पंजाब में सियासी पारा चढ़ा: CM भगवंत मान का अकाली दल पर बड़ा हमला, BJP गठबंधन को लेकर साधा निशाना
अमृतसर, 26 अगस्त 2026। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को अमृतसर के चविंडा देवी में आयोजित ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम के दौरान शिरोमणि अकाली दल (SAD) पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अकाली दल का नेतृत्व दोबारा सत्ता में वापसी के लिए BJP के साथ गठबंधन करने को बेताब है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता ऐसे राजनीतिक समीकरणों को स्वीकार नहीं करेगी।
BJP से गठबंधन की कोशिश का लगाया आरोप
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि अकाली दल के नेता सत्ता में लौटने के लिए BJP के साथ हाथ मिलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह गठजोड़ पंजाब को फिर उसी पुराने राजनीतिक दौर में ले जाने का प्रयास है।
मान ने कहा कि पंजाब की जनता पिछली सरकारों के कार्यकाल और उस दौरान सामने आए विभिन्न मुद्दों को भूली नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने सत्ता में आने के बाद जनता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी है।
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। विभिन्न राजनीतिक दल संभावित गठबंधनों, संगठन को मजबूत करने और मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
‘पुरानी राजनीति को पंजाब की जनता ने नकारा’
भगवंत मान ने अपने संबोधन में पिछली सरकारों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में लंबे समय तक राजनीति का आधार डर, दबाव और FIR की राजनीति रहा। इसके विपरीत उन्होंने अपनी सरकार को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और विकास पर केंद्रित सरकार बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद पंजाब में कई क्षेत्रों में बदलाव किए गए हैं। उन्होंने बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।
मान ने दावा किया कि उनकी सरकार ने युवाओं को रोजगार देने की दिशा में भी काम किया है और अब तक 70 हजार सरकारी नौकरियां मेरिट के आधार पर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को प्राथमिकता दी गई है।
नशे के मुद्दे पर भी अकाली दल को घेरा
पंजाब की राजनीति में नशे का मुद्दा लंबे समय से प्रमुख रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मुद्दे पर भी पिछली सरकारों को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने शासन के दौरान नशे का कारोबार गंभीर समस्या बन गया था।
मान ने कहा कि उनकी सरकार ने नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई तेज की है और तस्करी में शामिल लोगों को कानून के मुताबिक जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस और अकाली दल पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि दोनों दल लंबे समय तक राज्य की राजनीति में प्रभावशाली रहे, लेकिन पंजाब की कई समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य पंजाब को नशामुक्त और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाना है।
शिक्षा और सरकारी स्कूलों का किया जिक्र
भगवंत मान ने पंजाब के सरकारी स्कूलों में किए गए सुधारों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी अब JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफलता हासिल कर रहे हैं। उन्होंने इसे राज्य की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलाव का संकेत बताया।
मान ने कहा कि शिक्षा किसी भी राज्य के भविष्य की नींव होती है और उनकी सरकार सरकारी स्कूलों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
2027 चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। आम आदमी पार्टी जहां अपनी सरकार के कामकाज और योजनाओं को जनता के सामने रख रही है, वहीं विपक्षी दल सरकार की नीतियों और कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं।
BJP और अकाली दल के बीच संभावित राजनीतिक समीकरणों की चर्चा भी पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री भगवंत मान का अकाली दल पर हमला राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
मान लगातार विपक्षी दलों पर हमला करते हुए अपनी सरकार के कामकाज को जनता के सामने रखने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले महीनों में पंजाब की राजनीति में गठबंधन, किसान, रोजगार, नशा और विकास जैसे मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में रह सकते हैं।
सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल भी बनी चुनौती
इसी बीच पंजाब सरकार के सामने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की 27 अगस्त को प्रस्तावित राज्यव्यापी हड़ताल भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। कर्मचारी संगठन लंबित DA एरियर, पुरानी पेंशन योजना समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों की मांग है कि सरकार उनकी लंबित मांगों पर जल्द फैसला करे। रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री भगवंत मान कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर सकते हैं।
यदि हड़ताल होती है तो इसका असर सरकारी कार्यालयों के साथ-साथ कुछ आवश्यक सेवाओं पर भी पड़ सकता है। सरकारी अस्पतालों की OPD और OOAT क्लीनिक सेवाएं प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।
पंजाब सरकार के सामने दोहरी चुनौती
एक तरफ मुख्यमंत्री भगवंत मान विपक्षी दलों पर राजनीतिक हमला कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कर्मचारी संगठनों की नाराजगी सरकार के लिए प्रशासनिक चुनौती बनी हुई है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सरकार के लिए अपने कामकाज को जनता तक पहुंचाना और कर्मचारी संगठनों की मांगों को संभालना दोनों महत्वपूर्ण होंगे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि पंजाब में विकास और जनकल्याण के काम लगातार जारी हैं। वहीं विपक्षी दल सरकार के दावों पर सवाल उठाते रहे हैं।
निष्कर्ष
पंजाब में CM भगवंत मान और अकाली दल के बीच सियासी टकराव लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है। BJP के साथ संभावित गठबंधन को लेकर मुख्यमंत्री के आरोपों ने राज्य की राजनीतिक बहस को और गर्म कर दिया है। दूसरी ओर सरकारी कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल ने सरकार के सामने एक अलग चुनौती खड़ी कर दी है।
2027 पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की राजनीति, नशा, रोजगार, शिक्षा और सरकारी कर्मचारियों की मांगें आने वाले समय में चुनावी मुद्दों को प्रभावित कर सकती हैं।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा

