बिलासपुर: शासन ने कहा- नियमों के तहत की जा रही भर्ती।हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने PSC की ओर से राज्य वन सेवा भर्ती के सहायक वन संरक्षक व वन क्षेत्रपाल के 211 पदों की भर्ती परीक्षा के परिणाम पर रोक को बरकरार रखा है। गुरुवार को इस केस में शाम पांच बजे तक दोनों पक्षों की बहस चली। चीफ जस्टिस अरूप कुमार गोस्वामी की डिवीजन बेंच ने समय से आधे घंटे देर तक सुनवाई की। अब केस की अगली सुनवाई चार अगस्त होगी।याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि छत्तीसगढ़ वन सेवा ( संयुक्त ) भर्ती परीक्षा नियम 2014 में आयोग ने उनके भर्ती नियम में विसंगति को दूर नहीं किया है। इसके बावजूद लिखित परीक्षा भी ले ली गई है। याचिका के जवाब में राज्य शासन की तरफ से शासन की ओर से जवाब प्रस्तुत कर दिया गया है। शासन ने भर्ती नियम को सही ठहराया है और बताया कि PSC के माध्यम से भर्ती की जा रही है। वहीं, याचिकाकर्ताओं की तरफ मतीन सिद्धिकी ने पक्ष रखा। गुरुवार को हाईकोर्ट में तय समय 4.30 बजे के बाद भी केस में सुनवाई चलती रही। चीफ जस्टिस अरूप कुमार गोस्वामी और जस्टिस पीपी साहू ने शाम पांच तक सुनवाई की। इसके बाद परीक्षा परिणाम में रोक को यथावत रखते हुए केस को चार अगस्त तक बढ़ा दिया है।वानिकी के स्टूडेंट्स ने भर्ती में प्राथमिकता नहीं देने पर लगाई है याचिकाCG PSC ने वर्ष 2020 में छत्तीसगढ़ वन सेवा ( संयुक्त ) भर्ती परीक्षा नियम 2014 के तहत सहायक वन संरक्षक (ACF) और वन क्षेत्रपाल (रेंजर) के 211 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। इस भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देते हुए राहुल यादव व अन्य ने वकील मतीन सिद्दिकी, नरेंद्र मेहर व घनश्याम कश्यप के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें बताया गया है कि याचिकाकर्ता राहुल व अन्य ने वानिकी में स्नातक व MSC की डिग्री हासिल की है। लिहाजा, वानिकी विषय के प्रतियोगियों को इन पदों पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसी तरह परीक्षा पाठ्यक्रम प्रश्नपत्र-2 में भी 50 फीसदी प्रश्न वानिकी संकाय से लिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने पूर्व में राज्य लोक सेवा आयोग के समक्ष इस संबंध में आवेदनपत्र भी प्रस्तुत किया था। लेकिन, आयोग ने उनके आवेदनपत्र को दरकिनार कर दिया।

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