नवी पिल्लै को मिला नोबेल शांति पुरस्कार, गाजा युद्ध पर नेतन्याहू को ठहरा चुकी हैं जिम्मेदार
नई दिल्ली। भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नवी पिल्लै को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। उन्हें यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए मिला है। नवी पिल्लै मानवाधिकारों की रक्षा, युद्ध अपराधों की जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लंबे समय से काम कर रही हैं।
85 वर्षीय नवी पिल्लै ने गाजा युद्ध को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया था। संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र जांच आयोग की अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने उस आयोग के काम का नेतृत्व किया, जिसने अपनी रिपोर्ट में गाजा में फलस्तीनियों के खिलाफ नरसंहार किए जाने का निष्कर्ष निकाला था। आयोग ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत वरिष्ठ अधिकारियों पर नरसंहार के लिए उकसाने के आरोप भी लगाए थे। इजरायल ने इन निष्कर्षों को खारिज किया था। ये आयोग के निष्कर्ष हैं, किसी अंतरराष्ट्रीय अदालत का अंतिम फैसला नहीं।
नवी पिल्लै ने अंतरराष्ट्रीय कानून पर जताई चिंता
नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा के बाद नवी पिल्लै ने कहा कि दुनिया ऐसे दौर से गुजर रही है, जब अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों पर बड़े राजनीतिक हमले हो रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) पर बढ़ते दबाव का भी उल्लेख किया।
पिल्लै के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिशों से ऐसी स्थिति पैदा होने का खतरा है, जिसमें कानून के बजाय ताकत यह तय करने लगे कि किसकी पीड़ा को महत्व दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि युद्ध अपराधों और मानवाधिकार उल्लंघनों के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
नूर्नबर्ग में मिली पुरस्कार की खबर
नवी पिल्लै को पुरस्कार की घोषणा के समय जर्मनी के नूर्नबर्ग में मौजूद थीं। वह उस ऐतिहासिक कोर्टरूम 600 में एक कानूनी सम्मेलन में शामिल थीं, जहां द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नाजी नेताओं पर मुकदमे चलाए गए थे।
उन्होंने इस संयोग को अपने जीवन की यात्रा से जोड़ते हुए कहा कि कानून की पढ़ाई के दौरान नूर्नबर्ग ट्रायल के दस्तावेजों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया था। इन मुकदमों से उन्हें यह समझ मिली कि गंभीर अपराधों के लिए व्यक्तियों को अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के तहत जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
उन्होंने अपना पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय अपराधों से बचे लोगों और न्याय के लिए काम करने वालों को समर्पित किया।
दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष
नवी पिल्लै का जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय तमिल मूल के परिवार में हुआ था। उनका बचपन रंगभेद के दौर में बीता। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन उनके माता-पिता ने शिक्षा को महत्व दिया।
उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ नेटाल से 1963 में कला विषय में स्नातक और 1965 में कानून की डिग्री हासिल की। बाद में उन्होंने हार्वर्ड लॉ स्कूल में उच्च शिक्षा प्राप्त की और 1988 में कानून में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की।
1967 में उन्होंने नेटाल प्रांत में अपनी कानूनी प्रैक्टिस शुरू की। रंगभेद के खिलाफ संघर्ष करने वाले लोगों और राजनीतिक बंदियों के अधिकारों की रक्षा के लिए उन्होंने काम किया। उस दौर में उन्होंने हिरासत में यातना और एकांत कारावास जैसे मुद्दों को भी उठाया।
रवांडा नरसंहार मामले में निभाई अहम भूमिका
नवी पिल्लै 1995 में दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट में कार्यवाहक न्यायाधीश बनीं। उसी वर्ष उन्हें रवांडा के नरसंहार से जुड़े अपराधों की सुनवाई के लिए गठित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
उन्होंने 1999 से 2003 तक इस न्यायाधिकरण की अध्यक्षता भी की। रवांडा नरसंहार से जुड़े एक ऐतिहासिक मामले में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। इस मामले में अदालत ने यह स्थापित किया कि विशेष परिस्थितियों और आवश्यक मंशा के साथ किए गए यौन हिंसा के कृत्य नरसंहार का हिस्सा हो सकते हैं। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय कानून में यौन हिंसा से जुड़े अपराधों की व्याख्या को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया।
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय और संयुक्त राष्ट्र में सेवाएं
नवी पिल्लै ने 2003 से 2008 तक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) में न्यायाधीश के रूप में काम किया। इसके बाद 2008 से 2014 तक वह संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त रहीं।
बाद में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र जांच आयोग की अध्यक्षता की, जो कब्जे वाले फलस्तीनी क्षेत्र, पूर्वी यरुशलम और इजरायल से जुड़े मामलों की जांच कर रहा था। आयोग ने सितंबर 2025 में गाजा में नरसंहार से संबंधित निष्कर्ष प्रकाशित किए। इजरायल ने इन आरोपों को अस्वीकार किया।
नोबेल पुरस्कार से अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था पर ध्यान
नोबेल समिति ने नवी पिल्लै को अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया है। समिति के अनुसार, युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के उनके प्रयास महत्वपूर्ण रहे हैं।
नवी पिल्लै का करियर रंगभेद के खिलाफ संघर्ष से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय अदालतों और संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकारों की रक्षा तक फैला है। उनके सम्मान को ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के महत्व की याद दिलाने वाला माना जा रहा है, जब कई वैश्विक संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव की चर्चा हो रही है।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
सत्य, न्याय और राष्ट्रहित की निर्भीक आवाज़
Rustam-E-Hind Hindi Daily Newspaper
https://l1nq.com/zvf3zgb
सब्स्क्राइब करें।


