OBC Creamy Layer: क्रीमी लेयर मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख, केंद्र की याचिका पर 17 सितंबर को सुनवाई
ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर तय करने के नियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले में बुधवार को अहम घटनाक्रम सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें मार्च 2026 के फैसले को UPSC Civil Services Examination (CSE) 2025 पर लागू किए जाने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है. मामले की अगली सुनवाई अब 17 सितंबर 2026 को दोपहर 3 बजे होगी.
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से क्यों मांगा स्पष्टीकरण?
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मार्च 2026 में दिए गए OBC क्रीमी लेयर संबंधी फैसले की CSE 2025 पर लागू होने की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है. केंद्र का कहना है कि CSE 2025 की चयन प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी थी और इसका अंतिम परिणाम 6 मार्च 2026 को घोषित किया गया था, जबकि सुप्रीम कोर्ट का संबंधित फैसला 11 मार्च 2026 को आया.
केंद्र के मुताबिक, ऐसे में फैसले को CSE 2025 पर पूर्व प्रभाव से लागू करने में व्यावहारिक दिक्कतें पैदा हो सकती हैं और एक ही परीक्षा के उम्मीदवारों के साथ अलग-अलग स्थिति बन सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र की याचिका पर सुनवाई की. केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले में अंतरिम राहत की मांग रखी थी.
केंद्र की दलील थी कि CSE 2025 के उम्मीदवार सेवा आवंटन और ट्रेनिंग का इंतजार कर रहे हैं और इस विवाद के कारण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. हालांकि पीठ ने तत्काल अंतरिम राहत देने का सुझाव स्वीकार नहीं किया और कहा कि आवेदन पर पहले सभी पक्षों को जवाब देने का अवसर दिया जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने पक्षकारों को आवेदन देखने और उस पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है. इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी.
क्या है OBC क्रीमी लेयर का पूरा विवाद?
यह विवाद इस बात से जुड़ा है कि OBC वर्ग के किसी उम्मीदवार को क्रीमी लेयर में रखने का आधार क्या होना चाहिए. मार्च 2026 के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि माता-पिता की सैलरी या आय को अकेले आधार बनाकर किसी उम्मीदवार को OBC क्रीमी लेयर में नहीं रखा जा सकता.
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि माता-पिता के पद, उस पद की श्रेणी और सामाजिक स्थिति जैसे पहलुओं को भी देखा जाना जरूरी है. यानी क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल आय के आंकड़े से नहीं किया जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के ऑफिस मेमोरेंडम के ढांचे को भी महत्वपूर्ण माना था. अदालत के अनुसार, बाद की कोई स्पष्टीकरणात्मक व्यवस्था मूल नीति में ऐसी नई शर्त नहीं जोड़ सकती, जिससे अधिकारों या देनदारियों में मूलभूत बदलाव हो जाए.
UPSC CSE 2025 पर क्यों पड़ रहा है असर?
केंद्र सरकार की चिंता मुख्य रूप से UPSC CSE 2025 के उम्मीदवारों की सेवा आवंटन प्रक्रिया को लेकर है. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, UPSC ने CSE 2025 के लिए 958 उम्मीदवारों की नियुक्ति की सिफारिश की थी.
केंद्र का कहना है कि यदि मार्च के फैसले को CSE 2025 पर पूरी तरह लागू किया जाता है, तो कुछ उम्मीदवारों की OBC क्रीमी लेयर स्थिति का दोबारा आकलन करना पड़ सकता है. इससे सेवा आवंटन और आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि परीक्षा के समय उम्मीदवारों ने उस समय लागू नियमों और कानूनी स्थिति के आधार पर अपनी श्रेणी में आवेदन किया था. बाद में आए फैसले को उसी परीक्षा पर लागू करने से समान परीक्षा के उम्मीदवारों के साथ अलग-अलग परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं.
उम्मीदवारों की सर्विस एलोकेशन और ट्रेनिंग पर नजर
इस मामले का सीधा असर उन उम्मीदवारों पर पड़ सकता है जो CSE 2025 में सफल होने के बाद सेवा आवंटन और ट्रेनिंग का इंतजार कर रहे हैं. केंद्र ने अदालत के सामने इसी वजह से जल्द अंतरिम व्यवस्था की मांग रखी थी.
वहीं, दूसरी तरफ मामले के कुछ पक्षकारों ने केंद्र की याचिका की स्वीकार्यता पर ही प्रारंभिक आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि केंद्र ने फैसले की समीक्षा के बजाय स्पष्टीकरण के लिए आवेदन किया है. इस मुद्दे पर भी अगली सुनवाई में दलीलें रखी जा सकती हैं.
17 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल केंद्र को तत्काल राहत नहीं दी है. अदालत ने सभी पक्षों को केंद्र की याचिका पर जवाब देने का मौका दिया है. अब मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर 2026 को दोपहर 3 बजे होगी.
उस सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि मार्च 2026 में OBC क्रीमी लेयर के मानदंड को लेकर दिए गए फैसले को CSE 2025 की चयन प्रक्रिया पर किस तरह लागू किया जाना चाहिए. इस फैसले का असर OBC आरक्षण के साथ-साथ UPSC CSE 2025 के सफल उम्मीदवारों की सेवा आवंटन प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है.
रिपोर्टर; तेजिंदर सिंह, मुख्य संवाददता उत्तराखण्ड

