आंध्र प्रदेश में भारी बारिश से आफत, उफनते नाले को जान जोखिम में डालकर पार कर रहे आदिवासी
आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में भारी बारिश ने आदिवासी इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अनंतगिरी मंडल की लुंगापर्थी पंचायत के ओनुकोण्डा गांव में बारिश के बाद नाला उफान पर है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को अपने घरों तक पहुंचने और जरूरी सामान लाने के लिए तेज बहाव वाले पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।
सामने आए वीडियो और तस्वीरों में ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार करते दिखाई दे रहे हैं। पानी का बहाव इतना तेज है कि हर कदम बेहद सावधानी से उठाना पड़ रहा है। एक वीडियो में एक व्यक्ति अपने कंधे पर बच्चे को बैठाकर नाले को पार करता नजर आ रहा है। उसके नीचे तेज रफ्तार से पानी बह रहा है, जबकि आसपास अन्य लोग भी इसी रास्ते से दूसरी तरफ जाने की कोशिश कर रहे हैं।
भारी बारिश के बाद बिगड़े हालात
बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने डीप डिप्रेशन के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश हुई। 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की सुबह के बीच इस मौसमी सिस्टम ने उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तट को पार किया। पेड्डा वाल्टेयर में 278 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि विशाखापट्टनम के कई इलाकों में भी 200 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हुई।
भारी बारिश का असर पहाड़ी और आदिवासी इलाकों में ज्यादा दिखाई दे रहा है। बारिश के बाद छोटे-बड़े जलस्रोत तेजी से भर गए हैं और कई जगह नालों का जलस्तर बढ़ गया है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों की सड़क और पैदल कनेक्टिविटी प्रभावित हुई है।
पुल नहीं होने से बढ़ी परेशानी
ओनुकोण्डा गांव के ग्रामीणों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि नाले पर आने-जाने के लिए कोई पक्का पुल नहीं है। सामान्य दिनों में जहां लोग आसानी से आवाजाही कर लेते हैं, वहीं बारिश के मौसम में पानी बढ़ते ही यह रास्ता खतरनाक हो जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। मानसून के दौरान नाले का पानी बढ़ने पर गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है और ग्रामीणों को तेज बहाव के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से यहां स्थायी पुल बनाने की मांग की है, ताकि बारिश के दौरान लोगों को अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े।
बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा
उफनते नाले को पार करने में सबसे बड़ा खतरा बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए है। पानी का बहाव अचानक तेज होने पर किसी भी समय हादसा हो सकता है। इसके बावजूद रोजमर्रा की जरूरतों के कारण ग्रामीणों को इस रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
वीडियो में दिखाई दे रहा दृश्य इसी मजबूरी को सामने लाता है। एक व्यक्ति बच्चे को कंधे पर बैठाकर पानी के बीच से निकल रहा है। आसपास मौजूद दूसरे ग्रामीण भी सावधानी से नाले को पार करते दिखाई दे रहे हैं।
बारिश से कई आदिवासी इलाकों में कनेक्टिविटी प्रभावित
अल्लूरी सीताराम राजू जिले में इससे पहले भी भारी बारिश के दौरान कई आदिवासी बस्तियों के संपर्क प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। कुछ जगहों पर उफनते नालों, क्षतिग्रस्त पुलियों और जलभराव के कारण ग्रामीण इलाकों का मैदानी क्षेत्रों से संपर्क बाधित हुआ है।
प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों, सड़क संपर्क और नालों के जलस्तर पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश के कारण अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा भी बना रहता है।
ग्रामीणों को स्थायी समाधान का इंतजार
ओनुकोण्डा के ग्रामीणों के लिए यह समस्या केवल बारिश तक सीमित नहीं है। मानसून आते ही नाला उफान पर पहुंच जाता है और आवाजाही मुश्किल हो जाती है। ग्रामीण चाहते हैं कि यहां जल्द से जल्द पक्का पुल बनाया जाए, जिससे गांव की कनेक्टिविटी बेहतर हो और बच्चों, बुजुर्गों तथा अन्य लोगों को जोखिम उठाकर नाला पार न करना पड़े।
फिलहाल भारी बारिश के बीच उफनते नाले को पार करते ग्रामीणों की तस्वीरें इलाके की जमीनी स्थिति को सामने ला रही हैं। एक तरफ मौसम की मार है, तो दूसरी तरफ वर्षों से पुल का इंतजार कर रहे ग्रामीणों की मजबूरी। सवाल यही है कि आखिर कब तक लोगों को अपने घर पहुंचने के लिए तेज बहाव वाले पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ेगा।

