CM Omar Abdullah का बड़ा कदम, J&K विधानसभा में पूर्ण राज्य के दर्जे का प्रस्ताव पास
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने सोमवार, 28 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित कर दिया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने यह प्रस्ताव सदन में पेश किया था। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जबकि बीजेपी विधायकों ने इसका विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया।
उमर अब्दुल्ला ने पेश किया प्रस्ताव
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 25 सितंबर को विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव पेश किया था। सोमवार को इस पर चर्चा के बाद इसे ध्वनिमत से पारित किया गया। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल और जल्द से जल्द बहाल करने की मांग की गई है।
प्रस्ताव में विधानसभा के 2000 और नवंबर 2024 के पहले के प्रस्तावों का भी संदर्भ दिया गया और इसे केंद्र सरकार को भेजने की बात कही गई है।
बीजेपी विधायकों ने किया विरोध
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बीजेपी विधायकों ने इसका विरोध किया। रिपोर्टों के मुताबिक बीजेपी सदस्यों ने प्रस्ताव में 5 अगस्त 2019 से पहले की स्थिति और विशेष दर्जे से जुड़े संदर्भों को लेकर आपत्ति जताई। मतदान से पहले बीजेपी विधायक सदन से बाहर चले गए।
विधानसभा की मौजूदा कार्यवाही के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक जम्मू-कश्मीर विधानसभा का छठा सत्र 21 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक निर्धारित है।
राज्य का दर्जा क्यों बना मुद्दा?
अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर की तत्कालीन संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव के बाद राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में पुनर्गठित किया गया था। अब निर्वाचित सरकार की ओर से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग विधानसभा के जरिए केंद्र के सामने रखी गई है।
बहस के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकार और निर्वाचित सरकार के कामकाज से जुड़ी है। उन्होंने केंद्र की ओर से पहले दिए गए आश्वासनों का भी उल्लेख किया।
विधानसभा में कई अहम विधेयक भी पेश
राज्य के दर्जे से जुड़े प्रस्ताव के अलावा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में कई सरकारी विधेयक भी पेश किए। इनमें Ease of Doing Business, GST, मंत्रियों और विधायकों के वेतन-भत्ते तथा पूर्व विधायकों की पेंशन से जुड़े कानूनों में संशोधन के प्रस्ताव शामिल हैं।
Ease of Doing Business से जुड़े प्रस्ताव का उद्देश्य अनुमति आधारित व्यवस्था से नियम आधारित प्रशासन की ओर बढ़ना, कारोबार और निवेश के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाना तथा रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
वेतन और पेंशन से जुड़े बदलाव भी प्रस्तावित
मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और मंत्रियों के राज्य स्तर के पदों के वेतन कानून, विधायकों के वेतन एवं भत्तों और पूर्व विधायकों की पेंशन से संबंधित कानूनों में संशोधन वाले विधेयक भी सदन में पेश किए। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर GST कानून में संशोधन का विधेयक भी लाया गया।
इस तरह 28 सितंबर को जम्मू-कश्मीर विधानसभा की कार्यवाही में राज्य के दर्जे की बहाली का प्रस्ताव और प्रशासन, कारोबार, कर व्यवस्था तथा विधायकों के वेतन-पेंशन से जुड़े विधायी प्रस्ताव प्रमुख मुद्दे रहे।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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