यूपी की 100 विधानसभा सीटों पर डुप्लीकेट वोटर मिलने का सपा का दावा, चुनाव आयोग से जांच की मांग
लखनऊ: देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने प्रदेश की 100 विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की जांच में हजारों डुप्लीकेट मतदाता मिलने का दावा किया है। पार्टी ने इस संबंध में मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच कराने और गलत प्रविष्टियों को नियमानुसार हटाने की मांग की है।
सपा का आरोप है कि कई मतदान केंद्रों पर एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग मतदाता पहचान पत्र यानी EPIC नंबर के साथ कई बार दर्ज है। पार्टी ने विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की बूथ स्तर पर जांच कराने की मांग की है। हालांकि, डुप्लीकेट नामों को लेकर किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि और निर्वाचन अधिकारियों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपा ज्ञापन
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल की ओर से के.के. श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चन्द्र सिंह यादव और राधेश्याम सिंह शामिल थे।
पार्टी ने ज्ञापन में उन मतदान केंद्रों का विवरण दिया, जहां कथित तौर पर एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग EPIC नंबर के साथ एक से अधिक बार दर्ज है। सपा ने निर्वाचन अधिकारियों से इन प्रविष्टियों का भौतिक सत्यापन कराने और जांच में गलत पाए जाने वाले नामों को नियमानुसार हटाने की मांग की है।
इटावा और कन्नौज के बूथों का दिया उदाहरण
सपा ने अपने ज्ञापन में कई विधानसभा क्षेत्रों के उदाहरण पेश किए हैं। पार्टी के मुताबिक, कन्नौज जिले की छिबरामऊ विधानसभा सीट के बूथ संख्या 49 पर एक महिला का नाम तीन अलग-अलग EPIC नंबर के साथ दर्ज मिला।
इसी तरह इटावा जिले के बूथ संख्या 9 और 10 पर एक 18 वर्षीय युवती का नाम तीन बार अलग-अलग मतदाता पहचान संख्या के साथ दर्ज होने का दावा किया गया है। पार्टी ने श्रावस्ती विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए भी एक मतदाता का नाम चार अलग-अलग EPIC नंबर के साथ दर्ज होने की बात कही है।
सपा का कहना है कि इस तरह की कथित प्रविष्टियां प्रदेश की अन्य विधानसभा सीटों में भी मिली हैं। पार्टी ने इन मामलों की जांच कर मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने की मांग की है।
SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का उद्देश्य मतदाता सूचियों को अद्यतन करना और उनमें मौजूद त्रुटियों को दूर करना है। इसी प्रक्रिया को लेकर सपा ने सवाल उठाए हैं।
पार्टी का कहना है कि SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कई मतदान केंद्रों पर कथित तौर पर एक ही व्यक्ति के नाम की कई प्रविष्टियां मौजूद हैं। ऐसे में निर्वाचन आयोग को इनकी जांच करानी चाहिए, ताकि चुनाव से पहले मतदाता सूचियों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
सपा ने मांग की है कि केवल शिकायतों के आधार पर नाम हटाने के बजाय प्रत्येक संदिग्ध प्रविष्टि का सत्यापन किया जाए और नियमों के मुताबिक कार्रवाई हो।
अखिलेश यादव ने भी उठाया मतदाता सूची का मुद्दा
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम एक से अधिक बार दर्ज हैं और SIR प्रक्रिया के बावजूद ऐसी प्रविष्टियां सामने आ रही हैं।
अखिलेश यादव ने आजमगढ़ सदर विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए विकास यादव नाम के एक व्यक्ति की दस प्रविष्टियां होने का दावा भी किया। उन्होंने निर्वाचन आयोग से मतदाता सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
ये आरोप समाजवादी पार्टी की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि या निर्वाचन आयोग की ओर से अंतिम निष्कर्ष सामने आने तक इन्हें प्रमाणित अनियमितता नहीं माना जा सकता।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूचियों का मुद्दा राजनीतिक रूप से अहम होता जा रहा है। सपा ने प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर बूथ स्तर पर जांच कराने की मांग की है।
अब इस मामले में निर्वाचन अधिकारियों की जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। यदि किसी मतदाता का नाम गलती से कई स्थानों पर दर्ज पाया जाता है, तो उसका निस्तारण निर्धारित चुनावी नियमों के अनुसार किया जाना होगा।
फिलहाल, समाजवादी पार्टी ने अपने दावों के समर्थन में ज्ञापन और बूथवार उदाहरण सौंपे हैं। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और आधिकारिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।

