सुप्रीम कोर्ट से जंतर-मंतर जा रहे 50 से अधिक वकील हिरासत में, CJI के हस्तक्षेप के बाद रिहा
नई दिल्ली, दैनिक रुस्तम-ए-हिंद। दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रस्तावित शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे कई वकीलों को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। यह कार्रवाई 10 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के विरोध में आयोजित प्रदर्शन से पहले की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए वकीलों की संख्या लगभग 50 से 60 थी। बाद में भारत के मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप के बाद उन्हें रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई।
सुप्रीम कोर्ट से जंतर-मंतर की ओर जा रहे थे वकील
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कई वरिष्ठ अधिवक्ता और महिला वकील सुप्रीम कोर्ट परिसर से जंतर-मंतर की ओर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जा रहे थे। इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई को लेकर वकीलों के बीच नाराजगी सामने आई और मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई।
बताया गया कि हिरासत में लिए गए अधिवक्ताओं में वरिष्ठ वकील भी शामिल थे। घटना के दौरान पुलिस की कार्रवाई और कथित तौर पर बल प्रयोग किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जताई चिंता
वकीलों को हिरासत में लिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने मामले में हस्तक्षेप की मांग की। एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर हिरासत में लिए गए वकीलों की सुरक्षा, उनके ठिकाने और कानूनी सहायता तक पहुंच सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।
बार एसोसिएशन ने कथित बल प्रयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच होनी चाहिए और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
CJI के हस्तक्षेप के बाद वकीलों की रिहाई
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अनुरोध के बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने संबंधित अधिकारियों से बात की। इसके बाद हिरासत में लिए गए वकीलों की रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी। रिपोर्टों में बताया गया कि हिरासत में लिए गए वकीलों को कुछ घंटों बाद छोड़ दिया गया।
इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, पुलिस की कार्रवाई और अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन
जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन का उद्देश्य मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाना था। प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी।
पुलिस ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद राजधानी के कई इलाकों में बैरिकेडिंग और पुलिस बल की तैनाती की गई तथा प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं।
रुस्तम-ए-हिंद का सवाल
यदि वकील और नागरिक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए जा रहे थे, तो उन्हें हिरासत में लेने का कानूनी आधार क्या था? पुलिस को ऐसी कार्रवाई के कारणों और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। लोकतंत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी नागरिकों के अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध की स्वतंत्रता का सम्मान करना भी है।
फिलहाल, इस मामले में पुलिस की कार्रवाई के सभी कानूनी पहलुओं और कथित बल प्रयोग की स्वतंत्र जांच से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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