भुवनेश्वर: ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (BJD) प्रमुख नवीन पटनायक ने MMDR एक्ट 2026 के खिलाफ अपना विरोध तेज कर दिया है। सोमवार को ओडिशा विधानसभा के बाहर आयोजित BJD के प्रदर्शन को संबोधित करते हुए पटनायक ने कहा कि वह राज्य के अधिकारों और संसाधनों से जुड़े इस मुद्दे पर अपनी आखिरी सांस तक लड़ेंगे। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस कानून के खिलाफ एकजुट होने की अपील भी की।
पटनायक ने कहा कि Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Act, 2026 ओडिशा की जमीन और खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकारों को प्रभावित करता है। उन्होंने इसे आने वाली पीढ़ियों, खासकर Gen Z के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि ओडिशा के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
‘राज्य के अधिकारों से जुड़ा है MMDR एक्ट’
BJD प्रमुख ने कहा कि MMDR संशोधन कानून कोई सामान्य कानून नहीं है, बल्कि यह राज्यों के अधिकारों से जुड़ा मामला है। उनके अनुसार, ओडिशा के खनिज संसाधनों और जमीन पर राज्य के लोगों का अधिकार है। उन्होंने संसद में कानून पारित होने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और ओडिशा के बीजेपी सांसदों की भूमिका को लेकर आलोचना की।
पटनायक ने आरोप लगाया कि संसद में विधेयक पारित होने के दौरान ओडिशा के बीजेपी सांसदों ने पर्याप्त विरोध नहीं किया। उन्होंने राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को दो बार पत्र लिखकर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने और MMDR एक्ट के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने की मांग की थी। पटनायक के मुताबिक, उन्हें इसका जवाब नहीं मिला।
विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग
नवीन पटनायक ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इस कानून के खिलाफ सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया था। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे ओडिशा के हितों को लेकर एक साथ आएं और कानून को राज्य में लागू नहीं होने देने के लिए संघर्ष करें।
इस बीच, MMDR संशोधन को लेकर ओडिशा विधानसभा में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव जारी है। BJD और कांग्रेस लगातार कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं और इसके चलते सदन की कार्यवाही कई बार प्रभावित हुई है। 28 सितंबर को भी विपक्षी सदस्यों के विरोध के बाद विधानसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
सरकार ने कहा- अभी वित्तीय असर का आकलन नहीं
MMDR संशोधन को लेकर विपक्ष जहां राज्य के राजस्व अधिकारों पर असर की बात कर रहा है, वहीं ओडिशा सरकार ने 25 सितंबर को विधानसभा में कहा था कि नए कानून के संभावित वित्तीय प्रभाव का अभी कोई अंतिम आकलन नहीं किया गया है।
राज्य के स्टील एंड माइंस मंत्री बिभूति भूषण जेना ने लिखित जवाब में कहा था कि संशोधित कानून की धारा 9D के तहत खनिज अधिकारों और खनिज वाली जमीन पर राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स, सेस या अन्य लेवी से जुड़े वित्तीय प्रभाव का आकलन कानून के लागू प्रावधानों और संबंधित नियमों के आधार पर किया जाएगा। सरकार ने यह भी कहा था कि इस समय संभावित राजस्व नुकसान का कोई अंतिम आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का भी जिक्र
इस विवाद की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट का जुलाई 2024 का फैसला भी महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने राज्यों की खनिज अधिकारों पर टैक्स लगाने की विधायी क्षमता को बरकरार रखा था। इसके बाद 2026 में MMDR कानून में किए गए संशोधनों को लेकर ओडिशा में राज्य के वित्तीय और संवैधानिक अधिकारों पर बहस तेज हुई।
नवीन पटनायक पहले भी इस संशोधन का विरोध कर चुके हैं। अगस्त में संसद से विधेयक पारित होने के बाद उन्होंने ओडिशा के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कानून के खिलाफ विशेष विधानसभा सत्र और सर्वदलीय रुख की मांग की थी। बाद में उन्होंने ओडिशा के बीजेपी सांसदों से भी संशोधन वापस कराने की दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया था।
‘आखिरी सांस तक लड़ूंगा’
भुवनेश्वर में सोमवार के प्रदर्शन के दौरान नवीन पटनायक ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वह ओडिशा के अधिकारों के लिए अपनी आखिरी सांस तक लड़ेंगे। उन्होंने राजनीतिक दलों और लोगों से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की।
MMDR संशोधन को लेकर अब ओडिशा में राजनीतिक विवाद और तेज होता दिख रहा है। BJD ने इस विरोध को जिला स्तर तक ले जाने की बात कही है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA ब्लॉक ने भी 29 सितंबर को भुवनेश्वर में प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया है।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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