फिल्म शूटिंग के लिए 5 करोड़ तक की सब्सिडी देने वाला मप्र पहला राज्य, 60 फीसदी शूटिंग अकेले हमारे भोपाल में
भोपाल: 500 से ज्यादा नेचुरल लोकेशन प्रदेश में।68वेें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में मप्र को दूसरी बार मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का पुरस्कार मिला है। इससे पहले 2017 में भी मप्र को यह अवॉर्ड मिला था। इस बार मप्र का 13 बड़े राज्यों के साथ कॉम्पिटीशन था, लेकिन अवॉर्ड हमारी झोली में आया। इसकी बड़ी वजह है यहां की बेस्ट लोकेशंस, सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी और शूटिंग के लिए सिंगल विंडो परमिशन। इस उपलब्धि का बड़ा श्रेय हमारे भोपाल को भी है। क्योंकि, पूरे मप्र की 60 फीसदी से ज्यादा शूटिंग भोपाल और आसपास ही होती हैं।पिछले कुछ सालों में भोपाल से रिश्ता रखने वाले जावेद अख्तर, रजा मुराद, रुमी जाफरी, जयंत देशमुख आदि ने फिल्म निर्माताओं को एमपी में शूटिंग के लिए राजी किया। मप्र सरकार ने प्रक्रिया को सरल बनाते हुए 2016 में पर्यटन बोर्ड का गठन कर दिया। 2019 में फिल्म पॉलिसी भी बनाई। मप्र पहला राज्य है जो शूटिंग के लिए पांच कैटेगरी में 35 लाख से 5 करोड़ तक की सब्सिडी दे रहा है। शूटिंग परमिशन के लिए सिंगल विंडो सिस्टम शुरू किया है।पॉपुलर लोकेशनबड़ा तालाब, ताजमहल, गौहर महल, वीआईपी रोड, मोती मस्जिद, न्यू मार्केट, कलियासोत डेम, मिंटो हॉल, वन विहार, कोलार, केरवा, दाहोद डेम, बुदनी, पचमढ़ी, मढ़ई, चंदेरी किला, सांची, महेश्वर, ओंकारेश्वर, खजुराहो, मांडू महल।मांदल के बोल बेस्ट एथनोग्राफिक फिल्मनॉन फीचर फिल्म कैटेगरी में ट्राइबल म्यूजियम द्वारा बैगा जनजाति पर बनाई गई बेस्ट एथनोग्राफिक फिल्म कैटेगरी का अवॉर्ड ‘मांदल के बोल’ को मिला। अब तक 6 नेशनल अवॉर्ड जीत चुके इस फिल्म के डायरेक्टर राजेंद्र जांगले बताते हैं- हमको सबकुछ ओरिजनल रखना था। मंडला और डिंडोरी के जंगलों में रहने वाली इस जनजाति में जब भी जन्म-मृत्यु या शादी की खबर मिलती तो हम 10 लोगों की टीम लेकर वहां पहुंच जाते।ऐसे बढ़ा भोपाल और मप्र में शूटिंग का क्रेजकरीब 68 साल पहले नया दौर की शूटिंग बुदनी में हुई थी। 1991-92 में इस्माइल मर्चेट की अंग्रेजी फिल्म इन कस्टडी की शूटिंग गौहर महल में हुई। फिर लंबे समय तक शूटिंग नहीं हुई। जब प्रकाश झा आरक्षण की लोकेशन ढूंढ रहे थे तो मैंने उन्हें भोपाल के बारे में बताया। इसके बाद उन्होंने आरक्षण, राजनीति, सत्याग्रह, चक्रव्यूह और गंगाजल 2 की शूटिंग की। तब दुनिया को पता चला कि यहां बेस्ट लोकेशन हैं। इसके बाद दबंग 2, पैडमेन, धाकड़, स्त्री, मोहन जोदाड़ो, शेरनी, वेबसीरीज पंचायत, महारानी आदि की शूटिंग ने एमपी की लोकेशन को लोकप्रियता दी।-जयंत देशमुख, आर्ट डायरेक्टरमप्र के लोग बहुत अच्छे हैं। सरकार और प्रशासन ने शूटिंग के लिए फ्रेंडली माहौल बनाया, इसीलिए यह अवॉर्ड मिला। अब शूटिंग करने वालों की तादाद और बढ़ेगी।भोपाल के कलाकारों और सरकार ने फ्रेंडली माहौल बना दिया। पहले हमको मुंबई में मप्र की लोकेशन के बारे में बताना पड़ता था, लेकिन अब मुंबई में चर्चा रहती है कि यहां से ज्यादा शूटिंग तो भोपाल में हो रही है।


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