कौशल किशोर को राज्यसभा टिकट नहीं मिला तो बेटे के बागी तेवर, BJP छोड़ने के संकेत से बढ़ी हलचल
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 8 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। पार्टी की सूची में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्याशंकर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को जगह मिली है। हालांकि पूर्व केंद्रीय मंत्री और मोहनलालगंज से सांसद रहे कौशल किशोर का नाम सूची में नहीं है।
बीजेपी की ओर से उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद कौशल किशोर के परिवार की नाराजगी खुलकर सामने आई है। उनके बेटे और बीजेपी अनुसूचित मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष विकास किशोर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए। उनकी पोस्ट के बाद कौशल किशोर के बीजेपी छोड़ने की अटकलें भी तेज हो गई हैं।
बेटे विकास किशोर ने जताई नाराजगी
बीजेपी की राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची जारी होने के तुरंत बाद विकास किशोर ने फेसबुक पर लिखा कि जिस परिवार में मां-बाप का मान और सम्मान नहीं होता, उस परिवार में नहीं रहना चाहिए। पोस्ट के अंत में उन्होंने ‘जय अंबेडकर, जय संविधान, जय परख’ लिखा।
विकास किशोर की इस पोस्ट को उनके पिता कौशल किशोर को राज्यसभा टिकट नहीं मिलने से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने अपनी पोस्ट में सीधे तौर पर यह नहीं कहा कि वह या उनके पिता बीजेपी छोड़ने जा रहे हैं।
कौशल किशोर को टिकट मिलने की थी चर्चा
राज्यसभा चुनाव से पहले कौशल किशोर का नाम संभावित उम्मीदवारों में चर्चा में था। बीजेपी की ओर से उम्मीदवारों के लिए जो पैनल तैयार किया गया था, उसमें भी उनका नाम शामिल था। लेकिन अंतिम सूची में पार्टी ने उन्हें जगह नहीं दी।
कौशल किशोर मोहनलालगंज लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं और केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। अवध क्षेत्र की राजनीति में उनका प्रभाव माना जाता है।
अब राज्यसभा टिकट से उनका नाम बाहर होने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
लखनऊ में सम्मेलन के बाद बढ़ी थीं चर्चाएं
कौशल किशोर ने हाल के दिनों में लखनऊ में एक सम्मेलन आयोजित किया था। इस दौरान उन्होंने कई मुद्दे उठाए थे, जिन्हें पार्टी और सरकार की कार्यशैली से जोड़कर देखा गया था।
उन्होंने जनता और बीजेपी कार्यकर्ताओं की समस्याओं को लेकर अपनी बात रखी थी। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हुई थी कि उनके तेवर पार्टी नेतृत्व को असहज कर सकते हैं।
हालांकि कौशल किशोर ने उस समय भी यह स्पष्ट किया था कि उनका उद्देश्य किसी पद के पीछे भागना नहीं है। उनका कहना था कि वह जनता और कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सामने रखने का काम करते हैं।
‘जनता की बात करना गलत है तो…’
कौशल किशोर ने अपने हालिया रुख में कहा था कि उनका मकसद किसी पद की मांग करना नहीं है। वह जनता और कार्यकर्ताओं की आवाज उठाते हैं और अगर जनता की समस्याओं को सामने रखना गलत है तो उन्हें इसकी कीमत चुकाने में भी आपत्ति नहीं है।
इसी बीच बीजेपी की राज्यसभा सूची में उनका नाम नहीं आने के बाद उनके परिवार की ओर से आई प्रतिक्रिया ने राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है।
BJP ने नए चेहरों पर जताया भरोसा
बीजेपी ने यूपी की 10 राज्यसभा सीटों में से अपने हिस्से की 8 सीटों के लिए नए चेहरों और संगठन से जुड़े नेताओं को प्राथमिकता दी है। पार्टी की सूची में तीन OBC, दो SC और तीन सामान्य वर्ग के उम्मीदवार शामिल हैं। दो महिला उम्मीदवारों को भी टिकट दिया गया है।
पार्टी ने मौजूदा कई सांसदों को दोबारा मौका नहीं दिया। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा भी शामिल हैं। नीरज शेखर, बृजलाल और गीता शाक्य समेत कई अन्य मौजूदा चेहरों का नाम भी सूची में नहीं है।
अब नजर कौशल किशोर के अगले कदम पर
कौशल किशोर के राज्यसभा टिकट से बाहर होने और उनके बेटे विकास किशोर की सोशल मीडिया पोस्ट के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि अभी तक कौशल किशोर की ओर से बीजेपी छोड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या वह पार्टी के फैसले को स्वीकार कर बीजेपी में बने रहेंगे या फिर आने वाले दिनों में कोई बड़ा राजनीतिक फैसला लेंगे। फिलहाल उनकी ओर से किसी अंतिम निर्णय का इंतजार है।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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