अखिलेश यादव किसान सम्मेलन: किसान खुशहाल होगा तभी मजबूत होगी अर्थव्यवस्था
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को लखनऊ स्थित पार्टी प्रदेश मुख्यालय में आयोजित किसान सम्मेलन के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि किसान खुशहाल होगा तभी देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। किसान देश का पेट भरता है और उसकी तरक्की से ही देश की प्रगति संभव है।
अखिलेश यादव ने किसानों की समस्याओं को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर खाद, बीज, कीटनाशक और पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। खेती में इस्तेमाल होने वाली मशीनों पर जीएसटी का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि इससे किसानों की लागत बढ़ रही है और उनके सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ी हैं।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर किसानों के लिए खाद, बीज, पानी और सस्ती कीटनाशक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने खेती की सिंचाई मुफ्त करने और कृषि क्षेत्र में किसानों को बेहतर सुविधाएं देने की बात कही। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि गन्ना किसानों का भुगतान 24 से 48 घंटे के भीतर किए जाने की व्यवस्था की जाएगी।
बाढ़ से फसलों को नुकसान का उठाया मुद्दा
अखिलेश यादव ने प्रदेश में बाढ़ और जलभराव से किसानों की फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि धान, गन्ना और दलहनी फसलों को नुकसान पहुंचा है और किसानों को पर्याप्त मदद मिलनी चाहिए।
उन्होंने नदियों में सिल्ट जमा होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि समय पर डिसिल्टिंग नहीं होने से नदियों की गहराई कम हो रही है, जिसका असर जल निकासी और बाढ़ प्रबंधन पर पड़ता है। कुशीनगर और गोरखपुर में बाढ़ की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने सरकार की बाढ़ प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठाए।
राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा पर आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संख्या के आधार पर अवसर मिलना चाहिए। उनका आरोप था कि पिछली बार राज्यसभा चुनाव में यदि भाजपा ने कथित तौर पर बेईमानी नहीं की होती तो समाजवादी पार्टी के तीन सांसद राज्यसभा पहुंचते। यह दावा अखिलेश यादव के बयान पर आधारित है।
उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव और बाद के उपचुनावों का भी जिक्र किया। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि कुछ सीटों पर समाजवादी पार्टी समर्थकों के वोट काटे गए। उन्होंने कहा कि पार्टी ने चुनाव आयोग को शपथ पत्र भी दिए थे और इस मामले में जवाब की मांग की गई थी।
राज्यसभा के लिए सपा के दो उम्मीदवारों ने दाखिल किया नामांकन
इसी बीच उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए समाजवादी पार्टी ने प्रो. रामगोपाल यादव और उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया। दोनों ने बुधवार को अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया।
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि मतदान 16 अक्टूबर को होगा और उसी दिन मतगणना की जाएगी।
धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद राज्यसभा चुनाव के समीकरण को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। सपा की ओर से उनके नाम को लेकर पहले ‘सरप्राइज’ उम्मीदवार की बात कही गई थी।
गठबंधन को लेकर अखिलेश ने दिया बयान
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि पहले जो गठबंधन था, वह आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि गठबंधन में सीटों का आधार जीत होगी। रायबरेली में पीडीए रथ यात्रा के दौरान मिले समर्थन का उल्लेख करते हुए उन्होंने पार्टी के पक्ष में बेहतर परिणाम का दावा भी किया।
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में निवेश और उद्योग के मुद्दे पर भी भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश को केवल कागजी दावों और एमओयू की जरूरत नहीं, बल्कि वास्तविक उद्योग और निवेश चाहिए। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर उद्योगों की स्थापना, कारोबार के विस्तार और किसानों को बेहतर सुविधाएं देने की दिशा में काम किया जाएगा।
किसानों के लिए घोषणापत्र में बड़े फैसलों का दावा
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी के आगामी घोषणापत्र में किसानों के हित में कई बड़े फैसले शामिल किए जाएंगे। उन्होंने किसानों की खुशहाली को अर्थव्यवस्था की मजबूती से जोड़ते हुए कहा कि खेती की लागत कम करने, सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने और फसलों का बेहतर मूल्य दिलाने पर जोर दिया जाएगा।
उन्होंने चौधरी चरण सिंह के किसान हित में किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया और कहा कि किसानों के मुद्दे समाजवादी पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
नोट: राज्यसभा चुनाव में कथित बेईमानी, वोट काटे जाने और अन्य चुनावी अनियमितताओं से संबंधित आरोप अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के बयानों के अनुसार हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

