गोरखपुर में पुलिसकर्मी और अधिवक्ता की मारपीट का वायरल वीडियो फर्जी निकला, व्यूज के लिए बनाई थी Reel
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के बीच सड़क पर मारपीट का वायरल वीडियो पुलिस जांच में फर्जी निकला है। शाहपुर थाना क्षेत्र से सामने आए इस वीडियो में एक युवक पुलिस की वर्दी पहने व्यक्ति को सड़क पर रोककर उसके साथ मारपीट करता और जूते से पीटता नजर आ रहा था। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
जांच में सामने आया कि वीडियो में दिखाई दे रहा वर्दीधारी व्यक्ति पुलिस विभाग का कर्मचारी नहीं है और अधिवक्ता के रूप में नजर आ रहा युवक भी वास्तविक वकील नहीं है। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर ज्यादा लाइक और व्यूज हासिल करने के उद्देश्य से पूरी घटना को कथित तौर पर स्क्रिप्ट के आधार पर तैयार किया गया था।
2 मिनट 55 सेकंड का था वायरल वीडियो
वायरल वीडियो करीब 2 मिनट 55 सेकंड का बताया जा रहा है। इसमें एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी पहनकर बाइक से जाता दिखाई देता है। तभी काली सदरी और सफेद शर्ट पहने एक युवक उसे सड़क पर रोकता है। दोनों के बीच कहासुनी होती है और इसके बाद युवक वर्दी पहने व्यक्ति के साथ मारपीट करने लगता है।
वीडियो में युवक पुलिसकर्मी पर अपने पिता को थाने ले जाने का आरोप लगाते हुए विवाद करता दिखाई देता है। इसके बाद मामला हाथापाई तक पहुंच जाता है। वर्दीधारी व्यक्ति को युवक जूते से पीटता हुआ भी नजर आता है। आसपास मौजूद कुछ लोग बीच-बचाव करते दिखाई देते हैं।
पुलिस जांच में सामने आई वीडियो की सच्चाई
वीडियो वायरल होने के बाद गोरखपुर पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और इसकी जांच शुरू की। पुलिस अधीक्षक (शहर) निमिष पाटिल ने बताया कि जांच में वीडियो फर्जी पाया गया।
पुलिस के मुताबिक, वीडियो में पुलिसकर्मी के रूप में दिखाई दे रहा व्यक्ति पुलिस विभाग से जुड़ा हुआ नहीं है। इसी तरह अधिवक्ता की ड्रेस में नजर आ रहा व्यक्ति भी वास्तविक अधिवक्ता नहीं है। दोनों ने कथित तौर पर किरदार निभाते हुए वीडियो तैयार किया था।
लाइक और व्यूज के लिए बनाया गया था वीडियो
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में यह बात सामने आई कि वीडियो सोशल मीडिया पर ज्यादा से ज्यादा लाइक और व्यूज हासिल करने के उद्देश्य से बनाया गया था। इसके लिए दोनों युवकों ने पुलिसकर्मी और अधिवक्ता की भूमिका निभाई और सड़क पर मारपीट का पूरा दृश्य रिकॉर्ड कराया।
वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के बाद लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। कई लोगों को लगा कि वास्तव में पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के बीच विवाद हुआ है।
दो युवकों को हिरासत में लिया गया
मामले में पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। पुलिस का कहना है कि वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करने के मामले में संबंधित धाराओं के तहत शाहपुर थाने में कार्रवाई की जा रही है।
एसपी सिटी निमिष पाटिल ने कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक तथ्यों के आधार पर अफवाह फैलाने और झूठे वीडियो बनाकर वायरल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि किसी वीडियो को बिना सत्यापन के सच मानकर आगे शेयर न करें।
पुलिस और अधिवक्ता समुदाय की छवि से जुड़ा मामला
पुलिस के मुताबिक, इस तरह के वीडियो से पुलिस और अधिवक्ता समुदाय की छवि को नुकसान पहुंच सकता है और सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैल सकती है। इसी वजह से पुलिस ने वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कर पूरे मामले का खुलासा किया।
गोरखपुर पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वीडियो को किस तरह तैयार किया गया और इसे सोशल मीडिया पर किन माध्यमों से प्रसारित किया गया। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी।

