काठमांडू में फंसे भारतीयों की बढ़ती पीड़ा, आखिर कब होगी सुरक्षित घर वापसी?
काठमांडू में फंसे भारतीयों की बढ़ती पीड़ा: आखिर कब होगी सुरक्षित घर वापसी?
नेपाल महाविनाश के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रियों की मुश्किलें बरकरार, अतिरिक्त उड़ानों और प्रभावी निकासी व्यवस्था की मांग तेज
काठमांडू संवाददाता — शिषेन्तर थापा
काठमांडू, 30 अगस्त 2026। नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। नेपाल-चीन सीमा से लगे क्षेत्रों में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस संकट के बीच बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के भी नेपाल में फंसे होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु, पर्यटक और अन्य भारतीय नागरिक शामिल हैं। अपने परिजनों के फंसे होने की खबर से भारत में परिवारों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
कैलाश मानसरोवर की धार्मिक यात्रा पर नेपाल के रास्ते गए अनेक भारतीयों के लिए यह यात्रा अचानक मुश्किल हालात में बदल गई। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को आस्था और विश्वास के साथ तीर्थयात्रा पर भेजा था, वे अब उनके सुरक्षित लौटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। नेपाल के रासुवा क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा का असर उन यात्रियों पर भी पड़ा है, जो कैलाश मानसरोवर मार्ग से आवाजाही कर रहे थे।
आपदा के बाद कई स्थानों पर सड़क और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है। इससे यात्रियों की आवाजाही और सुरक्षित वापसी चुनौतीपूर्ण हो गई है। ऐसे में काठमांडू में फंसे भारतीय यात्रियों और उनके परिजनों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी सुरक्षित घर वापसी कब और किस तरह सुनिश्चित होगी।
परिजनों की बेचैनी बढ़ी
दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में कई परिवार अपने परिजनों से संपर्क स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। यशवंत व्यास भी उन लोगों में शामिल हैं, जिनका एक रिश्तेदार काठमांडू में फंसा हुआ है। उनके साथ अन्य भारतीय नागरिकों के फंसे होने की जानकारी ने परिवार की चिंता और बढ़ा दी है।
परिजनों का कहना है कि आपदा की स्थिति में केवल सामान्य सूचनाएं पर्याप्त नहीं हैं। उन्हें अपने परिजनों की वास्तविक स्थिति, उनके ठहरने की सुरक्षित व्यवस्था और भारत वापसी के लिए स्पष्ट निकासी योजना की जानकारी चाहिए।
कई परिवारों की चिंता इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि प्राकृतिक आपदा के कारण सामान्य परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है। ऐसे में वे सरकार से लगातार प्रभावी राहत और निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की उम्मीद कर रहे हैं।
अतिरिक्त उड़ानों की मांग तेज
आपदा के बाद यात्रियों की सामान्य आवाजाही प्रभावित होने के कारण भारत लौटने की प्रक्रिया कठिन हो सकती है। ऐसे में काठमांडू में फंसे भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द निकालने के लिए विशेष अथवा अतिरिक्त उड़ानों की व्यवस्था किए जाने की मांग उठ रही है।
काठमांडू हवाई अड्डे से उपलब्ध उड़ानों की क्षमता सीमित होने की स्थिति में विशेष उड़ानों के संचालन, भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय तथा संकटग्रस्त यात्रियों को प्राथमिकता के आधार पर वापस लाने की आवश्यकता है।
यह केवल यात्रियों की सुविधा का मामला नहीं है। हजारों किलोमीटर दूर आपदा के बीच फंसे लोगों के परिवारों के लिए यह उनके प्रियजनों की सुरक्षा और मानसिक शांति का सवाल है।
भारत सरकार ने बनाया नियंत्रण कक्ष
नेपाल में प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से 24 घंटे चलने वाला विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाने की जानकारी दी गई है। प्रभावित लोग फोन, व्हाट्सऐप और ई-मेल के माध्यम से सहायता प्राप्त करने के लिए संपर्क कर सकते हैं।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास की ओर से भी आपदा प्रभावित भारतीय नागरिकों के लिए आपातकालीन संपर्क नंबर उपलब्ध कराए गए हैं:
+977 985 131 6807
+977 970 910 7500
+977 981 032 6117
इन नंबरों पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है।
हालांकि, काठमांडू में मौजूद यात्रियों और भारत में उनके परिजनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घोषित सहायता व्यवस्था का लाभ जमीनी स्तर पर प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक कितनी जल्दी पहुंचता है। संकट की स्थिति में सही जानकारी, सुरक्षित ठहरने की व्यवस्था, भोजन, चिकित्सा सहायता और भारत वापसी की व्यवस्था को प्राथमिकता देना जरूरी है।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था की मांग
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए यात्रियों की स्थिति को देखते हुए विशेष निकासी व्यवस्था की मांग भी तेज हो रही है। नेपाल के रास्ते यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए खराब मौसम और मार्ग अवरुद्ध होने जैसी परिस्थितियां पहले से ही चुनौती पैदा कर सकती हैं, लेकिन मौजूदा आपदा सामान्य मौसम संबंधी देरी से कहीं अधिक गंभीर स्थिति है।
ऐसे समय में यात्रियों की पहचान कर उनकी सुरक्षित लोकेशन की जानकारी जुटाना, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ठहराना, भोजन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा परिवारों से संपर्क बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
इसके साथ ही भारत वापसी के लिए विशेष परिवहन और उड़ानों की व्यवस्था किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है। संकट में फंसे यात्रियों के लिए एक स्पष्ट और समन्वित निकासी योजना उनके परिवारों की चिंता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
परिवारों को चाहिए स्पष्ट जानकारी
प्राकृतिक आपदा के बीच सबसे बड़ी समस्या अनिश्चितता होती है। जिन परिवारों के सदस्य नेपाल में फंसे हैं, वे लगातार यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके परिजन कहां हैं, किस स्थिति में हैं और उन्हें कब सुरक्षित भारत लाया जाएगा।
ऐसे में प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से समय-समय पर स्पष्ट एवं सत्यापित जानकारी साझा किया जाना जरूरी है। यात्रियों की सूची, उनकी लोकेशन, संपर्क स्थिति और निकासी की संभावित योजना के बारे में जानकारी मिलने से परिवारों को राहत मिल सकती है।
सुरक्षित घर वापसी सबसे बड़ी प्राथमिकता
नेपाल में प्राकृतिक आपदा के बाद फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित घर वापसी अब सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है। खासकर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं के मामले में भारत और नेपाल के संबंधित अधिकारियों के बीच लगातार समन्वय की जरूरत है।
विशेष उड़ानों, सुरक्षित परिवहन, राहत शिविरों, चिकित्सा सहायता और हेल्पलाइन व्यवस्था को एक साथ मजबूत किया जाना जरूरी है, ताकि किसी भी प्रभावित भारतीय नागरिक को सहायता के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।
परिजनों की मांग स्पष्ट है—उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अपने प्रियजनों की सुरक्षित वापसी की ठोस व्यवस्था चाहिए। संकट की इस घड़ी में प्रभावी निकासी अभियान और बेहतर समन्वय ही उन परिवारों की चिंता को कम कर सकता है, जो नेपाल में फंसे अपने लोगों की घर वापसी का इंतजार कर रहे हैं।

