झारखंड कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट तेज, सुदिव्य सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा को मिल सकती है जगह?
रांची: झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार के लिए पिछले करीब एक साल का समय बेहद दुखद रहा है। इस दौरान कैबिनेट के दो महत्वपूर्ण मंत्रियों का असमय निधन हो गया। पहले अगस्त 2025 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन का निधन हुआ और अब 6 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी माने जाने वाले मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का हार्ट अटैक से निधन हो गया। दोनों मंत्रियों के निधन के बाद राज्य सरकार की कैबिनेट में दो पद खाली हो गए हैं। ऐसे में झारखंड कैबिनेट विस्तार को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
एक साल में दो बड़े मंत्रियों का निधन
हेमंत सोरेन सरकार के लिए मंत्रियों का असमय निधन बड़ा झटका माना जा रहा है। अगस्त 2025 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन अपने घर में गिर गए थे, जिसके बाद उन्हें ब्रेन हैमरेज हुआ था। बेहतर इलाज के लिए उन्हें एयरलिफ्ट कर दिल्ली ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
इसके करीब एक साल बाद 6 सितंबर 2026 को झारखंड के कद्दावर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हो गया। उन्हें रात में सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक उनकी हालत गंभीर थी और इलाज के दौरान उन्हें दो बार कार्डियक अरेस्ट हुआ। तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
सुदिव्य सोनू के पास थे कई अहम विभाग
सुदिव्य कुमार सोनू सिर्फ गिरिडीह से विधायक ही नहीं थे, बल्कि हेमंत सोरेन सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके पास नगर विकास, आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग थे।
उनके निधन के बाद इन विभागों के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार को जल्द ही जिम्मेदारियां बांटनी होंगी। यही वजह है कि झारखंड कैबिनेट विस्तार की चर्चा अब राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई है।
श्वेता शर्मा के नाम की चर्चा क्यों?
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद उनकी पत्नी श्वेता शर्मा के नाम की भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि अभी तक सरकार या झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से यह आधिकारिक रूप से नहीं कहा गया है कि उन्हें मंत्री बनाया जाएगा।
राजनीतिक चर्चा के मुताबिक, श्वेता शर्मा को कैबिनेट में शामिल करने के पीछे सुदिव्य सोनू की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की रणनीति हो सकती है। गिरिडीह विधानसभा सीट भी सुदिव्य सोनू के निधन के बाद खाली हो गई है और यहां उपचुनाव होना है।
हेमंत सोरेन के पुराने फॉर्मूले की चर्चा
राजनीतिक विश्लेषण में हेमंत सोरेन के पुराने फैसलों का भी उदाहरण दिया जा रहा है। इससे पहले मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के निधन के बाद उनके बेटे हफीजुल हसन को मंत्री बनाया गया था। इसी तरह पूर्व शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो के निधन के बाद उनकी पत्नी बेबी देवी को भी सरकार में मंत्री बनाया गया था।
इसी वजह से सुदिव्य सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का विकल्प चुन सकती है।
गिरिडीह सीट पर होगा उपचुनाव
सुदिव्य कुमार सोनू गिरिडीह सदर विधानसभा सीट से विधायक थे। 2019 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव जीता था और 2024 में भी वह इसी सीट से निर्वाचित हुए। उनके निधन के बाद अब गिरिडीह विधानसभा सीट खाली हो गई है। नियमों के अनुसार रिक्त विधानसभा सीट पर निर्धारित अवधि के भीतर उपचुनाव कराया जाना है।
ऐसे में गिरिडीह उपचुनाव को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। यदि श्वेता शर्मा को पार्टी आगे करती है, तो उनके सामने अपने पति की राजनीतिक विरासत को संभालने की बड़ी चुनौती होगी।
सुदिव्य सोनू और हेमंत सोरेन के बीच करीबी रिश्ता
सुदिव्य कुमार सोनू को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का करीबी नेता माना जाता था। उनके निधन के बाद मुख्यमंत्री ने गहरा दुख व्यक्त किया। हेमंत सोरेन ने सुदिव्य सोनू को सिर्फ राजनीतिक सहयोगी नहीं बल्कि अपने बड़े भाई जैसा बताया।
सुदिव्य सोनू के अंतिम संस्कार में भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए। उनके निधन के बाद झारखंड सरकार ने 6 और 7 सितंबर को दो दिवसीय राजकीय शोक घोषित किया था।
सुदिव्य सोनू का राजनीतिक सफर
सुदिव्य कुमार सोनू ने झारखंड मुक्ति मोर्चा से लंबे समय तक राजनीति की। उन्होंने छात्र आंदोलन और झारखंड आंदोलन के दौर से राजनीतिक सक्रियता शुरू की थी। बाद में वह गिरिडीह में पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे।
2019 में पहली बार गिरिडीह विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। 2024 में उन्होंने दोबारा जीत दर्ज की और इसके बाद हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री बने। उनके पास कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि हेमंत सोरेन सरकार खाली हुए दो मंत्री पदों को कब और किस तरह भरती है। एक तरफ सुदिव्य सोनू के पास रहे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी का सवाल है, तो दूसरी तरफ गिरिडीह विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
श्वेता शर्मा को कैबिनेट में जगह मिलने की चर्चा अभी आधिकारिक घोषणा नहीं है। यदि सरकार और पार्टी इस दिशा में फैसला लेती है, तो यह हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्रिमंडल के समीकरण और गिरिडीह की राजनीति—दोनों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव होगा।
आने वाले दिनों में झारखंड कैबिनेट विस्तार, खाली मंत्री पदों और गिरिडीह उपचुनाव को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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