Jeevan Ya Bheema Con Review: अरशद वारसी की फिल्म का कॉमेडी-क्राइम कॉकटेल कितना दमदार?
फिल्म: Jeevan Ya Bheema Con
कलाकार: अरशद वारसी, संजीदा शेख और अन्य
जॉनर: कॉमेडी-क्राइम
रिव्यू: मनोरंजन
इंश्योरेंस का पैसा चाहिए, तो पहले अपनी मौत का नाटक करो! सुनने में आइडिया जितना मजेदार लगता है, उतना ही पागलपन भरा भी है. इसी अजीबोगरीब कॉन्सेप्ट के इर्द-गिर्द घूमती है अरशद वारसी की फिल्म Jeevan Ya Bheema Con. फिल्म एक ऐसे शख्स की कहानी लेकर आती है, जो इंश्योरेंस की रकम हासिल करने के लिए अपनी मौत की झूठी कहानी रचता है. लेकिन उसकी यह चाल जल्द ही ऐसी उलझनों को जन्म देती है, जिसकी उसने शायद कल्पना भी नहीं की थी.
क्या है कहानी?
फिल्म की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा जीवन और भीमा का कनेक्शन है. जीवन अपनी मौत का नाटक रचता है और अपने हमशक्ल भीमा की लाश को अपनी जगह इस्तेमाल करने की योजना बनाता है. उसका मकसद सीधा है—बीमा की रकम हासिल करना और अपनी जिंदगी को एक नए तरीके से आगे बढ़ाना.
लेकिन जिस प्लान को जीवन बेहद चालाकी से तैयार करता है, वही धीरे-धीरे उसके लिए मुसीबत बन जाता है. एक के बाद एक किरदारों की एंट्री होती है और मामला इतना उलझ जाता है कि जीवन के लिए अपनी ही बनाई कहानी से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है.
फिल्म में यही कन्फ्यूजन कॉमेडी का आधार बनता है. दर्शकों के सामने सवाल बना रहता है कि आखिर असली जीवन कौन है, भीमा कौन है और किसे किसकी मौत पर यकीन करना चाहिए?
अरशद वारसी का डबल रोल
अरशद वारसी फिल्म में डबल रोल निभाते नजर आते हैं. जीवन और भीमा के किरदारों को अलग-अलग रंग देने की वह पूरी कोशिश करते हैं. दोनों किरदारों की बॉडी लैंग्वेज और अंदाज में अंतर दिखाने की कोशिश की गई है.
अरशद की कॉमिक टाइमिंग फिल्म की बड़ी ताकत है. कई ऐसे सीन हैं, जहां उनका एक्सप्रेशन और संवाद कहानी को हल्का-फुल्का बनाए रखते हैं. हालांकि यह डबल रोल उनके करियर का सबसे यादगार डबल रोल नहीं कहा जा सकता, लेकिन वह फिल्म को संभालने की पूरी कोशिश करते हैं.
संजीदा शेख समेत बाकी कलाकार भी कहानी को आगे बढ़ाने में अपना योगदान देते हैं. फिल्म में कई ऐसे किरदार हैं, जिनकी एंट्री के साथ कहानी का कन्फ्यूजन और बढ़ता जाता है.
आइडिया मजेदार, लेकिन एक्सीक्यूशन कमजोर
Jeevan Ya Bheema Con की सबसे बड़ी खासियत इसका बेसिक आइडिया है. अपनी मौत का नाटक करके इंश्योरेंस का पैसा हासिल करने की योजना अपने आप में ऐसी है, जिससे कॉमेडी और क्राइम दोनों के लिए काफी संभावनाएं पैदा होती हैं.
फिल्म की समस्या यह है कि इस दिलचस्प आइडिया को स्क्रीन पर उतनी मजबूती से पेश नहीं किया गया, जितनी उम्मीद की जा सकती थी. कई जगह कहानी स्वाभाविक तरीके से आगे बढ़ने के बजाय जबरदस्ती उलझती हुई महसूस होती है.
जहां फिल्म को तेज रफ्तार और स्मार्ट कॉमेडी की जरूरत थी, वहां कुछ हिस्से खिंचे हुए लगते हैं. कुछ ट्विस्ट दिलचस्प हैं, लेकिन हर मोड़ उतना असर नहीं छोड़ता. नतीजतन फिल्म का कॉन्सेप्ट जितना मजेदार है, उसका एक्सीक्यूशन उतना प्रभावी नहीं बन पाता.
कॉमेडी कितनी काम करती है?
फिल्म में कॉमेडी का बड़ा हिस्सा गलत पहचान, डबल रोल और किरदारों के बीच पैदा होने वाली गलतफहमियों पर आधारित है. कुछ सिचुएशनल कॉमेडी अच्छे पल देती है और अरशद वारसी की मौजूदगी कई दृश्यों को मजेदार बना देती है.
लेकिन फिल्म लगातार एक जैसी लय बनाए रखने में कामयाब नहीं रहती. कुछ जगह कॉमेडी स्वाभाविक लगती है, तो कुछ जगह ऐसा महसूस होता है कि सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाने के लिए घटनाएं जोड़ी गई हैं.
यही वजह है कि फिल्म पूरी तरह से एंटरटेनिंग कॉमेडी-क्राइम फिल्म बनने से चूक जाती है.
क्या फिल्म आखिर तक बांधकर रखती है?
फिल्म की शुरुआत अपने अनोखे कॉन्सेप्ट की वजह से दर्शकों की दिलचस्पी जगाती है. जीवन का अपनी मौत का नाटक करना और भीमा की पहचान को अपनी योजना में इस्तेमाल करना कहानी को एक मजबूत हुक देता है.
हालांकि जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उलझनों की संख्या बढ़ती जाती है और स्क्रीनप्ले कुछ जगह कमजोर पड़ जाता है. फिल्म में कई ऐसे मौके आते हैं, जब लगता है कि कहानी कुछ बेहतर तरीके से आगे बढ़ सकती थी.
क्लाइमैक्स तक पहुंचते-पहुंचते फिल्म अपने मूल कॉन्सेप्ट से पैदा हुई उत्सुकता को पूरी तरह भुना नहीं पाती.
फैसला
Jeevan Ya Bheema Con का आइडिया निश्चित तौर पर अनोखा और मजेदार है. इंश्योरेंस के पैसे के लिए अपनी मौत का नाटक करने वाला कॉन्सेप्ट कॉमेडी और क्राइम का अच्छा मिश्रण तैयार कर सकता था. अरशद वारसी की कॉमिक टाइमिंग और डबल रोल फिल्म को कुछ अच्छे पल देती है.
लेकिन फिल्म की असली समस्या उसका एक्सीक्यूशन है. कमजोर स्क्रीनप्ले, असमान कॉमेडी और कुछ खिंचे हुए हिस्से इसके असर को कम कर देते हैं. अगर आप अरशद वारसी के फैन हैं और हल्की-फुल्की कॉमेडी-क्राइम कहानी देखना चाहते हैं, तो फिल्म आपको कुछ मनोरंजक पल दे सकती है. लेकिन मजबूत कहानी और लगातार बेहतरीन कॉमेडी की उम्मीद लेकर जाने वालों को निराशा हो सकती है.
रिपोर्टर; जसलीन कौर, मुख्य प्रबंधक
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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