भारत में अब भी लाखों लड़कियां बाल विवाह के खतरे में, 2030 तक इसे खत्म करना बड़ी चुनौती
नई दिल्ली: बाल विवाह को खत्म करने के लिए निर्धारित वर्ष 2030 की समय-सीमा नजदीक आ रही है, लेकिन दुनिया के कई देशों में यह सामाजिक समस्या अब भी बनी हुई है। अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बाल अधिकारों के विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि बाल विवाह के मामलों में कमी आने के बावजूद लाखों लड़कियों का बचपन और भविष्य प्रभावित हो रहा है। भारत में भी कम उम्र में शादी की समस्या को पूरी तरह समाप्त करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बाल विवाह रोकने के लिए सरकारी योजनाओं और कानूनों के साथ-साथ समाज की सोच में बदलाव लाना भी जरूरी है। लड़कियों की शिक्षा, सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिए बिना इस कुप्रथा को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल होगा।
भारत में बाल विवाह की स्थिति चिंताजनक
आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में बाल विवाह से प्रभावित लड़कियों और महिलाओं की बड़ी संख्या भारत में रहती है। भारत में आज भी लगभग हर पांच में से एक लड़की की शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले हो जाती है। यह स्थिति लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य के अवसरों पर गंभीर असर डालती है।
कम उम्र में शादी होने के कारण कई लड़कियों को पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ती है। इसके बाद उन्हें घरेलू जिम्मेदारियों और कम उम्र में मातृत्व जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। इससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक स्वतंत्रता पर भी असर पड़ता है।
अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता
अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर बाल अधिकारों से जुड़े विशेषज्ञों ने बाल विवाह समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2030 तक इस प्रथा को खत्म करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकारों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों को मिलकर काम करना होगा।
UNICEF इंडिया की प्रतिनिधि सिंथिया मैकेफ्री ने बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा और बाल विवाह रोकने के प्रयासों को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लड़कियों को शिक्षा और विकास के समान अवसर देना आवश्यक है, ताकि वे अपने भविष्य से जुड़े फैसले खुद ले सकें।
सरकारी योजनाओं से सुधार, लेकिन चुनौतियां बरकरार
‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन्स’ के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत के मुताबिक, सरकारी योजनाओं और जागरूकता अभियानों से बाल विवाह रोकने की दिशा में सुधार हुआ है। हालांकि, कई क्षेत्रों में यह समस्या अब भी बनी हुई है।
गरीबी, शिक्षा की कमी, सामाजिक रूढ़ियां और लड़कियों को लेकर पारंपरिक सोच बाल विवाह के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। कुछ परिवार आर्थिक दबाव या सामाजिक मान्यताओं के चलते बेटियों की शादी कम उम्र में कर देते हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए परिवारों को जागरूक करने के साथ-साथ लड़कियों की शिक्षा जारी रखने में मदद करना भी जरूरी है।
बाल विवाह का लड़कियों के जीवन पर असर
बाल विवाह के कारण लड़कियों की पढ़ाई छूटने और आत्मनिर्भर बनने के अवसर सीमित होने का खतरा रहता है। कम उम्र में गर्भधारण से स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं भी पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा, कम उम्र में शादी होने से लड़कियों के लिए रोजगार और आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करना कठिन हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाल विवाह रोकने के लिए स्कूलों में लड़कियों की उपस्थिति बढ़ाने, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता देने और संदिग्ध मामलों की समय पर पहचान करने की जरूरत है। पंचायतों, स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी से इस दिशा में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
2030 तक बाल विवाह खत्म करने के लिए तेज करने होंगे प्रयास
बाल विवाह को समाप्त करने के लिए कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है। परिवारों को यह समझाना होगा कि कम उम्र में शादी लड़कियों के अधिकारों और उनके भविष्य को प्रभावित करती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2030 तक बाल विवाह खत्म करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए अब प्रयासों में तेजी लानी होगी। लड़कियों को सुरक्षित वातावरण, बेहतर शिक्षा और अपने जीवन के फैसले लेने की स्वतंत्रता देना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


