CM Sukhvinder Singh Sukhu: किशाऊ बांध परियोजना पर खत्म हुआ गतिरोध
शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री CM Sukhvinder Singh Sukhu के लिए किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। करीब आठ साल से चले आ रहे गतिरोध के बाद अब हिमाचल प्रदेश समेत छह राज्यों के बीच इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए समझौते का रास्ता साफ हो गया है। प्रस्तावित समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश को परियोजना के लिए बड़ा वित्तीय बोझ नहीं उठाना पड़ेगा और राज्य को पानी तथा बिजली से जुड़े महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है।
15 सितंबर को MoU पर हस्ताक्षर की तैयारी
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के बीच समझौता प्रस्तावित है। रिपोर्ट के मुताबिक छह राज्यों के बीच 15 सितंबर को MoU पर हस्ताक्षर किए जाने की तैयारी है। इसके बाद परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा।
यह परियोजना टोंस नदी पर प्रस्तावित है, जो यमुना की प्रमुख सहायक नदी है। परियोजना का उद्देश्य बिजली उत्पादन के साथ-साथ सिंचाई और पेयजल की जरूरतों को पूरा करना है।
हिमाचल पर नहीं पड़ेगा बड़ा वित्तीय बोझ
किशाऊ परियोजना को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बदलाव इसके वित्तीय ढांचे में हुआ है। केंद्र सरकार जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष हिस्से का प्रबंध संबंधित राज्यों के बीच किया जाएगा। इससे हिमाचल प्रदेश पर पहले प्रस्तावित बड़े वित्तीय बोझ से राहत मिलने की बात सामने आई है।
पहले हिमाचल प्रदेश से परियोजना में वित्तीय योगदान की अपेक्षा की जा रही थी। पिछली व्यवस्था में राज्य के हिस्से के तौर पर करीब 800 करोड़ रुपये देने की बात थी, लेकिन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई थी।
हिमाचल को मिलेगा 378 MCM पानी
नए समझौते में हिमाचल प्रदेश के लिए पानी का हिस्सा भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य ने यमुना बेसिन में 378 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी के अधिकार को सुरक्षित किया है। इससे हिमाचल को भविष्य में अपनी जल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
केंद्र की ओर से जून में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद राज्यों के बीच परियोजना को लेकर सहमति बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया था। उस बैठक में हिमाचल के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराने के बदले राज्य के पावर कंपोनेंट की लागत में इन राज्यों की भागीदारी पर सहमति बनी थी।
बिजली से भी राज्य को आर्थिक फायदा
परियोजना से हिमाचल प्रदेश को बिजली क्षेत्र में भी लाभ मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य को भविष्य में बिजली घटक से करीब 600 करोड़ रुपये सालाना की आय हो सकती है, जबकि राज्य को परियोजना में बड़ी पूंजीगत राशि लगाने की जरूरत नहीं होगी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पहले ही इस समझौते को हिमाचल के हितों की रक्षा से जोड़ चुके हैं। राज्य सरकार का कहना रहा है कि हिमाचल की सहमति तभी संभव थी, जब परियोजना में राज्य के हितों को सुरक्षित किया जाए और उस पर अनावश्यक वित्तीय बोझ न डाला जाए।
422 MW की परियोजना, सिंचाई और पेयजल में भी फायदा
किशाऊ परियोजना को बहुउद्देशीय परियोजना के रूप में विकसित किया जाना है। ताजा रिपोर्ट में परियोजना की क्षमता 422 MW बताई गई है। इसके साथ करीब 97,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करने और हर साल लगभग 517 MCM पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य बताया गया है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये है।
यह परियोजना हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा से जुड़े क्षेत्र में प्रस्तावित है। इसके पूरा होने पर दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान सहित कई राज्यों को पानी की आपूर्ति और अन्य लाभ मिलने की उम्मीद है।
आठ साल पुराना विवाद खत्म होने की ओर
किशाऊ बांध परियोजना लंबे समय से राज्यों के बीच पानी, बिजली और वित्तीय हिस्सेदारी को लेकर विवाद में रही थी। जून 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद इस गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया गया था।
अब 15 सितंबर को प्रस्तावित MoU के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। हिमाचल सरकार के लिए यह समझौता इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे राज्य के जल अधिकारों के साथ-साथ आर्थिक हितों को भी सुरक्षित करने का दावा किया जा रहा है।
CM Sukhvinder Singh Sukhu सरकार के लिए किशाऊ बांध समझौता हिमाचल के जल और ऊर्जा हितों से जुड़ा एक अहम फैसला है। आने वाले समय में परियोजना की केंद्रीय मंजूरी और इसके बाद निर्माण प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।
रिपोर्टर; जैस्मिन कौर, मुख्य संवाददता दिल्ली
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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