China Nepal Flood Cooperation: नेपाल को ग्लेशियल लेक और मौसम की जानकारी देता रहेगा चीन
China Nepal Flood Cooperation: नेपाल में हालिया विनाशकारी बाढ़ के बाद चीन ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का संकेत दिया है। काठमांडू स्थित चीनी दूतावास ने बताया कि चीन नेपाल के साथ आपातकालीन हाइड्रोलॉजिकल मॉनिटरिंग से जुड़ी जानकारी लगातार साझा करता रहेगा। इसमें नदी में अवरोध, ग्लेशियल झीलों से जुड़े जोखिम और मौसम संबंधी सूचनाएं शामिल हैं।
आपदा के समय मिलेगी महत्वपूर्ण जानकारी
चीनी दूतावास के मुताबिक, इस सूचना साझाकरण का उद्देश्य नेपाल में खोज, बचाव और आपदा राहत अभियानों को समर्थन देना है। पहाड़ी इलाकों में अचानक जलस्तर बढ़ने, नदी के रास्ते में अवरोध बनने या ग्लेशियल झीलों से खतरा पैदा होने की स्थिति में समय पर जानकारी राहत एजेंसियों के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।
नेपाल और चीन दोनों हिमालयी क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। ऐसे में सीमा पार होने वाली मौसम और जल संबंधी घटनाओं की निगरानी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
ग्लेशियल लेक के जोखिम पर नजर
ग्लेशियल झीलें हिमालयी क्षेत्र में एक प्रमुख प्राकृतिक जोखिम हैं। ग्लेशियरों के पिघलने या उनके आसपास बर्फ और मलबे के कारण बनी झीलों में पानी का दबाव बढ़ने पर अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
चीन की ओर से साझा की जाने वाली जानकारी नेपाल को संभावित जोखिमों की निगरानी में मदद कर सकती है। खासकर दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसी सूचनाएं स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं।
भोटेकोशी बाढ़ के बाद बढ़ा सहयोग
नेपाल में हालिया भोटेकोशी क्षेत्र की विनाशकारी बाढ़ के बाद सीमा पार आपदा जोखिमों और शुरुआती चेतावनी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हुई है। इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्रों में बेहतर निगरानी और समय पर सूचना साझा करने की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में ग्लेशियल और मौसम संबंधी जोखिमों की निगरानी के लिए चीन के साथ डेटा साझा करने की व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
मौसम संबंधी जानकारी भी साझा करेगा चीन
चीनी दूतावास की ओर से यह भी बताया गया है कि मौसम संबंधी सहयोग आगे जारी रहेगा। मौसम पूर्वानुमान और हाइड्रोलॉजिकल मॉनिटरिंग से जुड़ी जानकारी आपदा की स्थिति में संभावित जोखिमों का आकलन करने में मदद कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियल जोखिम एक-दूसरे से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए केवल मौसम की जानकारी ही नहीं, बल्कि नदी के जलस्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाले बदलावों की निगरानी भी जरूरी है।
शुरुआती चेतावनी प्रणाली पर जोर
नेपाल में हालिया आपदा के बाद शुरुआती चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने की मांग भी बढ़ी है। समय पर चेतावनी मिलने से संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत एजेंसियों को पहले से तैयार करने में मदद मिल सकती है।
चीन और नेपाल के बीच जानकारी साझा करने का यह प्रयास इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है। हालांकि, सीमा पार जोखिमों के लिए प्रभावी व्यवस्था तभी ज्यादा उपयोगी होगी, जब जानकारी समय पर, नियमित और पर्याप्त विस्तार के साथ उपलब्ध हो।
हिमालयी क्षेत्र में सहयोग की बढ़ती जरूरत
जलवायु परिवर्तन और तेजी से बदलते हिमालयी पर्यावरण के बीच ग्लेशियर, हिमताल और अचानक आने वाली बाढ़ को लेकर चिंता बढ़ रही है। ऐसे में नेपाल और चीन के बीच मौसम, जल संसाधन और आपदा प्रबंधन से जुड़ा सहयोग दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
फिलहाल चीन ने नेपाल को हाइड्रोलॉजिकल मॉनिटरिंग और ग्लेशियल लेक से जुड़े जोखिमों की जानकारी साझा करते रहने का आश्वासन दिया है। आने वाले समय में यह सहयोग किस तरह औपचारिक और नियमित व्यवस्था में बदलता है, इस पर नजर रहेगी।
रिपोर्टर; अमनदीप सिंह, मुख्य संवाददता लुधियाना
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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