Delhi Building Collapse: सीमापुरी हादसे के बाद प्रशासन पर सवाल, सत्य निकेतन में एक महीने बाद भी कार्रवाई अधूरी
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026। दिल्ली में लगातार सामने आ रहे इमारत गिरने के हादसों ने राजधानी में भवन सुरक्षा, अवैध निर्माण और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी इलाके का है, जहां 7 अक्टूबर को एक बहुमंजिला इमारत गिर गई। हादसे में कई लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। राहत और बचाव टीमों ने मलबे से लोगों को बाहर निकाला।
इस हादसे ने करीब एक महीने पहले दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए भीषण इमारत हादसे की याद भी ताजा कर दी है। सत्य निकेतन में 6 सितंबर को एक बहुमंजिला इमारत गिरने से कई लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद प्रशासन और एमसीडी की ओर से जर्जर और खतरनाक इमारतों के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए गए थे।
सीमापुरी हादसे ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल
7 अक्टूबर की दोपहर करीब 3:30 बजे सीमापुरी इलाके में एक पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। दिल्ली फायर सर्विस की टीमों के साथ एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव अभियान शुरू किया।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक कई लोग मलबे में फंसे थे। स्थानीय लोगों ने भी राहत कार्य में मदद की। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों के मुताबिक हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि हाल में महसूस किए गए भूकंप के झटकों के बाद इमारत में दरारें आई थीं। हालांकि, इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
सत्य निकेतन हादसे के एक महीने बाद भी सवाल
सीमापुरी हादसे के बाद एक बार फिर सत्य निकेतन की स्थिति चर्चा में आ गई है। 6 सितंबर को सत्य निकेतन में एक बहुमंजिला इमारत गिरने से बड़ा हादसा हुआ था। इस इमारत का इस्तेमाल छात्रों के लिए पीजी के तौर पर किया जा रहा था।
हादसे के बाद एमसीडी ने आसपास की खतरनाक इमारतों को लेकर नोटिस जारी किए थे। एक नजदीकी इमारत को खाली करने का आदेश भी दिया गया था। पुलिस ने मामले में बिल्डिंग मालिक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। साथ ही एमसीडी के कई अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
नोटिस के बाद भी बदलाव नहीं होने का दावा
सत्य निकेतन में स्थानीय लोगों और युवाओं का कहना है कि कुछ इमारतों पर एमसीडी ने नोटिस तो चस्पा किए, लेकिन उसके बाद कार्रवाई की गति को लेकर सवाल बने हुए हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि कई इमारतें अब भी जर्जर स्थिति में हैं और उनमें रहने वाले लोग सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन सक्रिय होता है और कुछ समय बीतने के बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।
सत्य निकेतन हादसे में हुई थी बड़ी कार्रवाई
सत्य निकेतन हादसे के बाद पुलिस ने बिल्डिंग मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया था। जांच में निर्माण कार्य और इमारत की संरचनात्मक स्थिति को लेकर कई सवाल सामने आए थे।
एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर समेत पांच अधिकारियों को भी निलंबित किया गया था। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में भी जनहित याचिका पर सुनवाई हुई थी।
हादसे के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?
दिल्ली में घनी आबादी वाले इलाकों में बड़ी संख्या में पुरानी और बहुमंजिला इमारतें मौजूद हैं। कई जगह पीजी, किराये के कमरे और व्यावसायिक गतिविधियां भी आवासीय भवनों में संचालित होती हैं। ऐसे में इमारतों की नियमित जांच और समय रहते कार्रवाई को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
सीमापुरी हादसे के बाद एक बार फिर यह सवाल सामने है कि क्या खतरनाक इमारतों की पहचान के लिए नियमित और प्रभावी निरीक्षण हो रहा है? अगर किसी इमारत को पहले से खतरे वाली श्रेणी में रखा गया है, तो उसे खाली कराने और सुरक्षित करने की कार्रवाई समय पर क्यों नहीं होती?
सुरक्षा मानकों के पालन की जरूरत
लगातार हो रहे हादसों के बीच विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों की मांग है कि राजधानी में जर्जर इमारतों का व्यापक सर्वे कराया जाए। जिन भवनों को खतरनाक घोषित किया गया है, वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और अवैध निर्माण के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई हो।
सीमापुरी की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रशासनिक कार्रवाई केवल हादसे के बाद तक सीमित रह जाती है या राजधानी में भवन सुरक्षा को लेकर स्थायी व्यवस्था भी बनाई जा रही है।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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