश नीति का बचाव करते हुए दावा किया कि पिछले 100 वर्षों में ईरान आक्रामक पक्ष नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष को ईरान की आक्रामक नीति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ईरान अपने हितों और संप्रभुता की रक्षा के लिए कदम उठाता है, लेकिन उसकी प्राथमिकता युद्ध को आगे बढ़ाना नहीं है।
पेजेशकियान ने यह भी संकेत दिया कि क्षेत्र में लंबे समय तक शांति बनाए रखने के लिए सभी देशों को एक-दूसरे की संप्रभुता और सुरक्षा चिंताओं को समझना होगा।
सीजफायर और भरोसा सबसे बड़ी चुनौती
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि संघर्ष विराम को स्थायी शांति में बदलना आसान नहीं होगा। इसके लिए दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती है।
उनके मुताबिक, सिर्फ सीजफायर से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए राजनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाना और ऐसे मुद्दों पर सहमति बनाना जरूरी है जिनको लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से मतभेद हैं।
ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि अगर बातचीत के जरिए विवादों को सुलझाने का रास्ता निकाला जाता है तो क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावना मजबूत हो सकती है।
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान की भूमिका अहम
पेजेशकियान ने क्षेत्रीय देशों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, तुर्की, पाकिस्तान और क्षेत्र के दूसरे देश अपनी अलग पहचान बनाए रखते हुए शांति स्थापित करने की कोशिशों में योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग और संवाद को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि मध्य-पूर्व की समस्याओं का समाधान केवल बाहरी शक्तियों के जरिए नहीं बल्कि क्षेत्रीय देशों की भागीदारी से भी होना चाहिए।
इसी बीच 12 सितंबर को नई दिल्ली में हुए BRICS सम्मेलन में भी मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई गई और अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई। BRICS के संयुक्त बयान में नागरिकों की सुरक्षा, राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर दिया गया।
भारत के साथ भी बातचीत पर जोर
ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब वह भारत में BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पेजेशकियान के साथ बातचीत में संवाद और कूटनीति के जरिए विवादों के समाधान की भारत की नीति दोहराई। दोनों नेताओं के बीच समुद्री सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारत लगातार ईरान और अन्य देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखते हुए क्षेत्र में शांति और स्थिरता की वकालत करता रहा है।
युद्ध नहीं, बातचीत चाहते हैं पेजेशकियान
मसूद पेजेशकियान के बयान से साफ है कि ईरान की ओर से बातचीत के रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। उन्होंने युद्ध को समस्या का समाधान नहीं माना और विश्वास बहाली को आगे की बातचीत के लिए अहम बताया।
हालांकि, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच संघर्ष और फिर बातचीत की कोशिशों का सिलसिला चलता रहा है। इससे पहले भी पेजेशकियान ने संकेत दिया था कि अगर अमेरिका पूर्व समझौतों से जुड़ी अपनी प्रतिबद्धताओं पर लौटता है तो ईरान भी जवाबी कदम उठाने को तैयार हो सकता है।
अब नजर इस बात पर है कि क्या दोनों पक्ष फिर से प्रभावी बातचीत की मेज पर लौटते हैं और सीजफायर को स्थायी शांति में बदलने की दिशा में कोई ठोस रास्ता निकलता है।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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