Bhadohi Carpet Expo: 65 देशों के 447 विदेशी खरीदार पहुंचे, 500 करोड़ के कारोबार की उम्मीद
भदोही, 8 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के भदोही में चार दिन तक चले इंडिया कारपेट एक्सपो का बुधवार को समापन हो गया। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच आयोजित इस एक्सपो में दुनिया के कई देशों के खरीदार भारतीय कालीनों की गुणवत्ता, डिजाइन और कीमतों को देखने पहुंचे। आयोजकों के मुताबिक, एक्सपो से मिलने वाली पूछताछ और कारोबारी बातचीत के आधार पर आने वाले महीनों में करीब 500 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है।
इस बार एक्सपो में 65 देशों के 447 विदेशी खरीदार और उनके प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें 216 विदेशी खरीदार ऐसे थे, जिन्होंने खुद एक्सपो में पहुंचकर भारतीय कालीन और दूसरे उत्पाद देखे। इसके अलावा बड़ी संख्या में खरीदारों ने अपने प्रतिनिधियों के जरिए कारोबारी बातचीत की।
223 कालीन निर्यातकों ने लगाए स्टॉल
भदोही कारपेट एक्सपो में देश के अलग-अलग हिस्सों से कुल 223 कालीन निर्यातकों ने अपने स्टॉल लगाए। इनमें भदोही के साथ कश्मीर, जयपुर, बीकानेर, आगरा, कोलकाता, पानीपत, वाराणसी और मिर्जापुर समेत कई प्रमुख कालीन उत्पादन केंद्रों के निर्यातक शामिल रहे।
एक्सपो में प्रदर्शित कालीनों में पारंपरिक हस्तशिल्प के साथ आधुनिक डिजाइन और अलग-अलग बाजारों की पसंद के मुताबिक तैयार किए गए उत्पाद भी शामिल रहे। खरीदारों ने कालीनों के डिजाइन, गुणवत्ता और कीमतों को लेकर निर्यातकों के साथ बातचीत की।
आर्थिक दबाव के बीच सस्ते कालीनों की मांग
इस समय दुनिया के कई बाजार महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता से प्रभावित हैं। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और लोगों की खर्च करने की क्षमता पर दबाव का असर कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है।
एक्सपो में भी खरीदारों की पसंद में इसका असर देखने को मिला। महंगे और लग्जरी कालीनों की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ते और आसानी से इस्तेमाल किए जा सकने वाले कालीनों में अधिक रुचि दिखाई दी। कारोबारियों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय कालीनों की मांग बनी हुई है।
मौके पर ऑर्डर, आगे के लिए बड़ी संख्या में पूछताछ
एक्सपो के दौरान कुछ निर्यातकों को तत्काल ऑर्डर मिले, जबकि बड़ी संख्या में विदेशी खरीदारों ने भविष्य के कारोबार को लेकर पूछताछ की। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के चेयरमैन मुकेश गोम्बर के मुताबिक, इन पूछताछ और कारोबारी बातचीत के वास्तविक ऑर्डर में बदलने के बाद आने वाले महीनों में लगभग 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक का कारोबार होने की उम्मीद है।
यानी कारोबारियों के लिए चार दिन का यह आयोजन सिर्फ तत्काल बिक्री तक सीमित नहीं है। एक्सपो में बने कारोबारी संपर्क आने वाले महीनों में बड़े निर्यात सौदों में बदल सकते हैं।
अमेरिका से सबसे ज्यादा खरीदार
विदेशी खरीदारों की भागीदारी में अमेरिका सबसे आगे रहा। इसके अलावा ब्राजील, इटली, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, रूस और तुर्किये समेत कई देशों से खरीदार और कारोबारी प्रतिनिधि पहुंचे। इससे भारतीय कालीन उद्योग को अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने का अवसर मिला।
इस एक्सपो में BRICS देशों पर भी विशेष ध्यान दिया गया था। आयोजकों के मुताबिक BRICS देशों के 106 खरीदारों ने पंजीकरण कराया था, हालांकि चार दिन के आयोजन में इनमें से करीब 40 खरीदार ही पहुंचे। आयोजकों का मानना है कि आने वाले समय में BRICS देशों में भारतीय कालीनों के लिए नए बाजार विकसित किए जा सकते हैं।
महिला उद्यमियों ने भी दिखाई भागीदारी
एक्सपो में महिला उद्यमियों की भागीदारी भी चर्चा में रही। भदोही की नेहा ने MBA करने के बाद कालीन डिजाइन का कोर्स किया और इसके बाद डिजाइन तैयार कराकर कालीनों का निर्यात शुरू किया। वह करीब छह वर्षों से इस कारोबार से जुड़ी हैं।
वहीं 28 वर्षीय श्रद्धा मिश्रा ने मुंबई से साइकोलॉजी की पढ़ाई की और कॉरपोरेट सेक्टर में HR की नौकरी की। बाद में उन्होंने कालीन कारोबार में कदम रखा। वह डिजाइन तैयार करते समय लोगों की पसंद और व्यवहार को समझने के लिए मनोविज्ञान की पढ़ाई से मिले ज्ञान का इस्तेमाल करती हैं।
भदोही के कारोबारियों को एक्सपो से बड़ी उम्मीद
निर्यातकों का कहना है कि विदेशी खरीदारों का भदोही पहुंचना स्थानीय कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है। खरीदार केवल एक्सपो में उत्पाद देखने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि कई कारोबारी स्थानीय प्रतिष्ठानों और उत्पादन इकाइयों का भी दौरा करते हैं।
कारोबारियों के मुताबिक, इससे भदोही के कालीन उद्योग को सीधे फायदा मिलता है और विदेशी ग्राहकों के साथ लंबे समय के कारोबारी संबंध बनाने का मौका मिलता है।
भारतीय कालीन उद्योग के लिए क्या संकेत?
भदोही में विदेशी खरीदारों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ऐसे समय में हुई है, जब वैश्विक बाजार आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। इसके बावजूद भारतीय कालीनों में खरीदारों की रुचि बनी रहना उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
आयोजकों को उम्मीद है कि एक्सपो के दौरान हुई बातचीत और पूछताछ आने वाले महीनों में वास्तविक निर्यात सौदों में बदलेंगी। इससे न केवल भदोही बल्कि देश के अन्य कालीन उत्पादन केंद्रों और इस उद्योग से जुड़े बुनकरों व कारीगरों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस तरह Bhadohi Carpet Expo ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय कालीन उद्योग के लिए नए बाजार और संभावित कारोबार के रास्ते खोलने का संकेत दिया है।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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