बागपत में कुत्ते के काटने के बाद किशोर की रेबीज से मौत, समय पर इलाज नहीं मिलने से बिगड़ी हालत
उत्तर प्रदेश के बागपत में कुत्ते के काटने के बाद समय पर उपचार नहीं मिलने का दर्दनाक मामला सामने आया है। केतीपुरा मोहल्ले में रहने वाले किशोर साहिल की रेबीज के लक्षण सामने आने के बाद मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक, कुत्ते के काटने के बाद उसे समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाई जा सकी। बाद में उसकी हालत बिगड़ने लगी और उसे हवा-पानी से डर लगने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे।
इस घटना ने एक बार फिर कुत्ते के काटने के बाद तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की जरूरत को उजागर किया है। रेबीज के लक्षण शुरू होने के बाद बीमारी बेहद गंभीर हो सकती है, इसलिए काटने या खरोंचने की घटना को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कुत्ते के काटने के बाद नहीं हुआ समय पर इलाज
मिली जानकारी के मुताबिक, साहिल को करीब दो महीने पहले एक कुत्ते ने काट लिया था। बताया जा रहा है कि उसने इस घटना के बारे में परिजनों को जानकारी नहीं दी, जिसके चलते समय पर इलाज नहीं हो सका। शुरुआत में परिवार को इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह घटना आगे चलकर इतनी गंभीर हो सकती है।
कुछ समय बाद साहिल की तबीयत बिगड़ने लगी। उसके व्यवहार में बदलाव आने लगे और स्थिति लगातार चिंताजनक होती गई। जब लक्षण गंभीर हो गए, तब परिजन उसे इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।
10 दिन तक हवा और पानी से डरने जैसे लक्षण
परिजनों के मुताबिक, साहिल की हालत बिगड़ने पर वह हवा और पानी से डरने लगा था। उसके मुंह से लगातार लार टपक रही थी और पानी सामने आने पर वह उसे हटाने के लिए चिल्लाता था। परिवार ने बताया कि करीब 10 दिन तक उसकी स्थिति गंभीर बनी रही।
साहिल की बहन फिरदौस के अनुसार, कुत्ते के काटने के बाद परिवार को घटना की जानकारी नहीं थी। बाद में जब उसकी तबीयत खराब हुई, तो पहले उसे निजी चिकित्सक को दिखाया गया। आराम नहीं मिलने पर उसे अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल पहुंचने के बाद भी नहीं बच सकी जान
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, साहिल को पहले बागपत के जिला अस्पताल ले जाया गया। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे दिल्ली के गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
चिकित्सकों ने बताया कि किशोर में रेबीज के गंभीर लक्षण थे। पानी से डर लगना यानी हाइड्रोफोबिया रेबीज के गंभीर चरण में दिखाई देने वाला लक्षण हो सकता है। इस स्थिति में बीमारी के लक्षण शुरू होने के बाद इलाज की संभावना बेहद सीमित हो जाती है।
परिवार ने आवारा कुत्तों को पकड़ने की मांग की
साहिल की मौत के बाद परिवार में शोक का माहौल है। परिजनों ने मोहल्ले में घूम रहे आवारा कुत्तों को पकड़ने की मांग की है, ताकि दूसरे बच्चों के साथ ऐसी घटना न हो।
स्थानीय स्तर पर कुत्तों के काटने की घटनाओं को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी जानवर के काटने के बाद लापरवाही न करें और तुरंत अस्पताल पहुंचें।
कुत्ते के काटने पर तुरंत क्या करें?
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घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं।
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घाव पर हल्दी, मिर्च, तेल, मिट्टी या अन्य घरेलू पदार्थ न लगाएं।
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तुरंत नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र जाकर डॉक्टर से सलाह लें।
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डॉक्टर के निर्देश के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन और जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्युनोग्लोब्युलिन लगवाएं।
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टीके की खुराकें निर्धारित समय पर पूरी कराएं।
भारत के राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के अनुसार, जानवर के काटने के बाद समय पर चिकित्सा सहायता और जरूरी टीकाकरण बेहद अहम है। रेबीज से बचाव के लिए लक्षणों का इंतजार नहीं करना चाहिए।
बागपत में साहिल की मौत एक दर्दनाक चेतावनी है कि कुत्ते के काटने को मामूली चोट समझकर नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। समय पर उपचार और टीकाकरण से इस गंभीर बीमारी से बचाव संभव है।

