UP राज्यसभा चुनाव 2026: 10 सीटों पर सियासी गणित, विधान परिषद की 11 सीटों पर भी बढ़ी हलचल
उत्तर प्रदेश में UP राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्यसभा की 10 सीटों के साथ विधान परिषद की 11 सीटों को लेकर भी राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। राज्यसभा की इन सीटों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को खत्म हो रहा है, जबकि विधान परिषद की 11 सीटों के लिए भी आने वाले महीनों में चुनावी प्रक्रिया होनी है।
राज्यसभा की 10 सीटों में मौजूदा तौर पर बीजेपी की 8, समाजवादी पार्टी की 1 और बहुजन समाज पार्टी की 1 सीट है। बसपा के सदस्य का कार्यकाल खत्म होने के बाद पार्टी का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व समाप्त हो जाएगा। वहीं विधानसभा में मौजूदा संख्या के आधार पर नई सीटों का चुनावी गणित मुख्य रूप से बीजेपी-एनडीए और सपा के बीच रहने की संभावना है।
25 नवंबर को खत्म होगा 10 सदस्यों का कार्यकाल
उत्तर प्रदेश कोटे से राज्यसभा के 10 सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होना है। इनमें बीजेपी के बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और बी.एल. वर्मा समेत अन्य सदस्य शामिल हैं। सपा की ओर से प्रो. राम गोपाल यादव और बसपा की ओर से रामजी का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।
डॉ. दिनेश शर्मा की सीट पहले ही खाली हो चुकी है। उन्होंने राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दिया था और उनकी सीट पर भी चुनाव कराया जाना है। चुनाव आयोग ने अब इस सीट को भी चुनाव कार्यक्रम में शामिल कर लिया है।
16 अक्टूबर को होगा राज्यसभा चुनाव
22 सितंबर 2026 को सामने आए चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा। नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होगी और उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया 19 अक्टूबर तक पूरी करने की समयसीमा तय की गई है।
इस चुनाव में उत्तर प्रदेश की 10 सीटों के साथ उत्तराखंड की एक सीट और पश्चिम बंगाल की एक सीट पर भी मतदान होगा।
397 विधायक तय करेंगे राज्यसभा का गणित
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन पिछले एक साल में छह विधायकों के निधन के बाद वर्तमान में 397 विधायक हैं। मौजूदा गणित के अनुसार राज्यसभा की एक सीट के लिए करीब 37 विधायकों के वोट की जरूरत होगी।
इसी संख्या के कारण राजनीतिक दल अपने अतिरिक्त वोटों और दूसरी वरीयता के वोटों का हिसाब लगा रहे हैं। खासकर उन परिस्थितियों में दूसरी वरीयता के वोट महत्वपूर्ण हो सकते हैं, जब किसी उम्मीदवार को पहली वरीयता के आधार पर जरूरी संख्या नहीं मिलती।
मौजूदा विधानसभा संख्या बल के आधार पर बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास करीब 292 विधायक बताए जा रहे हैं। इसी गणित के आधार पर बीजेपी-एनडीए के सात सीटों तक पहुंचने की संभावना का आकलन किया जा रहा है, जबकि सपा के खाते में दो सीटों का गणित बनता बताया जा रहा है। हालांकि अंतिम परिणाम उम्मीदवारों, गठबंधनों और मतदान के समय विधायकों की वास्तविक संख्या पर निर्भर करेगा।
बीजेपी के सामने उम्मीदवार चयन की चुनौती
राज्यसभा चुनाव के साथ बीजेपी के भीतर उम्मीदवारों को लेकर भी चर्चा तेज हो सकती है। जिन मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें कई बड़े नाम शामिल हैं। ऐसे में पार्टी किन चेहरों को दोबारा मौका देती है और किन नए चेहरों को मैदान में उतारती है, इस पर नजर रहेगी।
पार्टी की तैयारियों में सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखने की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि अंतिम उम्मीदवारों की सूची आधिकारिक रूप से सामने आने के बाद ही तस्वीर स्पष्ट होगी।
सपा के लिए अतिरिक्त वोटों का सवाल
समाजवादी पार्टी के पास संख्या बल के आधार पर दो सीटों का दावा करने की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। ऐसे में पार्टी के सामने उम्मीदवार चयन के साथ-साथ अतिरिक्त वोटों के प्रबंधन की चुनौती भी होगी।
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग और दूसरी वरीयता के वोट कई बार चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए पार्टियां अपने विधायकों की संख्या और संभावित वोटों का आकलन कर रही हैं।
विधान परिषद की 11 सीटों पर भी नजर
राज्यसभा के अलावा उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों को लेकर भी सियासी हलचल बढ़ी हुई है। इन सीटों के लिए भी आने वाले समय में चुनावी प्रक्रिया पूरी होनी है। रिपोर्टों के मुताबिक इन सीटों में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें भी शामिल हैं।
100 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधान परिषद में बीजेपी के पास वर्तमान में सबसे अधिक सदस्य हैं। समाजवादी पार्टी के पास भी परिषद में प्रतिनिधित्व है। इसलिए 11 सीटों का चुनाव विधान परिषद के मौजूदा शक्ति संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।
बीजेपी ने विधान परिषद चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी के स्तर पर संगठन और बूथ प्रबंधन से जुड़े नेताओं को भी चुनावी रणनीति पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले अहम दौर
राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव ऐसे समय हो रहे हैं जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी तेज हो चुकी हैं। इसलिए इन चुनावों को लेकर पार्टियों की रणनीति केवल तत्काल सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर आगे की राजनीतिक गतिविधियों में भी दिखाई दे सकता है।
समाजवादी पार्टी ने हाल में 2027 विधानसभा चुनाव के लिए ‘मिशन 27K’ के तहत सभी 403 सीटों पर वोट बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। पार्टी का फोकस उन सीटों पर भी है जहां 2022 में जीत-हार का अंतर कम रहा था।
दूसरी ओर बीजेपी भी संगठनात्मक तैयारियों और विभिन्न अभियानों के जरिए 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। राज्यसभा और विधान परिषद के चुनाव इस व्यापक चुनावी माहौल के बीच होने जा रहे हैं।
अब आगे क्या?
अब सबसे पहले राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम और आधिकारिक चुनाव प्रक्रिया पर नजर रहेगी। 29 सितंबर से नामांकन शुरू होने के बाद तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी। 16 अक्टूबर को मतदान और मतगणना के बाद यह भी सामने आ जाएगा कि विधानसभा में मौजूदा संख्या बल किस तरह राज्यसभा के अंतिम परिणाम में तब्दील होता है।
इसके बाद विधान परिषद की 11 सीटों को लेकर चुनावी गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है। इस तरह अक्टूबर और नवंबर के महीने
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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