BRICS डॉलर विवाद पर रूस का ट्रंप को जवाब, पेस्कोव बोले- राष्ट्रीय मुद्रा में भुगतान हमारा राष्ट्रीय हित
नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिकी डॉलर को लेकर रूस और अमेरिका के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार BRICS देशों पर डॉलर से दूरी बनाने और अमेरिकी मुद्रा के विकल्प तलाशने का आरोप लगाते रहे हैं। अब रूस ने इन आरोपों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि BRICS देशों का उद्देश्य अमेरिकी डॉलर के खिलाफ कोई अभियान चलाना नहीं है। उनके मुताबिक, अलग-अलग देश अपने राष्ट्रीय हितों के हिसाब से भुगतान के तरीके चुन रहे हैं। रूस भी दूसरे देशों के साथ राष्ट्रीय मुद्राओं में भुगतान को बढ़ावा दे रहा है, लेकिन इसे सीधे तौर पर ‘डीडॉलराइजेशन’ की नीति नहीं कहा जा सकता।
पेस्कोव ने ट्रंप के आरोपों पर क्या कहा?
BRICS देशों के डॉलर से दूरी बनाने को लेकर ट्रंप के आरोपों के जवाब में पेस्कोव ने कहा कि BRICS के सदस्य देश अपने राष्ट्रीय हितों के लिए काम करते हैं। रूस भी अपनी आर्थिक जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग भुगतान विकल्पों का इस्तेमाल कर रहा है।
पेस्कोव ने यह भी स्पष्ट किया कि रूस का लक्ष्य डॉलर को खत्म करना नहीं है। उन्होंने कहा कि मॉस्को सभी स्वीकार्य भुगतान माध्यमों के लिए खुला है। यानी रूस की प्राथमिकता किसी एक मुद्रा को हटाना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में विकल्पों को बढ़ाना है।
BRICS देशों के साथ 90 फीसदी भुगतान नेशनल करेंसी में
पेस्कोव के मुताबिक, रूस के BRICS देशों के साथ करीब 90 फीसदी भुगतान राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है। इसका मतलब यह है कि रूस और उसके BRICS साझेदार देशों के बीच व्यापार में डॉलर या यूरो पर निर्भरता कम करते हुए संबंधित देशों की अपनी मुद्राओं का इस्तेमाल बढ़ा है।
रूस का कहना है कि इसका मुख्य मकसद भुगतान प्रणाली को ज्यादा लचीला बनाना है। मॉस्को के लिए पश्चिमी प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था में आने वाली बाधाओं के बीच वैकल्पिक रास्ते बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
रूस ने क्यों बढ़ाया नेशनल करेंसी में कारोबार?
पेस्कोव ने बताया कि अलग-अलग देशों के साथ राष्ट्रीय मुद्राओं में भुगतान का प्रस्ताव रूस के राष्ट्रीय हितों से जुड़ा है। रूस चाहता है कि उसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भुगतान के कई विकल्प मौजूद रहें।
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर पश्चिमी देशों की ओर से लगाए गए आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंधों ने उसके लिए अंतरराष्ट्रीय भुगतान को मुश्किल बनाया है। ऐसे में रूस ने कई देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान को बढ़ावा दिया है।
हालांकि, क्रेमलिन का कहना है कि इसे अमेरिकी डॉलर को खत्म करने की कोशिश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पेस्कोव के ताजा बयान का यही मुख्य संदेश है।
डॉलर को लेकर ट्रंप लगातार दे रहे हैं चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से BRICS देशों की ऐसी किसी भी कोशिश का विरोध करते रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर की भूमिका कमजोर हो सकती है।
ट्रंप पहले BRICS देशों को चेतावनी दे चुके हैं कि अगर वे डॉलर के विकल्प के तौर पर कोई नई मुद्रा बनाने या किसी दूसरी मुद्रा को समर्थन देने की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो अमेरिका उनके खिलाफ कड़े व्यापारिक कदम उठा सकता है।
हालांकि, रूस ने बार-बार कहा है कि BRICS की ओर से अमेरिकी डॉलर को हटाने के लिए कोई साझा नई मुद्रा बनाने की तत्काल योजना नहीं है। BRICS के भीतर चर्चा मुख्य रूप से स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान के विकल्प बढ़ाने पर केंद्रित रही है।
भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान बड़ा मुद्दा
इस पूरे विवाद के बीच भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होना है।
सम्मेलन में BRICS देशों के शीर्ष नेता और अन्य आमंत्रित प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भी सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि की जा चुकी है।
ऐसे में डॉलर, स्थानीय मुद्राओं में कारोबार और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दे सम्मेलन के दौरान भी अहम चर्चा का विषय बन सकते हैं।
रूस ने भारत की BRICS अध्यक्षता की तारीफ की
पेस्कोव ने भारत की BRICS अध्यक्षता की भी तारीफ की है। रूस का कहना है कि भारत के नेतृत्व में BRICS सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं।
BRICS के विस्तार के बाद संगठन में आर्थिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में संगठन के भीतर व्यापार, निवेश, भुगतान व्यवस्था और वैश्विक आर्थिक संस्थानों में सुधार जैसे मुद्दों का महत्व भी बढ़ गया है।
क्या BRICS डॉलर को खत्म करना चाहता है?
फिलहाल उपलब्ध बयानों से यह कहना सही नहीं होगा कि BRICS अमेरिकी डॉलर को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में कोई साझा अभियान चला रहा है।
रूस के ताजा बयान के मुताबिक, लक्ष्य भुगतान के विकल्पों को बढ़ाना है। राष्ट्रीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ने का मतलब यह है कि कुछ लेनदेन में डॉलर की जरूरत कम हो सकती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि BRICS ने डॉलर को पूरी तरह छोड़ने का फैसला किया है। पेस्कोव ने भी रूस की स्थिति को ‘डीडॉलराइजेशन’ अभियान के रूप में पेश करने से इनकार किया है।
अमेरिका-रूस के बीच आर्थिक बयानबाजी जारी
BRICS और डॉलर का मुद्दा केवल आर्थिक नहीं बल्कि भू-राजनीतिक महत्व भी रखता है। अमेरिका चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में डॉलर की प्रमुख भूमिका बनी रहे, जबकि रूस और कुछ अन्य देश भुगतान प्रणाली में अधिक विकल्पों की वकालत कर रहे हैं।
यही वजह है कि BRICS शिखर सम्मेलन से पहले पेस्कोव का बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रूस ने एक तरफ राष्ट्रीय मुद्राओं में भुगतान को अपने हित में बताया है, वहीं दूसरी तरफ यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उसका घोषित लक्ष्य डॉलर को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से बाहर करना नहीं है।
अब नजर 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन पर रहेगी, जहां वैश्विक व्यापार, भुगतान व्यवस्था और सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
रिपोर्टर; सतविंदर, कौर मुख्य संवाददाता हरियाणा
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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