महाराष्ट्र MLC चुनाव में BJP बनाम शिवसेना, पुणे शिक्षक सीट पर मंगेश चिवटे ने भरा नामांकन
महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कौस्तुभ गावड़े को उम्मीदवार बनाया है, जबकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के करीबी माने जाने वाले मंगेश चिवटे को शिवसेना ने मैदान में उतार दिया है। मंगलवार को चिवटे ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया, जिससे इस सीट पर BJP और शिवसेना के बीच सीधा मुकाबला बनने की स्थिति साफ हो गई है।
पुणे शिक्षक सीट पर महायुति आमने-सामने
महाराष्ट्र विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर महायुति में पहले से ही चर्चा चल रही थी। पुणे शिक्षक सीट पर BJP और शिवसेना दोनों की दावेदारी थी। आखिरकार BJP ने कौस्तुभ गावड़े को उम्मीदवार घोषित कर दिया।
इसके बाद शिवसेना ने भी पीछे हटने के बजाय मंगेश चिवटे को आधिकारिक उम्मीदवार बनाने का फैसला किया। उन्हें पार्टी की ओर से AB फॉर्म भी दिया गया है।
मंगेश चिवटे को एकनाथ शिंदे का करीबी माना जाता है और वह उनके OSD के तौर पर काम कर चुके हैं। चिवटे लंबे समय से पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। ऐसे में BJP के उम्मीदवार घोषित होने के बावजूद उनका मैदान में उतरना महायुति के भीतर राजनीतिक टकराव का संकेत माना जा रहा है।
BJP के कौस्तुभ गावड़े पहले ही मैदान में
BJP ने पुणे शिक्षक सीट से कौस्तुभ गावड़े को उम्मीदवार बनाया है। गावड़े कोल्हापुर स्थित श्री विवेकानंद शिक्षण संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं और शिक्षक समुदाय के बीच उनकी पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।
BJP ने पुणे शिक्षक सीट के साथ पुणे स्नातक और नागपुर स्नातक सीट के लिए भी अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं। पुणे स्नातक से डॉ. स्मिता जाधव और नागपुर स्नातक से सुधाकर कोहले को टिकट दिया गया है।
एकनाथ शिंदे के करीबी हैं मंगेश चिवटे
मंगेश चिवटे की उम्मीदवारी को लेकर इसलिए भी चर्चा है क्योंकि वह एकनाथ शिंदे के करीबी माने जाते हैं। शिवसेना की ओर से उन्हें चुनाव मैदान में उतारने के फैसले से साफ है कि पार्टी पुणे शिक्षक सीट को लेकर अपनी दावेदारी छोड़ने के मूड में नहीं है।
महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने भी संकेत दिया था कि BJP ने किसे उम्मीदवार बनाया है, यह BJP का आंतरिक मामला है और शिवसेना अपनी ओर से पुणे शिक्षक सीट पर चुनाव लड़ेगी।
नागपुर में भी BJP के सामने बगावत का संकट
महायुति में सिर्फ पुणे शिक्षक सीट ही विवाद का कारण नहीं है। नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी BJP को अपने ही नेता की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी ने यहां सुधाकर कोहले को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है, जबकि BJP के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधान परिषद सदस्य अनिल सोले ने निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है।
हालांकि महाराष्ट्र BJP अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने अनिल सोले को बागी मानने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि सोले पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें समझाने की कोशिश की जाएगी। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि महायुति के उम्मीदवार सुधाकर कोहले चुनाव में जीत हासिल करेंगे।
पुणे स्नातक सीट पर भी खींचतान
पुणे स्नातक सीट पर भी महायुति के भीतर मतभेद सामने आए हैं। BJP ने डॉ. स्मिता जाधव को उम्मीदवार बनाया है, जबकि शिवसेना की ओर से उद्योग मंत्री उदय सामंत के करीबी सचिन सानप ने नामांकन दाखिल किया है।
इस तरह पुणे के शिक्षक और स्नातक दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में महायुति के घटक दलों के नेताओं के अलग-अलग उम्मीदवार मैदान में उतरने से गठबंधन के सामने चुनौती बढ़ गई है।
क्या ‘नाशिक पैटर्न’ दोहराएगा?
पुणे शिक्षक सीट पर BJP और शिवसेना के बीच मुकाबले को महाराष्ट्र की हालिया विधान परिषद राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। महाराष्ट्र टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, महायुति के भीतर कुछ नेता इसे पिछले नाशिक घटनाक्रम के जवाब के तौर पर भी देख रहे हैं, जहां BJP के बागी उम्मीदवार गोकुल गिते ने महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को हराया था।
अब सवाल यह है कि क्या पुणे शिक्षक सीट पर भी गठबंधन के वोटों का बंटवारा BJP या शिवसेना के लिए नुकसानदेह साबित होगा।
पांच सीटों पर होना है चुनाव
महाराष्ट्र विधान परिषद के इस चुनाव में दो शिक्षक और तीन स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव होना है। महायुति में सीट बंटवारे के तहत BJP को पुणे स्नातक, नागपुर स्नातक और पुणे शिक्षक सीट मिली थी, जबकि अमरावती शिक्षक सीट शिवसेना और औरंगाबाद स्नातक सीट अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के हिस्से में गई थी।
पुणे शिक्षक सीट पर अब BJP के कौस्तुभ गावड़े और शिवसेना के मंगेश चिवटे के मैदान में उतरने के बाद महायुति के सामने सबसे बड़ी चुनौती गठबंधन के भीतर संभावित वोट विभाजन को रोकना है। नामांकन वापसी की समयसीमा के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
सत्य, न्याय और राष्ट्रहित की निर्भीक आवाज़
Rustam-E-Hind Hindi Daily Newspaper
https://l1nq.com/zvf3zgb
सब्स्क्राइब करें।


