ASI हरजीत सिंह की हत्या के बाद ‘वर्दी न पहनने’ वाली एडवाइजरी वायरल, पंजाब पुलिस ने बताया फर्जी
चंडीगढ़/अमृतसर: पंजाब के अमृतसर में ASI हरजीत सिंह की हत्या के बाद पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर एक कथित एडवाइजरी वायरल हुई। इसमें दावा किया गया कि बॉर्डर जिलों में तैनात पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर आते-जाते समय वर्दी नहीं पहनने और सादे कपड़ों में यात्रा करने की सलाह दी गई है। हालांकि, पंजाब पुलिस ने इस वायरल संदेश को फर्जी बताया है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि पंजाब पुलिस मुख्यालय या उसके अधीन किसी अन्य पुलिस कार्यालय की ओर से ऐसी कोई एडवाइजरी जारी नहीं की गई है।
पंजाब पुलिस ने 22 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक फैक्ट चेक पोस्ट जारी करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर जाते या लौटते समय वर्दी नहीं पहनने अथवा सादे कपड़ों में यात्रा करने का निर्देश देने वाली कोई आधिकारिक एडवाइजरी जारी नहीं हुई है। पुलिस ने लोगों और पुलिसकर्मियों से सोशल मीडिया पर प्रसारित ऐसे संदेशों को नजरअंदाज करने और जानकारी के लिए केवल आधिकारिक माध्यमों पर भरोसा करने की अपील की।
क्या दावा किया जा रहा था?
वायरल संदेश में दावा किया गया था कि अमृतसर में ASI हरजीत सिंह की हत्या के बाद पुलिसकर्मियों की निजी आवाजाही के दौरान उनकी पहचान सार्वजनिक न हो, इसके लिए उन्हें कुछ सुरक्षा सावधानियां बरतने को कहा गया है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेश के मुताबिक, पुलिसकर्मियों को घर से ड्यूटी जाने और ड्यूटी से घर लौटने के दौरान वर्दी नहीं पहननी चाहिए और सादे कपड़ों में यात्रा करनी चाहिए। इसके अलावा निजी यात्रा के दौरान ऐसी चीजों को प्रदर्शित करने से बचने की बात कही गई थी, जिससे उनकी पुलिसकर्मी के तौर पर पहचान जाहिर हो।
हालांकि, पंजाब पुलिस ने इस पूरे संदेश को FALSE ADVISORY यानी फर्जी एडवाइजरी बताते हुए कहा कि पुलिस मुख्यालय या उसके अधीन किसी कार्यालय ने ऐसा निर्देश जारी नहीं किया है।
विपक्ष ने सरकार पर उठाए सवाल
वायरल एडवाइजरी के बाद पंजाब में कानून-व्यवस्था और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और प्रताप सिंह बाजवा के अलावा शिरोमणि अकाली दल के महासचिव बिक्रम सिंह मजीठिया ने सोशल मीडिया पर सामने आए दावों को लेकर पंजाब सरकार से सवाल किए।
पवन खेड़ा ने कथित एडवाइजरी का हवाला देते हुए पंजाब की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि अगर पुलिसकर्मियों को सार्वजनिक और निजी वाहनों में वर्दी नहीं पहनने की सलाह दी जा रही है तो यह राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रताप सिंह बाजवा ने भी सोशल मीडिया पर सामने आए दावे का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों को कथित तौर पर घर से वर्दी में नहीं आने और थाने पहुंचने के बाद वर्दी पहनने की सलाह दी जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल किया।
अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी कथित एडवाइजरी और सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो का जिक्र करते हुए पंजाब में पुलिस और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए। ये सभी दावे राजनीतिक नेताओं की ओर से किए गए थे, जबकि पंजाब पुलिस ने वायरल एडवाइजरी को आधिकारिक दस्तावेज नहीं माना है।
ASI हरजीत सिंह की कैसे हुई थी हत्या?
ASI हरजीत सिंह की 18 सितंबर को अमृतसर के गेट हकीमा थाना क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, वह दाना मंडी में ड्यूटी पर तैनात थे। घटना के बाद पंजाब पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की और अमृतसर तथा आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई।
पुलिस ने मामले की जांच के दौरान CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी इनपुट के आधार पर संदिग्धों की पहचान करने की बात कही थी। इसके बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी की तलाश के लिए अभियान चलाया।
मुख्य आरोपी दीपक सिंह का एनकाउंटर
पंजाब पुलिस के मुताबिक, ASI हरजीत सिंह की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे दीपक सिंह को अमृतसर पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मार गिराया गया। पुलिस कमिश्नर हरमनबीर सिंह गिल ने इस कार्रवाई की पुष्टि की थी।
पुलिस ने जांच में आरोपी के कथित पाकिस्तान कनेक्शन की भी बात कही है। पुलिस के अनुसार, दीपक सिंह पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था। पुलिस ने यह भी दावा किया कि मामले की जांच में पाकिस्तान में बैठे कथित हैंडलर्स और एक नेटवर्क की भूमिका सामने आई है। इन दावों की जांच सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की जा रही है।
मोबाइल फोन और CCTV से जांच में मिले सुराग
पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ में मारे गए आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ था। पुलिस इस फोन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। मामले में CCTV फुटेज भी जांच का अहम हिस्सा है।
पुलिस का दावा है कि ASI हरजीत सिंह को गोली मारने के बाद आरोपी कथित तौर पर घटनास्थल पर वापस आए थे और वहां कुछ समय का वीडियो रिकॉर्ड किया था। पुलिस के अनुसार, यह वीडियो विदेश में बैठे कथित हैंडलर्स तक भेजे जाने की आशंका है। मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच से इस दावे से जुड़े और तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
पुलिस ने क्या कहा?
वायरल एडवाइजरी को लेकर पंजाब पुलिस ने साफ किया है कि पुलिस मुख्यालय या उसके अधीन किसी कार्यालय ने पुलिसकर्मियों को वर्दी में यात्रा नहीं करने का निर्देश नहीं दिया है।
पुलिस ने सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे ऐसे संदेशों को लेकर लोगों से सावधानी बरतने को कहा है। पुलिस के मुताबिक, किसी भी आधिकारिक निर्देश या सुरक्षा संबंधी जानकारी के लिए केवल पंजाब पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल और अधिकृत माध्यमों को ही आधार बनाया जाना चाहिए।
इस मामले में ASI हरजीत सिंह की हत्या की जांच और आरोपियों से जुड़े नेटवर्क की जांच अलग स्तर पर जारी है। वहीं, वायरल एडवाइजरी को लेकर पंजाब पुलिस ने इसे फर्जी बताते हुए अपना स्पष्टीकरण जारी कर दिया है।

