बदरीनाथ धाम में पितृपक्ष पर आस्था का सैलाब, 8 दिन में ब्रह्मकपाल पहुंचे 60 हजार से ज्यादा श्रद्धालु
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ धाम में पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। भगवान बद्रीविशाल के दर्शन के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु ब्रह्मकपाल तीर्थ पहुंचकर अपने पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण कर रहे हैं। तीर्थ पुरोहित समाज के मुताबिक, पिछले आठ दिनों में ब्रह्मकपाल में 60 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।
पितृपक्ष के दौरान बदरीनाथ धाम में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में लगातार भीड़ दिखाई दे रही है। दूसरे चरण की चारधाम यात्रा शुरू होने के बाद यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही में भी तेजी आई है।
ब्रह्मकपाल में पिंडदान के लिए उमड़ी भीड़
बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्मकपाल को पितरों के पिंडदान और तर्पण के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां पितरों के निमित्त किए गए श्राद्ध कर्म से उनकी आत्मशांति और मोक्ष की कामना की जाती है। इसी वजह से पितृपक्ष के दौरान ब्रह्मकपाल में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
पितृपक्ष 2026 के दौरान रूस से आए सात श्रद्धालुओं ने भी ब्रह्मकपाल में अपने पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण किया था। उन्होंने धार्मिक विधि-विधान के साथ अनुष्ठान कर पितरों की आत्मशांति और मोक्ष की कामना की।
मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें
पितृपक्ष के साथ ही बदरीनाथ धाम में भगवान बद्रीविशाल के दर्शन के लिए भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। मंदिर परिसर में लंबी कतारें लग रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, भीड़ बढ़ने के कारण बुजुर्ग श्रद्धालुओं को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और कुछ यात्रियों को बिना दर्शन किए वापस लौटना पड़ा।
मुख्य यात्रा सीजन के बाद अक्टूबर में एक बार फिर बदरीनाथ धाम में यात्रियों की संख्या बढ़ी है। गांधी जयंती के लंबे वीकेंड के कारण भी उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ है। बदरीनाथ मार्ग पर भी वाहनों की संख्या बढ़ने से यातायात प्रभावित हुआ है।
यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन अलर्ट
बदरीनाथ हाईवे पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन यातायात को नियंत्रित करने के लिए गेट सिस्टम समेत अन्य व्यवस्थाओं का इस्तेमाल कर रहा है। बड़ी संख्या में वाहन बदरीनाथ धाम की ओर पहुंच रहे हैं, ऐसे में यात्रियों को जाम और यातायात संबंधी परेशानी से बचाने के लिए व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
चमोली जिला प्रशासन की ओर से 2026 की बदरीनाथ यात्रा के लिए यात्रा नियंत्रण कक्ष और चारधाम यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं। प्रशासन ने यात्रा संबंधी जानकारी और सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं।
पितृपक्ष में बदरीनाथ का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के कारण पितृपक्ष के दौरान बदरीनाथ धाम और विशेष रूप से ब्रह्मकपाल में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की स्मृति में पिंडदान, तर्पण और अन्य श्राद्ध कर्म करते हैं।
बदरीनाथ को धार्मिक परंपराओं में मोक्ष धाम के रूप में भी विशेष महत्व प्राप्त है। ब्रह्मकपाल को कपाल मोचन तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है और यहां पिंडदान से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।
रिपोर्टर; ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
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