दिल्ली में मोहल्ला क्लिनिकों का नाम बदलकर ‘आरोग्य मंदिर’ करने पर खर्च का हिसाब मांगा, डॉ. चरणजीत सिंह ने उठाई जांच की मांग
दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लिनिकों का नाम बदलकर ‘आरोग्य मंदिर’ किए जाने से जुड़े सरकारी खर्च और प्रशासनिक प्रक्रिया पर पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय-राष्ट्रीय सर्वाधिकार कार्यकर्ता डॉ. चरणजीत सिंह ने दिल्ली के मुख्य सचिव सहित स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, लोक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों को अभ्यावेदन भेजकर सरकारी आदेशों, वित्तीय स्वीकृतियों, निविदाओं, ठेकों और भुगतान का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने प्रति केंद्र 25 से 35 लाख रुपये तक खर्च होने के अपुष्ट दावों की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग उठाई है।
नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मोहल्ला क्लिनिकों का नाम बदलकर ‘आरोग्य मंदिर’ किए जाने की प्रक्रिया और इससे जुड़े सरकारी खर्च को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय-राष्ट्रीय सर्वाधिकार कार्यकर्ता डॉ. चरणजीत सिंह ने इस संबंध में दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव अथवा सचिव, लोक निर्माण विभाग के प्रधान सचिव अथवा सचिव तथा संबंधित विभागों के जन सूचना अधिकारियों, सतर्कता अधिकारियों और प्रथम अपीलीय प्राधिकारियों को संबोधित एक औपचारिक अभ्यावेदन तैयार किया है।
24 अक्टूबर 2026 को दिनांकित इस अभ्यावेदन में सरकारी धन के उपयोग, प्रशासनिक स्वीकृतियों, ठेकेदारों के चयन, निर्माण एवं मरम्मत कार्यों तथा भुगतान की प्रक्रिया से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
डॉ. चरणजीत सिंह ने कहा है कि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और सरकारी विभागों की जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस मामले में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तथ्यों की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
प्रति केंद्र 25 से 35 लाख रुपये खर्च होने के दावों पर सवाल
अभ्यावेदन में उल्लेख किया गया है कि कुछ सूत्रों से ऐसी जानकारी प्राप्त हुई है, जिसके अनुसार मोहल्ला क्लिनिकों का नाम बदलकर आरोग्य मंदिर किए जाने के दौरान नामपट्ट, संकेतक, रंग-रोगन, मरम्मत और अन्य कार्यों पर सरकारी धन खर्च किया गया हो सकता है।
कुछ सूत्रों ने प्रति केंद्र लगभग 25 लाख से 35 लाख रुपये तक खर्च होने का दावा भी किया है।
हालांकि, डॉ. चरणजीत सिंह ने अपने अभ्यावेदन में स्पष्ट किया है कि इन आंकड़ों और कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा कि वास्तविक स्थिति जानने के लिए सरकारी रिकॉर्ड, स्वीकृत बजट, भुगतान विवरण और कार्य-पूर्णता प्रमाणपत्रों की जांच आवश्यक है।
इसलिए संबंधित विभागों को सभी उपलब्ध अभिलेख सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस केंद्र पर कौन-सा कार्य हुआ और उसके लिए कितनी राशि स्वीकृत एवं खर्च की गई।
नाम परिवर्तन से जुड़े सरकारी आदेशों की प्रतियां मांगीं
डॉ. चरणजीत सिंह ने मांग की है कि मोहल्ला क्लिनिकों का नाम बदलकर आरोग्य मंदिर किए जाने से संबंधित सभी मूल सरकारी आदेशों, अधिसूचनाओं, दिशा-निर्देशों और प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने संबंधित विभागीय पत्राचार और सक्षम अधिकारियों द्वारा दी गई मंजूरियों का विवरण भी मांगा है।
अभ्यावेदन में कहा गया है कि नाम परिवर्तन की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया का रिकॉर्ड सामने आने से यह स्पष्ट होगा कि फैसला किस स्तर पर लिया गया और इसे लागू करने की जिम्मेदारी किन विभागों को सौंपी गई।
सभी स्वास्थ्य केंद्रों की केंद्रवार सूची उपलब्ध कराने की मांग
अभ्यावेदन में दिल्ली के उन सभी स्वास्थ्य केंद्रों की सूची उपलब्ध कराने की मांग की गई है, जिनका नाम मोहल्ला क्लिनिक से बदलकर आरोग्य मंदिर किया गया।
इस सूची में प्रत्येक केंद्र का पुराना नाम, नया नाम, पूरा पता, संबंधित विभाग और नाम परिवर्तन की तारीख दर्ज करने का अनुरोध किया गया है।
डॉ. चरणजीत सिंह का कहना है कि केंद्रवार जानकारी उपलब्ध होने से वास्तविक खर्च और कार्यों का मिलान किया जा सकेगा।
इससे यह भी स्पष्ट होगा कि किन केंद्रों पर केवल नामपट्ट बदले गए और किन स्थानों पर मरम्मत, निर्माण अथवा अन्य कार्य कराए गए।
बजट आवंटन और वास्तविक खर्च का विवरण मांगा
डॉ. चरणजीत सिंह ने प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र के लिए प्रशासनिक स्वीकृति, वित्तीय स्वीकृति, बजट आवंटन, स्वीकृत अनुमान और वास्तविक व्यय की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि सरकारी धन के उपयोग का सही आकलन तभी संभव है, जब स्वीकृत राशि और वास्तव में किए गए भुगतान का विवरण सामने आए।
अभ्यावेदन में यह भी मांग की गई है कि नामपट्ट, संकेतक, रंग-रोगन, भवन मरम्मत, निर्माण, विद्युत कार्य, फर्नीचर, उपकरण और प्रचार सामग्री पर हुए खर्च का अलग-अलग विवरण उपलब्ध कराया जाए।
जहां किसी मद में कोई खर्च नहीं हुआ हो, वहां उपलब्ध विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया है।
निविदाओं और ठेकेदारों के चयन की प्रक्रिया पर भी सवाल
डॉ. चरणजीत सिंह ने नाम परिवर्तन तथा संबंधित कार्यों के लिए जारी निविदाओं और ठेकों का रिकॉर्ड भी मांगा है।
उन्होंने निविदा संख्या, निविदा सूचना, प्राप्त बोलियों, चयनित ठेकेदारों, कार्यादेशों, अनुबंधों, निर्धारित दरों और अनुबंधों में किए गए संशोधनों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की है।
अभ्यावेदन में कहा गया है कि इन दस्तावेजों से यह समझने में मदद मिलेगी कि कार्यों का आवंटन किन नियमों और प्रक्रियाओं के तहत किया गया।
इसके साथ ही ठेकेदारों के तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन और कार्यों की गुणवत्ता जांच से संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
बिल, भुगतान और कार्य-पूर्णता प्रमाणपत्र सार्वजनिक करने की मांग
अभ्यावेदन में प्रत्येक कार्य के बिल, भुगतान स्वीकृति, भुगतान की तारीख, भुगतान की राशि, माप-पुस्तिका और कार्य-पूर्णता प्रमाणपत्रों की प्रतियां मांगी गई हैं।
डॉ. चरणजीत सिंह ने उपलब्ध निरीक्षण रिपोर्टों की प्रतियां भी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि बैंक खातों और अन्य संरक्षित व्यक्तिगत विवरणों को लागू कानून के अनुसार आवश्यकतानुसार हटाया जा सकता है।
इस मांग का उद्देश्य संबंधित कार्यों के वास्तविक निष्पादन और सरकारी भुगतान के बीच सामंजस्य की जांच करना बताया गया है।
स्वास्थ्य विभाग और पीडब्ल्यूडी की जिम्मेदारी स्पष्ट करने की मांग
डॉ. चरणजीत सिंह ने सवाल उठाया है कि मोहल्ला क्लिनिकों के नाम परिवर्तन और उससे संबंधित कार्यों के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, लोक निर्माण विभाग, स्थानीय निकाय अथवा अन्य सरकारी एजेंसियों में से किसकी क्या जिम्मेदारी निर्धारित की गई थी।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पदनाम और स्वीकृति तथा निरीक्षण प्रक्रिया का विवरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
अभ्यावेदन के अनुसार, विभागीय जिम्मेदारियों की स्पष्ट जानकारी से प्रशासनिक जवाबदेही निर्धारित करने में सहायता मिलेगी।
सूचना के अधिकार के तहत आवेदन पर कार्रवाई का विवरण भी मांगा
अभ्यावेदन में सूचना के अधिकार से संबंधित शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है।
डॉ. चरणजीत सिंह ने कहा है कि इस विषय पर सूचना के अधिकार के तहत आवेदन दिए जाने और उनका उत्तर प्राप्त न होने की शिकायत सामने आई है।
उन्होंने मांग की है कि संबंधित आवेदन किस प्राधिकरण को प्राप्त हुए, उन्हें किन विभागों में स्थानांतरित किया गया और उन पर क्या कार्रवाई हुई, इसका रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाए।
इससे सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग
डॉ. चरणजीत सिंह ने अपने अभ्यावेदन में कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में जांच की मांग की है।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि अभी तक उपलब्ध दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी व्यक्ति, विभाग अथवा ठेकेदार को दोषी ठहराने के बजाय पहले संबंधित सरकारी अभिलेखों का परीक्षण किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि रिकॉर्ड की जांच में स्वीकृत बजट, वास्तविक खर्च, निविदा प्रक्रिया या भुगतान में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
साथ ही यदि सभी कार्य निर्धारित नियमों और स्वीकृतियों के अनुरूप किए गए हैं, तो उनके प्रमाणित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
सार्वजनिक धन की जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी
डॉ. चरणजीत सिंह ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं सीधे आम नागरिकों से जुड़ी होती हैं। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन, रखरखाव, नाम परिवर्तन और अन्य कार्यों पर खर्च होने वाली राशि के संबंध में पारदर्शिता आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन का उपयोग किस उद्देश्य से और किन नियमों के तहत किया गया, इसकी जानकारी नागरिकों को उपलब्ध होनी चाहिए।
अभ्यावेदन का उद्देश्य किसी राजनीतिक विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना बताया गया है।
सरकारी रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
दिल्ली में मोहल्ला क्लिनिकों का नाम बदलकर आरोग्य मंदिर किए जाने से संबंधित खर्च पर उठे सवालों के बीच अब सरकारी अभिलेखों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
केंद्रवार बजट, निविदाओं, ठेकों, भुगतान विवरण और कार्य-पूर्णता प्रमाणपत्रों से यह पता चल सकेगा कि किन कार्यों पर कितनी राशि खर्च की गई।
फिलहाल प्रति केंद्र 25 से 35 लाख रुपये खर्च होने के दावे अपुष्ट हैं। उपलब्ध अभ्यावेदन के आधार पर किसी वित्तीय अनियमितता को सिद्ध नहीं माना जा सकता।
इस मामले में संबंधित सरकारी विभागों की ओर से कोई आधिकारिक जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया है।
डॉ. चरणजीत सिंह ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और संबंधित विभागों से अनुरोध किया है कि जनहित में सरकारी आदेशों, वित्तीय स्वीकृतियों, निविदाओं और भुगतान संबंधी अभिलेख उपलब्ध कराए जाएं तथा यदि किसी अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

