प्रयागराज पिंडदान: संगम पर पितरों का तर्पण, विदेश से भी ऑनलाइन जुड़ रहे श्रद्धालु
दीप सिंह, लखनऊ मुख्य संवाददाता, दैनिक रुस्तम-ए-हिंद
प्रयागराज। पितृ पक्ष शुरू होते ही संगम नगरी प्रयागराज में पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। सुबह होते ही संगम के घाटों पर धार्मिक गतिविधियां दिखाई देने लगी हैं। कोई गंगा-यमुना के संगम में स्नान कर रहा है तो कोई घाट पर बैठकर अपने पूर्वजों के लिए तर्पण और पिंडदान की विधि पूरी कर रहा है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु प्रयागराज पहुंच रहे हैं। पितृ पक्ष इस वर्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा।
पितृ पक्ष के दौरान कई परिवार अपने दिवंगत माता-पिता और पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। प्रयागराज के संगम को पितृ कर्म के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संगम पर किए जाने वाले इन कर्मकांडों के माध्यम से लोग अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करते हैं।
हजारों किलोमीटर दूर से संगम पहुंच रहे लोग
संगम के घाट पर आने वाले हर श्रद्धालु की अपनी अलग कहानी है। कोई अपने पिता के लिए पिंडदान करने आया है तो कोई अपनी मां या परिवार के किसी अन्य सदस्य के निमित्त तर्पण कर रहा है। आंध्र प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचकर अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं।
कई लोगों के लिए यह यात्रा सिर्फ धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने परिवार की पुरानी परंपरा को निभाने और दिवंगत परिजनों को याद करने का अवसर भी है। संगम पर सुबह से ही अलग-अलग परिवारों को अपने तीर्थ पुरोहितों के साथ धार्मिक प्रक्रिया पूरी करते देखा जा रहा है।
प्रयागराज नहीं आ पाने वालों के लिए ऑनलाइन पिंडदान
समय और दूरी की वजह से हर व्यक्ति प्रयागराज नहीं पहुंच पाता। नौकरी, कारोबार, स्वास्थ्य संबंधी कारणों या विदेश में रहने वाले लोगों के सामने अक्सर यह समस्या रहती है कि वे पितृ पक्ष में संगम तक कैसे पहुंचें। ऐसे श्रद्धालुओं के लिए प्रयागराज के कुछ तीर्थ पुरोहितों ने ऑनलाइन पिंडदान और तर्पण की व्यवस्था शुरू की है।
इस व्यवस्था में श्रद्धालु वीडियो कॉल के माध्यम से अपने स्थान से धार्मिक प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। तीर्थ पुरोहित संगम पर श्रद्धालु के नाम और गोत्र के आधार पर तर्पण और पिंडदान की प्रक्रिया कराते हैं। श्रद्धालु अपने स्थान से पूजा में शामिल रहते हैं। तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में ऐसी व्यवस्था का इस्तेमाल दूसरे शहरों और विदेशों में रहने वाले लोगों ने भी किया है।
अमेरिका से भी ऑनलाइन जुड़ेगा श्रद्धालु
तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक इस बार विदेश में रहने वाले श्रद्धालु भी ऑनलाइन माध्यम से संगम पर होने वाले पितृ कर्म से जुड़ रहे हैं। अमेरिका में रहने वाला एक श्रद्धालु 28 सितंबर को ऑनलाइन माध्यम से प्रयागराज में पिंडदान कराने वाला है। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए एक विकल्प के तौर पर सामने आई है, जो दूरी या दूसरी परिस्थितियों के कारण स्वयं संगम नहीं पहुंच पा रहे हैं।
हालांकि ऑनलाइन पिंडदान को लेकर धार्मिक परंपराएं सभी परिवारों में एक जैसी नहीं हैं। इसलिए श्रद्धालु अपने परिवार की परंपरा और संबंधित तीर्थ पुरोहित की सलाह के अनुसार इस तरह की व्यवस्था अपनाते हैं।
प्रयागराज, काशी और गया का धार्मिक महत्व
तीर्थ पुरोहितों के अनुसार पितृ कर्म की परंपरा में प्रयागराज, काशी और गया को विशेष महत्व दिया जाता है। कई श्रद्धालु प्रयागराज से अपनी धार्मिक यात्रा शुरू करते हैं और इसके बाद काशी तथा गया में भी पिंडदान और अन्य कर्मकांड करते हैं। इसी वजह से पितृ पक्ष के दौरान इन तीर्थस्थलों पर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है।
प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम को धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। पितृ पक्ष में यहां स्नान, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।
तकनीक से जुड़ रही पुरानी परंपरा
संगम के घाट पर एक तरफ हजारों किलोमीटर का सफर तय करके पहुंचे श्रद्धालु अपने हाथों से पिंडदान और तर्पण कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ तकनीक के जरिए दूर बैठे लोग भी इस धार्मिक प्रक्रिया से जुड़ रहे हैं। ऑनलाइन व्यवस्था ने उन परिवारों के लिए एक माध्यम उपलब्ध कराया है, जो किसी वजह से पितृ पक्ष के दौरान प्रयागराज नहीं आ सकते।
इस तरह पितृ पक्ष में संगम की धार्मिक परंपरा का एक नया स्वरूप देखने को मिल रहा है। तरीका अलग हो सकता है, दूरी अलग हो सकती है, लेकिन अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की भावना श्रद्धालुओं के बीच समान दिखाई देती है।
नोट: ऑनलाइन पिंडदान की सुविधा कुछ तीर्थ पुरोहितों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है; इसे सभी धार्मिक परंपराओं में समान रूप से स्वीकार किया जाता हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
रिपोर्टर; गरिमा छाबड़ा, विशेष रिपोर्टर, विपणन प्रबंधक, जनसंपर्क प्रबंधक
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