मुरादाबाद में तेंदुओं का खौफ बरकरार
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा और कांठ इलाके में तेंदुओं की दहशत लगातार बनी हुई है। वन विभाग के रेस्क्यू अभियान के तहत अब तक 26 तेंदुओं को पकड़ा जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद करीब 36 गांवों से तेंदुओं की मौजूदगी की खबरें सामने आ रही हैं। खेतों और आबादी के आसपास तेंदुए दिखाई देने से ग्रामीणों में डर का माहौल है।
बहापुर बलिया में 26वां तेंदुआ पिंजरे में कैद
8 अक्टूबर को ठाकुरद्वारा क्षेत्र के बहापुर बलिया गांव में वन विभाग ने 26वें तेंदुए को पिंजरे में कैद किया। यह वही इलाका है, जहां तेंदुए के हमलों में तीन लोगों की जान जा चुकी है। तेंदुए के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस जरूर ली, लेकिन इलाके में दूसरे तेंदुओं की मौजूदगी की आशंका के चलते खतरा पूरी तरह खत्म नहीं माना जा रहा है।
बहापुर बलिया में पहले भी तेंदुओं की गतिविधियां सामने आती रही हैं। खेतों में काम करने वाले ग्रामीणों को लगातार सतर्क रहने की जरूरत पड़ रही है। आसपास के इलाकों में भी तेंदुओं के देखे जाने की खबरें सामने आ रही हैं।
एक गांव में तीन लोगों की मौत
तेंदुओं के हमलों से जुड़ी घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 19 अगस्त को विरमो देवी पर तेंदुए ने हमला किया था, जिसमें उनकी मौत हो गई। इसके बाद 25 अगस्त को मिथलेश देवी पर हमला हुआ और 29 अगस्त को घर के पास सो रहे जगराज सैनी को तेंदुआ उठा ले गया। बाद में उनका शव गन्ने के खेत में मिला।
इससे बहापुर बलिया गांव में तेंदुए के हमलों से तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इससे पहले 3 अगस्त को लालापुर पीपलसाना में संतोष देवी की तेंदुए के हमले में मौत हुई थी। इस तरह मुरादाबाद में तेंदुए के हमलों से चार लोगों की मौत की बात सामने आई है।
3 अगस्त से चल रहा रेस्क्यू अभियान
मुरादाबाद में तेंदुओं को पकड़ने के लिए 3 अगस्त से विशेष रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान लगातार तेंदुओं को पिंजरों में कैद किया गया। 4 सितंबर तक 12 तेंदुए पकड़े जा चुके थे, जबकि 17 सितंबर तक यह संख्या 16 पहुंच गई थी। इसके बाद भी अलग-अलग गांवों से तेंदुओं की मौजूदगी की सूचनाएं आती रहीं और रेस्क्यू अभियान लगातार जारी रहा।
8 अक्टूबर को 26वें तेंदुए के पकड़े जाने के साथ ही अभियान में अब तक पकड़े गए तेंदुओं की संख्या 26 हो गई है।
46 पिंजरे, कैमरा ट्रैप और ड्रोन से निगरानी
वन विभाग ने तेंदुओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इलाके में 46 पिंजरे लगाए हैं। इसके साथ ही कैमरा ट्रैप के जरिए तेंदुओं की आवाजाही वाले रास्तों की पहचान की जा रही है। गन्ने के खेतों में ड्रोन से निगरानी की जा रही है और रात के समय थर्मल इमेजिंग ड्रोन की मदद भी ली जा रही है।
जरूरत के अनुसार विशेष रेस्क्यू टीम और ट्रैंक्विलाइजिंग विशेषज्ञों की मदद लेकर तेंदुओं को सुरक्षित तरीके से पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
दूसरे इलाकों में भी दिख रहे तेंदुए
कांठ और आसपास के इलाकों में भी तेंदुओं की मौजूदगी लगातार सामने आ रही है। हाल में कांठ के चेतरामपुर रोड के पास खेतों में दो तेंदुए दिखाई देने की सूचना मिली। वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और खेतों में अकेले या निहत्थे न जाने की सलाह दी है। बच्चों और महिलाओं को खेतों या जंगल की ओर अकेले भेजने से बचने को कहा गया है।
इससे पहले भी भरतपुर, समदगढ़ उर्फ सिकंदराबाद और आसपास के गांवों में तेंदुओं को देखे जाने की खबरें सामने आई थीं। कुछ स्थानों पर एक से अधिक तेंदुओं की मौजूदगी की बात ग्रामीणों ने बताई थी।
26 तेंदुए पकड़े जाने के बाद भी क्यों नहीं खत्म हुआ डर?
वन विभाग की कार्रवाई के बावजूद ग्रामीणों का डर इसलिए खत्म नहीं हो रहा, क्योंकि कई गांवों से अब भी तेंदुओं की मौजूदगी की सूचना मिल रही है। गन्ने के खेत तेंदुओं के छिपने के लिए अनुकूल जगह बन रहे हैं और खेतों में काम करने वाले किसानों को हर समय सतर्क रहना पड़ रहा है।
एक ओर वन विभाग लगातार पिंजरे लगा रहा है और ड्रोन व कैमरा ट्रैप से निगरानी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को उम्मीद है कि अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक प्रभावित इलाकों में तेंदुओं की गतिविधियां पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो जातीं।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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