Nepal Flood: तबाही के एक हफ्ते बाद भी कई इलाके कटे, त्रिशूली नदी पर रस्सी के पुल बने सहारा
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही के एक हफ्ते बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों के खिसकने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने सड़कों, पुलों और कई बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से अब भी कटा हुआ है। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचा उनके सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सड़कें और बड़े पुल तबाह, गांवों तक पहुंच मुश्किल
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर त्रिशूली और भोटेकोशी नदी के आसपास के इलाकों में देखने को मिला है। तेज बहाव में कई सड़कें बह गईं और बड़े पुल क्षतिग्रस्त या पूरी तरह टूट गए। इसके कारण कई गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क टूट गया है।
त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले परिवारों के लिए हालात और मुश्किल हैं। नदी के दोनों ओर रहने वाले लोगों के बीच आवाजाही प्रभावित हुई है और कई परिवार अपने रिश्तेदारों तथा परिचितों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, बाढ़ के बाद नदी के ऊपर बने पुराने संपर्क मार्गों के नष्ट होने से कई समुदाय अलग-थलग पड़ गए हैं।
भारी पुलों की जगह बनाए गए रस्सी और केबल पुल
जहां कभी मजबूत और भारी पुल लोगों तथा वाहनों की आवाजाही का मुख्य साधन थे, वहां अब राहत और आवाजाही के लिए अस्थायी इंतजाम किए जा रहे हैं। त्रिशूली नदी के ऊपर कई जगह रस्सियों और केबल की मदद से हल्के अस्थायी पुल तैयार किए गए हैं।
इन पुलों के जरिए उन लोगों को नदी के दूसरी तरफ जाने में मदद मिल रही है, जिनके लिए सामान्य सड़क मार्ग बंद हो चुके हैं। हालांकि ये पुल बड़े वाहनों की आवाजाही के लिए नहीं हैं, लेकिन पैदल लोगों और स्थानीय स्तर पर राहत पहुंचाने के लिए बेहद अहम साबित हो रहे हैं।
जहां गाड़ियां नहीं पहुंच रहीं, वहां ये पुल बने लाइफलाइन
बाढ़ से प्रभावित कई इलाकों में सड़कें और पुल टूट जाने के कारण राहत सामग्री पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में अस्थायी पुलों के जरिए लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक निकालने की कोशिश की जा रही है।
नेपाल में राहत अभियान के दौरान सेना, पुलिस और अन्य एजेंसियों के हजारों जवान तैनात हैं। सरकार ने बताया है कि 21 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी खोज, बचाव, निकासी और राहत कार्यों में जुटे हैं।
हजारों लोग अब भी लापता
इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया है। 2 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार, एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 4 हजार लोग अब भी लापता हैं। कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है।
नेपाल सरकार ने प्रभावित परिवारों से लापता लोगों की पहचान में मदद के लिए डीएनए सैंपल उपलब्ध कराने की अपील भी की है। बरामद शवों की पहचान के लिए फॉरेंसिक प्रक्रिया जारी है।
कई परिवार अभी भी घर नहीं लौट पाए
बाढ़ में घरों और आसपास के इलाकों को नुकसान पहुंचने के कारण बड़ी संख्या में परिवार सुरक्षित स्थानों पर रह रहे हैं। कुछ लोग राहत शिविरों में हैं, जबकि कई प्रभावित परिवार रिश्तेदारों या दूसरे सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।
बुनियादी सुविधाओं और संपर्क मार्गों को हुए नुकसान के कारण प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाना अभी भी चुनौतीपूर्ण है। सरकार अब बचाव अभियान के साथ-साथ पुनर्वास और पुनर्निर्माण की दिशा में भी आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है।
त्रिशूली घाटी में तबाही के निशान
त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में बाढ़ ने घरों, पुलों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। स्थानीय रिपोर्टों में बताया गया है कि नदी के किनारे बसे समुदायों का संपर्क टूटने के कारण लोगों को एक-दूसरे की स्थिति की जानकारी हासिल करने में भी परेशानी हुई।
राहत दल क्षतिग्रस्त रास्तों को साफ करने और वैकल्पिक संपर्क मार्ग तैयार करने में जुटे हैं। जहां सड़क या बड़े पुल बनाना तत्काल संभव नहीं है, वहां अस्थायी पुल और अन्य वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
राहत से अब पुनर्निर्माण की ओर बढ़ रहा नेपाल
आपदा के सात दिन बाद नेपाल के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने का काम जारी है, वहीं दूसरी तरफ तबाह हुए सड़क, पुल और संचार ढांचे को दोबारा खड़ा करना भी जरूरी है।
नेपाल सरकार ने संकेत दिया है कि तत्काल बचाव अभियान के साथ अब पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर भी ध्यान बढ़ाया जा रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में मलबे और बुनियादी ढांचे के नुकसान के कारण प्रभावित क्षेत्रों को सामान्य स्थिति में लौटने में लंबा समय लग सकता है।
फिलहाल त्रिशूली नदी पर बनाए जा रहे रस्सी और केबल के अस्थायी पुल उन इलाकों के लिए उम्मीद की एक महत्वपूर्ण कड़ी बने हुए हैं, जहां भारी पुल और सड़कें बाढ़ की भेंट चढ़ चुकी हैं।
रिपोर्टर; तेजिंदर सिंह, मुख्य संवाददता उत्तराखण्ड

